विकसित भारत की नई पहचान, परिवार नियोजन हर दंपति की शान”
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Jul 2024 8:31 PM
सदर अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विश्व जनसंख्या दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिले के सदर अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय सांसद डॉ मो जावेद ने फीता काटकर किया.
किशनगंज.हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. अपना जिला इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां जनसंख्या वृद्धि दर राज्य और राष्ट्रीय औसत से अधिक है. जिले में जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर समस्या है, जिसके प्रभाव दूरगामी हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आर्थिक सशक्तिकरण, और जागरूकता के माध्यम से हम जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित कर सकते हैं और किशनगंज जिले को एक समृद्ध और स्थायी भविष्य की ओर अग्रसर कर सकते हैं.
इसी क्रम में जिले के सदर अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विश्व जनसंख्या दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिले के सदर अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय सांसद डॉ मो जावेद ने फीता काटकर किया.|उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा की विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य परिवार नियोजन के महत्व लैंगिक, समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य और मानव अधिकारों जैसे विभिन्न जनसंख्या संबंधी मुद्दों पर लोगों की जागरूकता बढ़ाना है. इसका लक्ष्य जनसंख्या के मुद्दों तथा यह कैसे समग्र विकास योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावित करता है इस पर लोगों का ध्यान केंद्रित करना है. उक्त कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार , डीएस डॉ अनवर हुसैन , गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ उर्मिला कुमारी, डीपिएम् , डीपिसी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि सहित स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे.दो बच्चों के बीच सही अंतर ज़रूरी: सांसद
मेले को संबोधित करते हुवे सांसद डॉ जावेद आलम कहा कि मिशन परिवार विकास के तहत मेले में पुरुष और महिला दोनों की सहभागिता होनी चाहिए.साथ ही उन्होंने ने कहा कि सही उम्र में शादी और पहले और दूसरे बच्चों के बीच सही अंतर ज़रूरी है. सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्र में आने वालों व्यक्ति को परामर्श के साथ निशुल्क गर्भनिरोधक साधनों को उपलब्ध कराया जा रहा है .यहा नसबंदी के अलावा परिवार नियोजन के और भी विकल्प मौजूद हैं. जिन लोगों को जिस भी तरीकों में रूचि है वे उस विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं.जनसंख्या वृद्धि गरीबी और बेरोजगारी के साथ पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती
सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया की बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है, जिससे उनकी गुणवत्ता और उपलब्धता कम हो जाती है. पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती है, जैसे जंगलों की कटाई, भूमि का अतिक्रमण, और प्रदूषण में वृद्धि, जनसंख्या वृद्धि गरीबी और बेरोजगारी को बढ़ावा देती है, क्योंकि अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो जाते है,भीड़भाड़ और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं, जिससे लोगों की जीवन प्रत्याशा कम होती है.विकसित भारत की नई पहचान: परिवार नियोजन हर दंपति की शान ”
सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि केवल विकसित भारत की नई पहचान, परिवार नियोजन हर दंपति की शान एक नारा नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण है जो एक सशक्त और समृद्ध भारत की दिशा में हमारे सामूहिक प्रयासों को प्रतिबिंबित करता है. परिवार नियोजन के माध्यम से हम न केवल अपने परिवारों को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. परिवार नियोजन महिलाओं को यह अधिकार देता है कि उनके कब और कितने बच्चे हो. परिवार नियोजन के कई लाभ हैं, जिनमें माता और बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य, गरीबी में कमी और बेहतर शिक्षित आबादी शामिल है. गर्भनिरोधक का उपयोग महिलाओं के लिए विशेष रूप से युवा, कम बच्चों वाली महिलाओं, और लड़कियों में गर्भावस्था से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों को रोकता है. यह स्वास्थ्य के अलावा कई अन्य लाभ प्रदान करता है जिसमें उच्च शिक्षा के अवसर, महिलाओं का सशक्तिकरण, सतत जनसंख्या वृद्धि, व्यक्तियों और समुदाय के लिए आर्थिक विकास इत्यादि शामिल है. पहला गर्भधारण 20 वर्ष की उम्र मे तथा दो बच्चों मे 3 साल का अंतराल होने से मां और बच्चों के स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है एवं गर्भनिरोधक के उपयोग से मातृ मृत्यु की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत की कमी हो सकती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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