शराब बेचने से किया तोबा, बदल गयी जिंदगी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Nov 2017 4:58 AM
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नवजीवन 4देवल मंडल ने अंडे की दुकान खोलकर अपने चार बच्चों का नामांकन िनजी स्कूल में करवाया राज्य में शराब बंदी लागू होने पर देवल ने शराब नहीं बेचने और नहीं पीने का मन में ठान लिया कुरसेला : नया चौक कुरसेला पर भुंजा अंडा दुकानों के बीच देवल मंडल लगभग पिछले पन्द्रह सालों से […]
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नवजीवन 4देवल मंडल ने अंडे की दुकान खोलकर अपने चार बच्चों का नामांकन िनजी स्कूल में करवाया
राज्य में शराब बंदी लागू होने पर देवल ने शराब नहीं बेचने और नहीं पीने का मन में ठान लिया
कुरसेला : नया चौक कुरसेला पर भुंजा अंडा दुकानों के बीच देवल मंडल लगभग पिछले पन्द्रह सालों से अवैध रूप से देशी शराब बेचने का कार्य करता था. अवैध शराब बेचने से देवल दो बार जेल की हवा भी खा चुका है. परिवार के लोग इनके शराब बेचने के धंधे से आजिज थे. कमाई के लालच में देवल धंधा को नहीं छोड़ पा रहा था. शराब बिक्री करने के लिये देवल पुरी तरह बदनाम हो चुका था. राज्य में शराब बंदी लागू होने पर देवल ने शराब नहीं बेचने और नहीं पीने का मन में ठान लिया. पचपन वर्षीय देवल ने अंडा बेचकर परिवार का गुजारा करने का निश्चय किया. अब देवल उसी चौक पर भुंजा दुकानों के बीच अंडा बेचने का काम कर रहा है.
अंडा के बिक्री से प्रतिदिन दो से ढाई सौ रुपयों की कमाई हो रही है. इन रुपयों के आय से परिवार का अच्छे से गुजारा हो रहा है. देवल ने बताया कि शराब पीने और बेचने के वजह से पोते-पोतियों के पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे. अब चार पोते-पोतियों को अच्छे निजी स्कूल में डाल कर पढ़ाई करवा रहे हैं. बच्चों को अच्छी तालिम देकर लायक बनाना है. पत्नी मीरा देवी सहित परिवार के सारे सदस्य उनके इस नये धंधे से खुश हैं. धंधा से जो समय बचता है. वह समय पोते-पोतियो के पढ़ाई लिखाई पर और परिवार से बातियाने में गुजरता है. यह स्थिति उसे सकून और सुखद अनुभूति देता है. वर्षों बाद उनके घर को शांति खुशहाली मिली है. उन पर लगे बदनामी के धब्बे भी धुलने लगा है. शराब बंदी ने उनके जीवन को बदल कर रख दिया है. अंडा बिक्री के कमाई से उनका आत्मबल बढ़ गया है.
देवल मंडल ने कहा कि जिस दिन से उसने शराब बेचने पीने से तोबा किया है. उस दिन से उसका डर भय भी भाग गया है. कुरसेला थाना के दरोगा बाबू बर्मा साहब उनके अच्छे कार्य को अपनाने का सरकार को हर माह रिर्पोट भेज रहे हैं. पुलिस शराब नहीं बेचने की चेतावनी के साथ उस पर नजर रखती आ रही है. उनके कार्य से पुलिस का उस पर विश्वास बढ़ा है. उसे तो अब शराब नाम से घिन आती है. पुलिस से पकड़े जाने कोई भय नही है. सामाजिक तौर पर शराब बेचने के नाम पर कोई डराने वाला नहीं है. घर के लोग उसे सम्मान के दृष्टि से देखते हैं. घर में रोज का कलह किचकिच खत्म हो गया है. समाज में उनके बेटे और परिवार के सदस्य सिर उठा कर चलते हैं. समाज में उनकी इज्जत भी बढ़ गई है ़ उनका कमाया हुआ रकम अब जमा भी हो रहा है ़ स्थानीय लोग भी देवल में आये बदलाव से बेहद खुश हैं और सरकार के शराबबंदी नीित को सराह रहे हैं ़ उनके जिन्दगी में यह बदलाव शराब बंदी ने लाया है.
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