परिजनों की चीत्कार से गमगीन हुआ माहौल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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दुखद. देवघर से मंुडन करा कर लौट रहे एक ही परिवार के छह लोगों की मौत से क्षेत्र में पसरा मातम कुरसेला थाना क्षेत्र के रामपुर ग्वालटोली के निकट बुधवार की रात देवघर से पूर्णिया जा रही एक ऑटो अनियंत्रित होकर बजरंग बली मंदिर में घुस गयी, जिसमें एक ही परिवार के छह लोगों की […]
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दुखद. देवघर से मंुडन करा कर लौट रहे एक ही परिवार के छह लोगों की मौत से क्षेत्र में पसरा मातम
कुरसेला थाना क्षेत्र के रामपुर ग्वालटोली के निकट बुधवार की रात देवघर से पूर्णिया जा रही एक ऑटो अनियंत्रित होकर बजरंग बली मंदिर में घुस गयी, जिसमें एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गयी.
कुरसेला/कटिहार : संजय सिंह अपने पुत्र के मुंडन को लेकर खासे उत्साह में थे. वे पुरोहित को दिन दिखा कर अपने पुत्र रोहण का मुंडन कराने देवघर जा रहे थे. मुंडन को लेकर पूर्व से ही गांव घर में तैयारी चल रही थी. सभी रिश्तेदार को देवघर जाने का न्योता दे दिया था. 14 फरवरी मंगलवार को दोपहर के बारह बजे दो ऑटो में घर के सभी सदस्यों के साथ संजय सिंह अलग-अलग ऑटो में सवार हुए. संजय सिंह, अपनी पत्नी रीना व बच्चों के साथ एक ऑटो में तथा दूसरे अन्य रिश्तेदार व घर के सदस्य दूसरे ऑटो में सवार होकर गये. सभी हंसते गाते तथा भगवान का नाम जपते देवघर भी पहुंच गये. देवघर में पूजा अर्चना करने के पश्चात रोहण का मुंडन करवाया. उसके बाद मुंडन समारोह संपन्न कर देर शाम सभी ने देवघर से निकलने का निर्णय लिया.
दोनों ऑटो चालक को बुलाकर सभी अलग-अलग ऑटो में सवार हो गये. संध्या पांच बजे सभी देवघर से निकल गये कि तीन से चार घंटे में वह भागलपुर पहुंच जायेंगे. उसके पश्चात दो घंटे में वह कुरेसला एचएस 77 होकर अपने घर दस से ग्यारह बजे तक पहुंच जायेंगे. इस बीच दोनों ऑटो वहां से खुला. संजय सिंह के ऑटो आगे तथा दूसरा ऑटो उसके पीछे चल रही थी. कुरसेला थाना क्षेत्र के रामपुर ग्वालटोली के समीप एनएच किनारे स्थित बजरंग बली के मंदिर में ऑटो अनियंत्रित होकर घुस गयी. जिसमें चार लोगों ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया. संजय सिंह व उसकी पत्नी रीना ने इलाज के लिए ले जाने के क्रम में मौत हो गयी. घटना को देख कर चालक घटना स्थल से भागने में सफल रहा.
चालक ने थोड़ी सी हमदर्दी दिखाई होती तो बच जाती जानें :
इधर चालक ने घटना को देखते ही वहां से फरार हो गया. अगर चालक ने थोड़ी सी हमदर्दी या फिर समझदारी से काम लिया होता तो संभवत: मृतकों की संख्या में निश्चित ही कमी आती. हालांकि कुरसेला पुलिस का कहना है कि घटना के दस से पंद्रह मिनट बाद ही पुलिस घटना स्थल पर पहुंच गयी थी. लेकिन यह किसी को नहीं मालूम कि घटना की समय क्या थी. तथा कितने देर पहले वह घटना घटी थी. अगर यह घटना दिन में भी होती तो संभवत: मौत के आंकड़ों में निश्चित कमी होती. क्योंकि अगर ससमय घायलों को इलाज के लिए ले जाया जाता तो निश्चित ही कुछ जानें बच जाती.
