पूर्णिया में बकरीपालक महिलाओं ने हाईवे पर खोला ‘दीदी का ढाबा’, मिलेगा शुद्ध तेल-मसाले वाला बिहारी मटन

AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: पूर्णिया में महिला बकरीपालकों ने मिलकर राजमार्ग पर 'दीदी का ढाबा' शुरू किया है. जहां स्वच्छ वातावरण में देशी मसालों और शुद्ध तेल से बना बिहारी स्टाइल मटन परोसा जाएगा. यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
Bihar News: बिहार के पूर्णिया जिले से महिला सशक्तिकरण की एक मोटिवेशनल कहानी सामने आई है. यहां महिला बकरीपालकों ने मिलकर राजमार्ग पर ‘दीदी का ढाबा’ शुरू किया है. इस ढाबे पर स्वच्छ वातावरण में देशी मसालों और शुद्ध तेल से तैयार बिहारी स्टाइल मटन परोसा जाएगा. यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
1400 महिला किसानों का जुड़ा है नेटवर्क
इस पहल को दामगारा महिला बकरी पालक उत्पादक कंपनी के माध्यम से संचालित किया जा रहा है. यह कंपनी करीब 1400 महिला किसानों को जोड़कर बकरी पालन से आजीविका मजबूत करने का काम कर रही है.
इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. बकरी पालन के जरिए महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभा रही हैं.
यात्रियों को मिलेगा असली बिहारी स्वाद
राजमार्गों के बढ़ते नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए ‘दीदी का ढाबा’ शुरू किया गया है. यहां आने वाले यात्रियों को साफ-सुथरे माहौल में देशी मसालों और शुद्ध तेल से बना बिहारी मटन मिलेगा. आने वाले समय में पूरे बिहार में 40 से अधिक ढाबे खोलने की योजना बनाई जा रही है. इन ढाबों पर बकरे के मांस से बने अलग-अलग बिहारी व्यंजन परोसे जाएंगे.
‘स्वच्छ मीट ढाबा’ की नई अवधारणा
इस ढाबे का उद्देश्य ‘स्वच्छ मीट ढाबा’ (Clean Meat Dhaba) की अवधारणा को बढ़ावा देना है. यहां आधुनिक स्वच्छता मानकों का ध्यान रखा जाएगा. बेहतर गुणवत्ता वाले मांस और साफ-सफाई के साथ खाने की नई व्यवस्था तैयार की जा रही है. इससे लोगों को स्वस्थ और सुरक्षित भोजन मिलेगा.
किसानों को मिलेगा स्थायी बाजार
इस पहल से यात्रियों को जहां स्थानीय स्वाद का आनंद मिलेगा, वहीं बकरी पालक किसानों को भी फायदा होगा. उन्हें अपने पशुओं के लिए एक स्थायी और बेहतर बाजार मिलेगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय फूड इंडस्ट्री को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
महिलाओं की बदली जिंदगी
दामगारा महिला बकरी पालक उत्पादक कंपनी से जुड़ी विमला देवी जैसी कई महिलाएं इस पहल से आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं. बकरी पालन से वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और समाज में नई पहचान बना रही हैं.
विशेषज्ञों ने भी सराहा मॉडल
लघु पशुपालन के क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रोफेसर संजीव कुमार ने इस पहल को सराहनीय बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की पहल पशुपालन, फूड इंडस्ट्री और महिला उद्यमिता को एक साथ जोड़ती है. उन्होंने कहा कि अगर इस मॉडल को प्रोत्साहन मिला, तो बिहार में बकरी पालन से जुड़े किसान राज्य की अर्थव्यवस्था में 2000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दे सकते हैं.
दूसरे जिलों के लिए बन सकता है मॉडल
ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय खाद्य उद्योग को जोड़ने वाला ‘दीदी का ढाबा’ आने वाले समय में बिहार के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है.
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By Abhinandan Pandey
भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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