लखीसराय के मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर में उमड़ती है आस्था, मंगलवार और शनिवार को जुटते हैं हजारों श्रद्धालु

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बड़हिया स्थित मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर

Maa Bala Tripur Sundari Temple: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शक्तिपीठ की स्थापना मां वैष्णो देवी के संस्थापक भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा द्वारा जनकल्याण के उद्देश्य से की गई थी. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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बड़हिया (लखीसराय) से शशिकांत मिश्रा की रिपोर्ट:

Maa Bala Tripur Sundari Temple: लखीसराय जिले के बड़हिया में पवित्र गंगा तट पर स्थित मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शक्तिपीठ की स्थापना मां वैष्णो देवी के संस्थापक भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा द्वारा जनकल्याण के उद्देश्य से की गई थी. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

नवरात्र में लाखों श्रद्धालुओं का लगता है जमावड़ा

मंदिर में शारदीय और वासंतिक नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इस अवसर पर बिहार ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

संगमरमर से बना भव्य मंदिर आकर्षण का केंद्र

कई सौ वर्ष पुराने इस मंदिर का पुनर्निर्माण वर्ष 1992 में सफेद संगमरमर से कराया गया था. लगभग 151 फीट ऊंचा मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के शिखर पर स्थापित स्वर्ण कलश और मां का ध्वज इसकी दिव्यता को और बढ़ाते हैं.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये की लागत से श्रीधर सेवाश्रम धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया है, जहां दूर-दराज से आने वाले भक्त ठहर सकते हैं.

गर्भगृह में स्थापित है चांदी का भव्य सिंहासन

हाल ही में मंदिर के गर्भगृह में 50 किलोग्राम चांदी से निर्मित 30 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा भव्य घुमावदार सिंहासन स्थापित किया गया है. बनारस के कारीगरों द्वारा तैयार यह सिंहासन मंदिर की भव्यता और आकर्षण को नई पहचान दे रहा है.

मंदिर में मां बाला त्रिपुर सुंदरी सहित कुल पांच पिंडों की पूजा होती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सर्पदंश पीड़ित को मंदिर का अभिमंत्रित जल पिलाने से विष का प्रभाव समाप्त हो जाता है.

मंदिर के मुख्य पुजारी राहुल झा हैं, जबकि ललित झा और अजय झा सहयोगी पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. मंदिर का पट प्रतिदिन सुबह 5 बजे खुलता है और रात 9 बजे बंद होता है.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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