इसके पूर्व भी लुटते रहे हैं जैन तीर्थ यात्री

Published at :28 Nov 2015 7:39 PM (IST)
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इसके  पूर्व भी लुटते रहे हैं जैन तीर्थ यात्री

इसके पूर्व भी लुटते रहे हैं जैन तीर्थ यात्री जमुई . अहिंसा की पावन भूमि पर लूटपाट की सिलसिला कोई पुरानी नहीं है. आज बैखौफ अपराधियों में अहिंसा के प्रर्वत्तक भगवान महावीर के प्रतिमा को ही चोरी कर लिया है. इसके पूर्व भी कई बार अपराधियों ने यहां और इस मार्ग पर आने-जाने वाले श्रद्धालु […]

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इसके पूर्व भी लुटते रहे हैं जैन तीर्थ यात्री जमुई . अहिंसा की पावन भूमि पर लूटपाट की सिलसिला कोई पुरानी नहीं है. आज बैखौफ अपराधियों में अहिंसा के प्रर्वत्तक भगवान महावीर के प्रतिमा को ही चोरी कर लिया है. इसके पूर्व भी कई बार अपराधियों ने यहां और इस मार्ग पर आने-जाने वाले श्रद्धालु भक्तों पर अपना तांडव किया है. बताते चलें कि जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के दर्शन को लेकर सालों भर देश-विदेश से जैन धर्माबलिंयों का आना-जाना लगा रहता है. लेकिन नबंवर से जनवरी माह तक यहां आने वाले श्रद्धालु भक्तों की संख्या में काफी वृद्धि हो जाती है. जैन सोसाइटी के सदस्य लछुआड़ की मानें तो जाड़े के दिनों में सैकड़ों की संख्या में रोज श्रद्धालु आते हैं और भगवान महावीर का दर्शन कर शांति का पैगाम लेकर वापस अपना घर लौट जाते हैं. जैन यात्री सर्वप्रथम लछुआड़ स्थित जैन धर्मशाला में विश्राम करने के बाद करीब दस किलो मीटर की दूरी तय कर भगवान महावीर का दर्शन कर वापस लौट हैं. लेकिन इस दस किलो मीटर की रास्ता यात्रियों के लिए अनूकूल नहीं होता रहा है. दो-तीन साल पूर्व भगवान महावीर के दर्शन को आने वाले जैन धर्माबलबिंयों पर अपराधियों के बढ़ते कहर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा दस किलोमीटर की रास्ता में वाहन के परिचालन पर रोक लगा दिया गया था. इसके उपरांत श्रद्धालु भक्त पैदल व डोली के सहारे अपने परम पूज्य अराध्य देव के दर्शन को जाने लगे थे. बताते चलें कि हाल के दिनों में पुन: स्थानीय प्रशासन की सहमति से जैन यात्रियों को लाने-ले-जाने के लिए वाहन का परिचालन शुरू किया गया था. दस किलो मीटर की दूरी तय करने के लिए श्रद्धालु भक्तों से प्रति यात्री एक हजार से पंद्रह सौ रुपया किराया के रूप में लिया जाता है. वाहन चालकों द्वारा इतना अधिक किराया वसूल लिये जाने पर जैन यात्री अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहते है जितना किराया मुंबई से पटना एसी कोच में नहीं लगता है. उससे अधिक किराया दस किलो मीटर की दूरी तय करने में लग जाता है. जैन यात्री कहते हैं कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस पर्यटन स्थल का बिहार के बाहर भारी बदनामी हो रही है.जैन यात्रियों ने सरकार और प्रशासन से अहिंसा की पावन भूमि पर शांति स्थापित करवाने को लेकर सक्रिय भूमिका निभाने की आशा व्यक्त किया है.

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