होटलों व रेस्टोरेंटों में फिर सुलगने लगे लकड़ी-कोयले के चूल्हे

होटलों व रेस्टोरेंटों में फिर सुलगने लगे लकड़ी-कोयले के चूल्हे
आपूर्ति में अनिश्चितता से संचालक परेशान, कामकाज व स्वाद दोनों हो रहे प्रभावित
धुएं व प्रदूषण के बीच भोजन पकाने को मजबूर हुए ढाबा मालिक, प्रशासन से जल्द समाधान की मांग
ठाकुरगंज. क्षेत्र में रसोई गैस की भारी किल्लत ने अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की कमर तोड़ दी है. पिछले कुछ दिनों से जारी गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण होटल व रेस्टोरेंट संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. स्थिति यह है कि जो रसोई कभी गैस चूल्हों से लैस थी, वहां अब मजबूरी में दोबारा लकड़ी व कोयले के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है.
दशकों पीछे लौटी होटल संचालकों की रसोई
रेस्टोरेंट व ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस सिलिंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं. इस वजह से उन्हें पुराने और पारंपरिक तरीकों पर निर्भर होना पड़ रहा है. संचालकों ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए बताया कि लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने में समय अधिक लगता है, जिससे ग्राहकों को समय पर भोजन देना चुनौतीपूर्ण हो गया है. गैस की कमी के कारण वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था करने से रोजाना का बजट बिगड़ रहा है. कोयला व लकड़ी जलाने से निकलने वाले धुएं से न केवल रसोई में काम करने वालों को दिक्कत हो रही है, बल्कि आसपास प्रदूषण भी बढ़ रहा है.
ग्राहकों व संचालकों ने उठायी मांग
ठाकुरगंज के स्थानीय निवासियों व होटल मालिकों ने जिला प्रशासन व संबंधित गैस एजेंसियों से इस ओर ध्यान देने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि आपूर्ति को जल्द ही सुचारू नहीं किया गया, तो कई छोटे ढाबों व होटलों के सामने बंद होने की नौबत आ सकती है. बताते चलें कि एक तरफ जहां घरेलू गैस को लेकर जिले में गहमागहमी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर ठाकुरगंज जैसे व्यापारिक केंद्रों में व्यावसायिक सिलिंडरों की किल्लत ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है.
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