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चौखट पर ही आया उन्नति का प्रकाश, नैराश्य की कोठरी में प्रतीक्षा करते रह गये 63 परिवार

Updated at : 25 Jul 2024 10:05 PM (IST)
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चौखट पर ही आया उन्नति का प्रकाश, नैराश्य की कोठरी में प्रतीक्षा करते रह गये 63 परिवार

राजघाट कोल में विस्थापित कुल 63 भूमिहीन परिवारों के जीवन में उन्नति का प्रकाश उसकी चौखट पर तो आ गयी किंतु अंदर प्रवेश करने से पूर्व ही कहीं काले बादलों में खो गये.

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कजरा. राजघाट कोल में विस्थापित कुल 63 भूमिहीन परिवारों के जीवन में उन्नति का प्रकाश उसकी चौखट पर तो आ गयी किंतु अंदर प्रवेश करने से पूर्व ही कहीं काले बादलों में खो गये. लिहाजा ये भूमिहीन परिवार आज भी उन्नति के प्रकाश की आस में अपनी आंखें टिकाये बैठे हैं.

बताते चलें कि एसएसबी कैंप नरोत्तमपुर कजरा परिसर में अभियान बसेरा के तहत राजघाट कोल में विस्थापित नक्सल प्रभावित कजरा क्षेत्र के घोघरघाटी, कनीमोह, शीतला कोड़ासी, काशी टोला गांव के कुल 63 भूमिहीन परिवारों को वासगीत पर्चा का वितरण किया गया. पर्चा मिलते ही लाभुकों ने आवास निर्माण का कार्य भी किया, परंतु जिला प्रशासन की ओर से चलायी जा रही मुहिम एकदम शिथिल पड़ चुकी है. वहीं इस कार्य को प्रगति पर लाने वाले डीडीसी सुधीर कुमार का तबादला होने से एक बार फिर आदिवासी परिवारों के चेहरे की मुस्कान मायूसी में तब्दील होती नजर आ रही है. इन आदिवासी परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ देकर लंबे इंतजार के बाद चेहरे पर मुस्कान दिखा था. इतना ही नहीं इन लोगों के लिए गांवों में सड़क, स्कूल एवं अस्पताल भी बनाने की बात कही गयी थी. राजघाट कोल में दौरे पर आये वर्तमान डीडीसी कुंदन कुमार से हुए बातचीत पर उन्होंने कहा कि इस कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा, यह बात बोले हुए भी माह बीत गया, परंतु कार्य शिथिल होने के कारण ग्रामीणों को भी इनसे भरोसा उठता जा रहा है.

मूलभूत सुविधा से वंचित है राजघाट कोल

राजघाट कोल बसे हुए आठ वर्ष बाद भी यहां के बच्चों को शिक्षा के लिए पहाड़ पार करना पड़ता है. जिसे लेकर लखीसराय डीएम रजनीकांत राजघाट कोल वहां के लोगों से मिले व उन्होंने कहा था कि राजघाट कोल में बसे बच्चे के लिए जल्द ही राजघाट कोल में विद्यालय की व्यवस्था करायी जायेगी. इतना ही नहीं स्वास्थ्य समस्या को लेकर भी उन्होंने कहा था कि प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा भी इसी राजघाट कोल में होना है, परंतु कई माह बीत जाने के बाद भी यह समस्या जस का तस पड़ा है. ग्रामीण आज भी इसी इंतजार में जी रहे है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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