डुमरी घाट : जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश हैं लोग

Published at :20 Nov 2015 9:57 PM (IST)
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डुमरी घाट : जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश हैं लोग

डुमरी घाट : जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश हैं लोग डुमरी पुल मरम्मती कार्य पूर्ण होने मे लगेंगे एक से डेढ वर्ष कार्य एजेंसी ने नवंबर के अंत तक कार्य प्रारंभ किये जाने की जतायी संभावना कार्यस्थल पर कैंप कर कार्य प्रारंभ करने की तैयारी में जुटे है कर्मी साढे ग्यारह करोड़ […]

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डुमरी घाट : जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश हैं लोग डुमरी पुल मरम्मती कार्य पूर्ण होने मे लगेंगे एक से डेढ वर्ष कार्य एजेंसी ने नवंबर के अंत तक कार्य प्रारंभ किये जाने की जतायी संभावना कार्यस्थल पर कैंप कर कार्य प्रारंभ करने की तैयारी में जुटे है कर्मी साढे ग्यारह करोड़ की तकनीकी स्वीकृति फोटो है 13,14 व 15 में कैप्सन- नाव को पानी में ले जाने का प्रयास करते नाविक, पानी में बाइक चलाते लोग व नाव से उतरकर उसराहा तक आते यात्री बेलदौर. कोशी नदी के जलस्तर में भारी गिरावट हो रही है. लोगों के सामने आवागमन की बिकट समस्या उत्पन्न हो गयी. है. लोग जान जोखिम में डालकर पानी में बाइक व पैदल पांव नाव तक किसी तरह पहुंच रहे हैं तथा उसराहा पुल तक आने के लिए लोग नदी के बीच धार के सूखी स्थल पर उतर पर पैदल पानी में चलते हैं. कहीं यात्री को थोड़ी सी भी चूक हो जायेगी तो वे जान गंवा सकते हैं. लेकिन लोगों के परेशानी का विकल्प नहीं ढूंढा जा रहा है. स्टील ब्रिज टूटने से बढ़ी परेशानी बीते 23 जुलाई 2014 को वैक्लपिक स्टील ब्रिज के 170 मीटर भाग पानी मंे बह जाने एवं मरम्मती कार्य हेतु अप्रैल 2015 को क्षतिग्रस्त डुमरी पुल के क्षतिग्रस्त 290 मीटर भाग तोड़ दिये जाने से अस्थाई रूप से इन क्षतिग्रस्त पुल पर हो रहे आवागमन भी बंद हो गया. इसके बाद से लोगों को का सहारा केवल नाव ही बचा है. लोग जान संकट में डालकर कठिन परेशानियों से जूझते हुऐ नाव के सहारे जैसे तैसे नदी पार कर रहे है. जल स्तर में गिरावट से हुई परेशानी बीते एक सप्ताह से जलस्तर में हुई भारी गिरावट एवं नदी किनारे आच्छादित मिट्टी से बने अस्थाई घाटो पर हो रहे तेज कटाव के कारण नाविक , बाईक व पांव पैदल लोगों को उसराहा घाट से एक से डेढ किलोमीटर दुर ही उतार देते है. नाव से उतरने के बाद कीचड़ ,पानी व रेत आदि चुनौतियों का सामना करते डेढ किलोमीटर तक पांव पैदल चलने मंे लोगों के पसीने उतर जाते हैं. जबकि किचड़ व दलदल से बाहर निकलने में बाईक चालकों की हालत बिगड़ जाती है. ट्रेन से जाने की विवशता समस्याओं से उब चुके लोग अब या तो जिला मुख्यालय जाने के लिए सहरसा बख्तियारपुर मार्ग से ट्रेन के सहारा जाने की विवशता बन गयी है या 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर बिजयघाट के रास्ते जाने की मजबुरी बन गयी है. ऐसे में लोगों को हो रही आवागमन संकट का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. कहते हैं विधायक विधायक पन्ना लाल सिंह पटेल ने बताया कि वैक्लपिक स्टील ब्रिज के मरम्मती की स्वीकृति मिल चुकी है. अबिलंब कार्य प्रारंभ करवाया जायेगा.

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