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प्रशासनिक उदासीनता के कारण बेरोकटोक चल रही जुगाड़

Updated at : 06 Nov 2019 8:49 AM (IST)
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प्रशासनिक उदासीनता के कारण बेरोकटोक चल रही जुगाड़

सूर्यगढ़ा : आज वायु प्रदूषण एक जटिल समस्या बन चुकी है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक जो भी कदम उठाया गया वह अप्रभावी साबित हो रहा है. हाल में ही बढ़ते प्रदूषण के कारण सभी जगह त्राहिमाम मचा है. शहरों की स्थिति बदतर होती जा रही है. ग्रामीण इलाका भी इससे अछूता नहीं रहा. […]

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सूर्यगढ़ा : आज वायु प्रदूषण एक जटिल समस्या बन चुकी है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक जो भी कदम उठाया गया वह अप्रभावी साबित हो रहा है. हाल में ही बढ़ते प्रदूषण के कारण सभी जगह त्राहिमाम मचा है. शहरों की स्थिति बदतर होती जा रही है.

ग्रामीण इलाका भी इससे अछूता नहीं रहा. राज्य सरकार नें बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए 15 साल पुराने व्यावसायिक व सरकारी वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. खेतों में पुआल जलाने पर भी कार्रवाई का संकेत दिया गया है. बढ़ते प्रदूषण में जुगाड़ गाड़ी का बड़ा योगदान है.
राज्य सरकार ने बीते डेढ़ वर्ष पूर्व ही बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर तत्काल प्रभाव से राज्य में चलने वाली जुगाड़ गाड़ियों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था लेकिन आज भी शहर से लेकर ग्रामीण सड़कों पर खुलेआम पुलिस और प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए जुगाड़ गाड़ियां सरपट दौड़ लगा रही है.
एक तरफ जहां इसके परिचालन से सरकार को टैक्स के रूप में होने वाली राजस्व की हानि हो रही है. वहीं दूसरी तरफ इससे शहरों, गांवों व कस्बों में वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है. इससे लोगों पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. प्रशासन गाड़ी के परिचालन रोकने में विफल रहा है. डीजल पंप सेट, मोटरसाइकिल का हैंडिल और रिक्शा-ठेला की बॉडी से स्थानीय स्तर पर वृहत पैमाने पर जुगाड़ गाड़ी तैयार की जाती है.
धड़ल्ले से चल रहे जुगाड़ गाड़ी चालकों के पास ना तो कोई लाइसेंस है और ना ही कोई वैध कागजात. फिर भी नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए पहले सिर्फ सामान ढोते थे, परंतु सस्ता होने के कारण आज ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह यातायात का साधन बनता जा रहा है. वहीं सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं.
सूर्यगढ़ा में 500 से अधिक जुगाड़ गाड़ी का हो रहा परिचालन : सूर्यगढ़ा प्रखंड में लगभग 500 से अधिक जुगाड़ गाड़ी का परिचालन हो रहा है. अकेले सूर्यगढ़ा एवं आसपास के क्षेत्र में लगभग 200 जुगाड़ गाड़ी का परिचालन हो रहा है.
इन जुगाड़ गाड़ी का परिचालन मोटर व्हीकल नियम को ताक पर रखकर किया जा रहा है. अब तक इन जुगाड़ गाड़ी के परिचालन पर रोक लगाने की दिशा में कदम नहीं उठाया गया. मामले को लेकर पूछने पर सूर्यगढ़ा थानाध्यक्ष चंदन कुमार गोल-मटोल जवाब दे गये.
सूर्यगढ़ा थानाध्यक्ष ने बताया कि जितने भी जुगाड़ गाड़ी का परिचालन हो रहा है उसके खिलाफ सरकार के निर्देशानुसार सख्ती बरती जा रही है. जुगाड़ गाड़ी चालक को लगातार परिचालन बंद करने की हिदायत दी जा रही है, निर्देश नहीं मानने पर कार्रवाई होगी. गरीब लोग जुगाड़ गाड़ी पर आवागमन करते है इसलिये कार्रवाई में थोड़ी परेशानी हो रही है. जुगाड़ गाड़ी पर समान के साथ यात्री भी ढोया जा रहा है.
चालक कहते, गरीबी के कारण चला रहे गाड़ी : जुगाड़ गाड़ी चालक रवि ने कहा कि हमलोग गरीब आदमी हैं, पहले गांव में मजदूरी किया करते थे. जब से जुगाड़ गाड़ी बाजार में आई है उसे खरीद कर किसी सामान ढोते हुए किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं. अभी तक किसी ने नहीं रोका है. अगर रोका जायेगा तो हम सभी कोई नया काम की तलाश करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया था निर्देश
केंद्र सरकार ने भी ऐसे वाहनों के प्रोटोटाइप के मंजूरी का प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है. ऐसी स्थिति में परिवहन विभाग द्वारा इन वाहनों का निबंधन, परमिट, बीमा, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है. वहीं जुगाड़ गाड़ियों से दुर्घटना होने की स्थिति में भी प्रभावित व्यक्ति या वाहनों को भी किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति का दावा नही किया जा सकता था.
सरकार ने अपने आदेश में भी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का हवाला दिया था. जिसमें कोर्ट ने मोटरयान अधिनियम 1988 का हवाला देते हुए तत्काल इसके परिचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था.
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