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खून की कमी से जूझ रही है हर दूसरी महिलाएं

Updated at : 07 Mar 2026 6:44 PM (IST)
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खून की कमी से जूझ रही है हर दूसरी महिलाएं

खून की कमी से जूझ रही है हर दूसरी महिलाएं

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– कुपोषण के मामले में कटिहार की स्थिति है गंभीर, नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा – आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रभात खास कटिहार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रविवार को तरह तरह के आयोजन की तैयारी की गयी है. महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बड़े-बड़े दावे व घोषणाएं की जायेगी. ऐसी संभावना भी जतायी जा रही है. पर वास्तव में महिलाओं की स्थिति आज भी दयनीय बनी हुई है. यह अलग बात है कि कुछ महिलाएं अपने बलबूते व परिवार के सपोर्ट से ऊंचाई तक पहुंची है. पर अधिकांश महिलाएं आज भी संघर्ष भरा जिंदगी जी रही है. महिलाओं को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. स्वास्थ्य को लेकर भी महिलाओं की स्थिति कटिहार में ठीक नहीं है. रोजगार के मामले में भी आधी आबादी को जूझना पड़ता है. किशोरी व महिलाओं में न केवल पोषण के प्रति समझ कम है. बल्कि कुपोषण के शिकार भी है. अगर सरकार की एक रिपोर्ट पर भरोसा करें तो पिछले पांच-छह वर्षों में कुपोषण के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है. यानी कुपोषित महिलाएं एवं किशोरियों की तादाद बढ़ गयी है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे पांच की रिपोर्ट बताता है कि कटिहार जिले में पिछले पांच/छह वर्षों के दौरान महिलाओं व किशोरियों में कुपोषण बढ़ गयी है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के संदर्भ में सरकार के इस रिपोर्ट व ग्राउंड रियलिटी पर प्रभात खबर की पड़ताल करती यह रिपोर्ट. 61 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी एनएफएचएस-पांच में 6-59 महीने की उम्र में लगभग दो तिहाई बच्चे यानी 65.6 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रसित पाया गया है. जबकि 2015-16 में जारी एनएफएचएस चार की रिपोर्ट में इस आयुवर्ग के 61.3 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित थे. दूसरी तरफ 15-49 आयु वर्ग समूह की 61.0 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है. चार-पांच साल पहले 57.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित थे. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि पीढ़ी दर पीढ़ी कुपोषण चक्र बना हुआ है. इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में केवल 16.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान सौ दिनों या उससे अधिक दिनों तक आयरन और फोलिक एसिड की दवा का सेवन किया. इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के बीच कुपोषण की जानकारी का आधार उम्र के अनुसार कम ऊंचाई, ऊंचाई के अनुसार कम वजन, उम्र के अनुसार कम वजन के आधार पर बच्चों के कुपोषण का आकलन किया गया है. पिछले सर्वे की तुलना इस बार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के वजन में भी गिरावट दर्ज की गयी है. पिछले सर्वे में कटिहार जिले में 45.1 प्रतिशत बच्चे का वजन निर्धारित वजन से कम था. लेकिन इस ताजा सर्वे के अनुसार इस जिले में में 48.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले है. पोषण की कमी का यह है मुख्य कारण बच्चों के खराब पोषण की स्थिति के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बाल अधिकार कार्यकर्ता राजीव रंजन की मानें तो बाल कुपोषण बच्चों के जीवन में बहुत बड़ा क्षति है, जो आगे चलकर किशोरावस्था एवं वयस्क अवस्था पर प्रभाव डालता है. आंगनबाड़ी केंद्रों से गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार कम ही मिल पाता है. आंगनबाड़ी केंद्र की आधारभूत संरचना में भी काफी कमी है. इसलिए नीतियों को पारदर्शी और योजनाओं में और अधिक बजट को बढ़ाकर कुपोषण से संबंधित सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है. जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराना नवजात शिशु के लिए पोषण का एक महत्वपूर्ण घटक है. कोलेस्ट्रोल में पोषक तत्व एंटीबॉडी और प्रतिरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए बच्चे के कुशल जीवन की शुरुआत के लिए गलत सामाजिक प्रथाओं को समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल जरूरी है. इस उम्र समूह के बच्चों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी भी एक चुनौती बनी हुई है. सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिले के बच्चों में एनीमिया में कमी आयी है, लेकिन यह अभी भी चिंताजनक रूप में व्याप्त है. एनएफएचएस-चार व पांच की खास बातें ————————- सूचकांक 2019-20 ———– ————- गर्भवती माता में एनीमिया- 61.0 गैर गर्भवती मातम में एनीमिया- 68.9 महिलाओं में एनीमिया- 66.7

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