20 किमी में 1500 बड़े गड्ढे छोटे की तो िगनती ही नहीं

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कटिहार : यह तसवीर देखिए. सड़क पर बने गड्ढे की भयावहता देखिए. यह एनएच 81 है. जगह कटिहार जिले का गेड़ाबाड़ी है. अब अनुमान लगाइए कि इस सड़क की 20 किमी लंबाई में ऐसे 150 से 200 स्पॉट हैं. गड्ढों की भरमार है. छोटे गड्ढों को छोड़ दिया जाये, तो मझोले और बड़े 1500 से […]

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कटिहार : यह तसवीर देखिए. सड़क पर बने गड्ढे की भयावहता देखिए. यह एनएच 81 है. जगह कटिहार जिले का गेड़ाबाड़ी है. अब अनुमान लगाइए कि इस सड़क की 20 किमी लंबाई में ऐसे 150 से 200 स्पॉट हैं. गड्ढों की भरमार है. छोटे गड्ढों को छोड़ दिया जाये, तो मझोले और बड़े 1500 से अधिक गड्ढे जरूर हैं. इस सड़क से होकर जो एक बार गेड़ाबाड़ी से कटिहार चला जाता है, वह फिर दुबारा इस सड़क पर चलने की हिम्मत नहीं करता. मजबूरी में केवल वही लोग यात्रा करते हैं,

जिन्हें हर हाल में कटिहार जाना होता है. अक्सर हादसे होते हैं, गाड़ियां पलटती हैं. लोग जख्मी होते हैं. तमाम अधिकारी इस रास्ते से गुजरते हैं. फिर भी दो-ढाई साल से यह इसी तरह है. स्थानीय लोग बताते हैं कि जब सीएम इस रास्ते से गुजरने वाले होते हैं, तो अधिकारी आनन-फानन में ईंट और बोल्डर को भर देते हैं. 10 दिन गुजरते-गुजरते सड़क फिर पुराने जैसी हो जाती है. सात-आठ साल पहले इसे एनएच घोषित किया गया है. यह सड़क गेड़ाबाड़ी से शुरू होकर बंगाल के मालदा तक जाती है. 100 किमी लंबी इस सड़क में 40 किमी बिहार में और शेष बंगाल में. दिलचस्प है कि अब तक इस सड़क के बिहार और बंगाल के हिस्से भी जुड़ नहीं पाये हैं. छह माह में इस पर

20 किमी में….
कई हादसे हो चुके हैं. तीन बड़े हादसों का जिक्र समीचीन है. एक बार एक बस जर्जर पुल से गिर गयी. एक बार बस पलट गयी. दोनों घटनाओं में दर्जनों लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए. तीसरी घटना एक ऑटो के पलटने की है, जिसमें दो की मौत हो गयी. कोढ़ा के जिला पर्षद सदस्य वकील दास डेढ़ दो साल से इस सड़क के लिए आंदोलन कर रहे हैं. वे एक बार अक्तूबर, 2016 में 48 घंटे तक आमरण अनशन भी कर चुके हैं. वे बताते हैं, कि इसके बाद सड़क के गड्ढों पर चिप्पियां लगा दी गयीं.
मगर ये चिप्पियां जल्द उखड़ गयीं और स्थिति और भयावह हो गयी. फिर उन्होंने इस साल एक महीने पहले सड़क काे जाम कर दिया. पांच घंटे तक जाम लगा रहा. उस वक्त कटिहार के डीएम और एनएचएआइ, पूर्णिया के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने उन्हें आश्वासन दिया था कि 10 दिनों में काम शुरू हो जायेगा. मगर काम आज तक शुरू नहीं हुआ. वे फिर से आंदोलन का मन बना रहे हैं.
एनएचएआइ, पूर्णिया क्षेत्र के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर रविशंकर प्रसाद बताते हैं कि इस सड़क का टेंडर फाइनल हो गया है. विभाग ने 71 करोड़ का यह काम पटना के बाबा हंस कंस्ट्रक्शन को आवंटित किया है. काम बरसात के बाद ही शुरू हो पायेगा.
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