मासूमों के हाथों में जुगाड़ वाहन की स्टीयरिंग, ठाकुरगंज की सड़कों पर मंडरा रहा खतरा

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बच्चों के हाथों में जुगाड़ वाहन की स्टीयरिंग

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज शहर से एक ऐसी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जिसने स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा दावों और यातायात नियमों की पोल खोलकर रख दी है. यहाँ शहर के मुख्य फ्लाईओवर के नीचे सड़कों पर दौड़ते एक अवैध जुगाड़ वाहन (कस्टमाइज्ड गाड़ी) की स्टीयरिंग थामे छोटे बच्चों को देखा गया. यह नजारा न केवल सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है, बल्कि बाल श्रम और बच्चों के मौलिक अधिकारों पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.

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स्कूल बैग की उम्र में उठा रहे जिम्मेदारियों का बोझ, कानून व्यवस्था लाचार

ठाकुरगंज शहर के मुख्य मार्गों पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर स्कूल बैग होना चाहिए और उनके हाथों में कलम होनी चाहिए, उस उम्र में वे सड़कों पर भारी-भरकम और अनियंत्रित जुगाड़ वाहनों को संभालते हुए जिम्मेदारियों का बोझ उठाते नजर आ रहे हैं. स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरे इलाके में बिना किसी रजिस्ट्रेशन नंबर, बिना वैध कागजात और बिना किसी सुरक्षा मानकों (जैसे ब्रेक या लाइट) के ये जुगाड़ वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन खतरनाक गाड़ियों को अक्सर नाबालिग और छोटे बच्चे चलाते हैं, जो ट्रैफिक नियमों से पूरी तरह अनजान हैं. यह स्थिति हाईवे पर चलने वाले अन्य राहगीरों और खुद उन मासूमों की जिंदगी के लिए हर पल मौत का कुआं साबित हो रही है.

मजबूरी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी बना मुख्य कारण

सामाजिक विश्लेषकों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि इस गंभीर समस्या के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण छिपे हैं:

  • आर्थिक तंगी व बेरोजगारी: सीमांचल के इस पिछड़े इलाके में आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के कारण कई गरीब परिवारों के पास जीवन यापन का कोई सुदृढ़ साधन नहीं है.
  • जागरूकता का अभाव: शिक्षा और जागरूकता की कमी की वजह से माता-पिता खुद अपने नौनिहालों को कम उम्र में ही मजदूरी, सामान ढोने और वाहन संचालन जैसे जोखिम भरे कामों में झोंक देते हैं.

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल परिवहन विभाग या ट्रैफिक पुलिस का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बच्चों के सुनहरे भविष्य, उनके अधिकारों और बाल श्रम कानून के उल्लंघन से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है.

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग, कभी भी घट सकती है बड़ी दुर्घटना

इस बेलगाम व्यवस्था को लेकर ठाकुरगंज के स्थानीय नागरिकों में विभागीय उदासीनता के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है. शहरवासियों ने जिला प्रशासन, स्थानीय थाना पुलिस और परिवहन विभाग (DTO) से सामूहिक रूप से निम्नलिखित त्वरित कदम उठाने की पुरजोर मांग की है:

  1. अवैध वाहनों पर लगे रोक: सड़कों पर बिना नंबर और बिना परमिट के दौड़ रहे इन अवैध जुगाड़ वाहनों को तुरंत जब्त कर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाए.
  2. नाबालिगों की ड्राइविंग पर प्रतिबंध: किसी भी हाल में नाबालिग बच्चों को स्टीयरिंग या हैंडल न छूने दिया जाए और ऐसा कराने वाले वाहन मालिकों व अभिभावकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए.
  3. शिक्षा से जोड़ने की पहल: श्रम विभाग और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर ऐसे कामकाजी बच्चों को चिन्हित करे और उनका नामांकन सरकारी विद्यालयों में सुनिश्चित कराए.

स्थानीय लोगों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान नहीं लिया, तो शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर कभी भी कोई हृदयविदारक और बड़ा सड़क हादसा घटित हो सकता है.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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