शरीर से टॉक्सिन को निकाल रक्त संचार बढ़ाती हैं हिजामा कपिंग थेरेपी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Oct 2019 9:30 AM

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कुर्लीकोट : ठाकुरगंज नगर पंचायत के वार्ड दो में क्लब मैदान शीलता मंदिर के समीप मिस्बा हाउस में हिजामा कपिंग थेरेपी का इलाज चिकित्सक मनीष कुमार द्वारा किया जा रहा है. इलाज के दौरान मनीष कुमार ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हिजामा कपिंग थैरेपी हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है. दुनिया के […]

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कुर्लीकोट : ठाकुरगंज नगर पंचायत के वार्ड दो में क्लब मैदान शीलता मंदिर के समीप मिस्बा हाउस में हिजामा कपिंग थेरेपी का इलाज चिकित्सक मनीष कुमार द्वारा किया जा रहा है. इलाज के दौरान मनीष कुमार ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हिजामा कपिंग थैरेपी हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है. दुनिया के हर हिस्से में इस पद्धति का प्रयोग किया जाता है. इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है.

शरीर को निरोग बनाये रखने का काम रक्त पर निर्भर है. रक्त के संचार से शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखता है. यह कपिंग थैरेपी रक्त संचार के अवरोध को खत्म कर अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त पहुंचाती है. इस चिकित्सा के तहत रक्त में मौजूद विषैले पदार्थ, मृत कोशिकाओं व अन्य दूषित तत्वों को बाहर निकालकर रोगों से बचाव किया जाता है. इससे नये खून का निर्माण होता है और कई बीमारियां दूर हो जाती हैं.
साथ ही मांसपेशियों व उत्तकों पर दबाव पड़ने से इनमें लचीलापन आता है. थेरेपी के दौरान सावधानी की बहुत जरूरत होती है. इसलिए, इसका इलाज इसे चिकित्सक विशेषज्ञ से ही करानी चाहिए. ताकि, किसी शरीर में किसी प्रकार की परेशानी न हो. इसमें इलाज के दौरान कोई जोखिम नहीं है. यह लगभग बिना दर्द वाली पद्धति है.
जिसमें, इलाज के दौरान प्रयोग करने वाली ब्लेड शरीर में चुभने वाली इंजेक्शन से भी कम दर्द महसूस होता है. जिसमें हर रोगी के शरीर में अलग व नये कप और ब्लेड का प्रयोग किया जाता है. इससे किसी प्रकार की कोई इंफेक्शन नहीं होता हैं. इलाज के बाद तुरंत बचाव के लिए हिजामा के बाद त्वचा पर एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन भी लगाया जाता है. सभी रोगों में यह इलाज फायदेमंद है. खासतौर पर हर प्रकार के दर्द में इस इलाज में सफलता पाई गयी हैं.
कई रोगों के लिए फायदेमंद है हिजामा कपिंग थेरैपी
सियाटिका, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महिलाओं में इंफर्र्टिलिटी, माहवारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, साइनुसाइटिस, मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड की समस्या, पेट के रोग, चेहरे पर दाने व दाग-धब्बे और गंजेपन में यह थेरेपी कारगर है. जिसमें कई दर्जनों लोगों का इलाज अबतक सफल हो चुका हैं.
उन्होंने बताया कि युवा टीम के साथ सीमांचल क्षेत्र में किशनगंज में ठाकुरगंज और अररिया के शिवपुरी में इलाज के लिए दो केंद्र खोले गये हैं. जिसमें लगातार मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं और सफल इलाज पाकर दिन व दिन इस ओर लोगों का भरोषा बढ़ता जा रहा है. अब, अपने राज्यों से बाहर जाकर इलाज कराने वाले हिजामा कपिंग थेरेपी के मरीजों के लिए सुखद बात हैं. हिजामा कपिंग थैरेपी का इलाज मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच अधिक प्रचलित हैं. जिससे इसके मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई हैं.
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