महंगी दाल से आम लोग परेशान

Published at :22 Nov 2015 6:52 PM (IST)
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महंगी दाल से आम लोग परेशान

महंगी दाल से आम लोग परेशानफोटो संख्या-01-बनवारी रायफोटो संख्या-02-रामौतार मंडलफोटो संख्या-03-राजनंदन कुमारफोटो संख्या-04-जगदीश गोपफोटो संख्या-05-चंद्रप्रकाश फोटो संख्या-06-विजय यादवप्रतिनिधि, मेदनीचौकीदालों की महंगाई को लेकर प्रखंड के लोग काफी परेशान हैं. दालों की महंगाई की असर साग-सब्जी, मांस-मछली पर भी पड़ा है. जैसे ही लोगों ने इन वस्तुओं का विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया, […]

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महंगी दाल से आम लोग परेशानफोटो संख्या-01-बनवारी रायफोटो संख्या-02-रामौतार मंडलफोटो संख्या-03-राजनंदन कुमारफोटो संख्या-04-जगदीश गोपफोटो संख्या-05-चंद्रप्रकाश फोटो संख्या-06-विजय यादवप्रतिनिधि, मेदनीचौकीदालों की महंगाई को लेकर प्रखंड के लोग काफी परेशान हैं. दालों की महंगाई की असर साग-सब्जी, मांस-मछली पर भी पड़ा है. जैसे ही लोगों ने इन वस्तुओं का विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया, वैसे ही इनके भी दाम बढ़ने लगे हैं. सेवानिवृत्त डाकपाल जगदीश गोप ने कहा कि इन वस्तुओं के दाम नियंत्रण के लिए अब तक सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. जबकि इस साल उत्पादित दालों के बाजारों में आने में अभी चार माह का समय लगेगा. दलहन की अगली फसल का क्या भविष्य होगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता. सामाजिक कार्यकर्ता बनवारी प्रसाद राय ने कहा कि मौसम का मिजाज बिगड़ने से सब्जियों का उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. महंगाई को लेकर प्रति व्यक्ति दाल तथा सब्जी की खपत में भारी गिरावट बाजारों से ज्यादा गांवों में दिख रहा है. गांव के गरीब किसान और खेतिहर मजदूर दाल के स्थान पर आलू व प्याज इस्तेमाल कर रहे हैं. इधर प्याज का मूल्य काफी बढ़ गया है. जिससे हमारी थाली से धीरे-धीरे प्याज भी दूर होते जा रहा है. रामावतार मंडल ने कहा कि दाल व प्याज का स्टॉक बाजारों में उपलब्ध है. वह हम किसानों से खरीदा गया है. जो दाल 30 रुपये प्रति केजी के भाव से बिकी थी. वही अब 70 से 80 रुपये प्रति केजी के भाव से बिक रही है. यह मुनाफा खोरी है. सरकार जमाखोरों तथा मुनाफाखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करे तभी महंगाई पर काबू पाया जा सकता है. जकड़पुरा के राजनंदन कुमार कहते हैं कि दाल तथा प्याज की खेती को बढ़ावा देने से स्थिति काबू में होगी. इसके लिए किसानों को अच्छे किस्म के बीज की व्यवस्था होनी चाहिए व किसानों को उचित दाम की गारंटी दी जानी चाहिए. फिलहाल किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. दवा व्यवसायी विजय यादव के मुताबिक दाल की जमाखोरी रोकने से समस्या का हल हो सकता है. सरकार विदेशों से दाल का आयात कर तत्काल मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण पा सकती है. पीरीबाजार के चंद्रप्रकाश के मुताबिक दाल व अन्य खाद्यान्न की आसमान छूती कीमतों ने रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है. अब तो लोग दाल की जगह अन्य विकल्प से काम चला रहे हैं.

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