जांच के नाम पर खानापूर्ति
निर्धारित दूरी से अधिक दूरी तक ऑटो की आवाजाही व क्षमता से अधिक यात्री को बैठाने के मामले में ट्रैफिक पुलिस या परिवहन विभाग के द्वारा जांच के नाम पर अब तक महज खानापूर्ति ही होती रही है. यह सिर्फ ऑटो का ही सवाल नहीं है. बल्कि बस व अन्य सवारी वाहनों, ट्रक, ट्रैक्टर आदि में भी क्षमता से अधिक यात्री व समान लोड किया जाता है. यहां पर भी ट्रैफिक पुलिस व विभाग मौन रहती है. फलस्वरूप बड़े दुर्घटना के रूप में लोगों को जान गंवाना पड़ता है.
गुरुवार को हुई दुर्घटना इसी का नतीजा है. न केवल ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारी को लेकर गंतव्य की ओर गये बल्कि निर्धारित दूरी से काफी लंबी दूरी तक की यात्रा की. कहीं किसी का नजर इस पर नहीं पड़ी.
कहते हैं डीटीओ
जिला परिवहन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पंकज ने इस संदर्भ में प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि यह सही है कि ऑटो को 16 किलोमीटर के दायरे में परिचालन की अनुमति दी जाती है. साथ ही यात्री को बैठाने के लिये क्षमता भी निर्धारित की गयी है. लेकिन अक्सर ऑटो चालक दायरा से अधिक दूरी तक परिचालन करते हैं तथा क्षमता से अधिक यात्री को बैठाते हैं. कभी-कभी जांच कर क्षमता से अधिक यात्री बैठाने पर विभाग द्वारा जुर्माना की जाती है. नेशनल हाइवे व स्टेट हाइवे पर निगरानी की कमी है.
उड़ती है ट्रैफिक नियमों की धज्जियां
जिले के कुरसेला के समीप एनएच-31 पर ऑटो के टकराने के बाद उस पर सवार आधा दर्जन लोगों की हुई मौत ने मौजूदा व्यवस्था पर कई सवाल खड़ा कर दिया है. जिस तरह दुर्घटना हुई है, उससे न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठता है. बल्कि समाज के लोगों पर भी उनकी समझदारी को लेकर सवाल खड़ा हुआ है. आखिर ऑटो देवघर जाकर फिर वापस आ गया. कहीं भी ट्रैफिक पुलिस या अन्य सरकारी महकमा के द्वारा जांच पड़ताल नहीं की गयी. यह सर्वविदित है कि ऑटो को अनुज्ञप्ति 16 किलोमीटर के दायरे में चलाने के लिए दी जाती है. साथ ही तीन व्यक्ति या चार व्यक्ति को बैठाने की इजाजत विभागीय स्तर पर ऑटो चालक को दी जाती है, लेकिन इस मामले में ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारी को लेकर झारखंड के देवघर पहुंच गये. औसतन हर दिन नेशनल हाइवे व स्टेट हाइवे पर वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है. वाहन चालकों के रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगने की वजह से लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं. खासकर एनएच व राज्य उच्च पथ के मोड़ पर किसी तरह का इंडिकेटर नहीं होने से भी दुर्घटना को बढ़ावा मिलती है. गुरुवार को ऑटो की दुर्घटना कुरसेला के मोड़ के पास ही हुआ. ऐसे विभिन्न मोड़ पर विभागीय स्तर से कहीं इस बात का संकेत नहीं दिया गया है कि मोड़ आने पर कितने किलोमीटर स्पीड से वाहनों का परिचालन चालक को करना है. ऑटो के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद आधा दर्जन लोगों के असमय काल के गाल में समा जाने पर जिले भर में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गयी है. साथ ही सरकारी व्यवस्था पर भी लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं.
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