अधिकारी सुस्त, निजी स्कूल वसूल रहे हैं मनमानी फीस
Updated at : 23 May 2018 6:19 AM (IST)
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विद्यालयों की नियमित नहीं होती है जांच निजी विद्यालय चल रहे हैं भगवान भरोसे खगडिया : जिले में संचालित कई निजी विद्यालयों में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं. शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अनदेखी, इन विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, मानक के अनुरूप व्यवस्था की कमी, मनमाने फीस वसूले जाने सहित बच्चों के नामांकन में […]
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विद्यालयों की नियमित नहीं होती है जांच
निजी विद्यालय चल रहे हैं भगवान भरोसे
खगडिया : जिले में संचालित कई निजी विद्यालयों में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं. शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अनदेखी, इन विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, मानक के अनुरूप व्यवस्था की कमी, मनमाने फीस वसूले जाने सहित बच्चों के नामांकन में धांधली की बातें लगातार सामने आती रही है. निजी स्कूल भगवान भरोसे चल रहे हैं, कहना गलत नहीं होगा. क्योंकि निजी विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने को लेकर अधिकारी गंभीर ही नहीं है. जिससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है. अगर नियमित अंतराल में इन विद्यालयों की जांच हो तो निश्चित ही विद्यालय संचालक की मनमानी रुकती और शिक्षा के अधिकार अधिनियम का इन विद्यालयों में अनुपालन भी होता.
जांच के नाम पर होती है खानापूर्ति
निजी विद्यालयों की जांच के नाम पर शिक्षा विभाग के अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं. हाल के दिनों में निजी विद्यालयों की मनमानी रोकने एवं व्यवस्था सुधारने को लोक शिकायत अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई गई थी. इस मामले की सुनवाई में जो बातें सामने आई वो हैरान करने वाली थी. जानकारी के मुताबिक दायर शिकायत के आलोक में लोक शिकायत एडीएम विजय कुमार सिंह ने इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी. डीइओ ने जो रिपोर्ट दी उसके बाद जांच की व्यवस्था पर स्वयं सुनवाई अधिकारी ने भी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए विद्यालयों की जांच में बरती जा रही उदासीनता छोड़ इस में रुचि दिखाने का आदेश जारी किया है.
कागजी खानापूर्ति बंद हो: एडीएम
विद्यालयों की जांच कराने की जगह सिर्फ विद्यालय संचालक को डीइओ निर्देश दे रहें हैं. जिस पर एतराज जताते हुए एडीएम ने विद्यालयों की जांच कराने तथा एक माह में रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया है. सुनवाई के बाद इस मामले में जारी आदेश में लोक शिकायत एडीएम श्री सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि डीइओ नोडल पदाधिकारी हैं. शिक्षा के अधिकार अधिनियम की शर्तों को धरातल पर लागू कराना उनका ही दायित्व है.
जबकि वे(डीइओ)विद्यालयों को व्यवस्था सुधारने एवं बच्चों के नामांकन को सिर्फ आदेश दे रहें हैं. इन्होंने कहा है कि निर्देश की जगह डीइओ को विद्यालयों की व्यवस्था दुरुस्त करने सहित अधिनियम को लागू कराने के लिए विस्तृत रूप रेखा तैयार कर अपने अधीनस्थ पदाधिकारी को जिम्मेवारी सौंपनी चाहिए, तभी विद्यालयों की सतत जांच व व्यवस्था पर निगरानी संभव है. सुनवाई पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि लोक प्राधिकार के द्वारा एक भी विद्यालय का जांच रिपोर्ट नहीं सौंपा गया है.उनके प्रतिवेदन के आधार पर सहज इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्यालय की जांच को लेकर विभागीय अधिकारी सजग नहीं हैं. इनके द्वारा सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरा किया जा रहा है. जो बेहद आपत्तिजनक है. इन्होंने(सुनवाई पदाधिकारी )निजी विद्यालय को लेकर पूर्व में जारी सहित इस आदेश का अनुपालन कराते हुए एक माह में डीइओ से रिपोर्ट मांगी है.
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