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नल-जल अनुरक्षकों की बढ़ी परेशानी, महीनों से मानदेय बकाया, फीकी रही होली

Updated at : 09 Mar 2026 4:45 PM (IST)
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नल-जल अनुरक्षकों की बढ़ी परेशानी, महीनों से मानदेय बकाया, फीकी रही होली

नियमित कार्य के बावजूद समय पर नहीं किया जाता भुगतान, सिर्फ मिल रहा आश्वासन

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नियमित कार्य के बावजूद समय पर नहीं किया जाता भुगतान, सिर्फ मिल रहा आश्वासन किसी का आठ, तो किसी का 20 माह से मानदेय है बकाया, आर्थिक तंगी से गुजर रहे ऑपरेटर दुर्गावती. स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के वार्डों में लगाये गये नल-जल को नियमित रूप से चलाने के लिए रखे गये अनुरक्षकों को नियमित रूप से भुगतान नहीं किया जाता है. ऐसे में इनकी परेशानी बढ़ गयी है व इस बार होली का त्योहार भी फीका ही रहा. नल-जल चलाने वाले अनुरक्षकों की मानें तो उनका कहना है कि उनसे नियमित रूप से देखभाल का काम लिया जाता है, लेकिन आश्रितों को समय पर भुगतान कभी नहीं किया जाता. नतीजा यह है कि हमलोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गयी हैं. जानकारी के अनुसार, किसी का पिछले आठ माह का, तो किसी का 12 माह व किसी का 20 माह से भी अधिक का मानदेय बकाया है. हद तो यह है कि कई लोगों को काम शुरू करने से अब तक मात्र 10 हजार रुपये देकर सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा. क्या कहते हैं अनुरक्षक –खामीदौरा पंचायत के वार्ड 12 के अनुरक्षक शिव प्रसाद पासवान कहते हैं कि अक्तूबर 2020 से पानी सप्लाई शुरू की गयी थी. तब से अब तक देखरेख का कार्य किया जा रहा है. पांच वर्ष बीत गये, लेकिन ठेकेदार द्वारा अब तक टुकड़ों में सिर्फ 45 हजार रुपये का ही भुगतान किया गया है. शेष बकाया राशि अब तक नहीं मिली. छह मार्च को उनकी मां का भी निधन हो गया है, ऐसे में आर्थिक तंगी के कारण परेशानी और बढ़ गयी है. संवेदक से गुहार लगाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया. –खामीदौरा पंचायत के वार्ड दो के ऑपरेटर रवि शंकर दूबे ने बताया कि जब से नल-जल लगा है, ठेकेदार द्वारा उनके खाते में मात्र 10 हजार रुपये ही भेजे गये हैं. संवेदक मेंटेनेंस रजिस्टर भी मांगकर ले गया, तब उम्मीद जागी थी कि पारिश्रमिक मिल जायेगा, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा. होली जैसे पर्व पर भी भुगतान नहीं होने से जीविकोपार्जन मुश्किल हो चला है. उन्होंने विभाग का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है. — वार्ड नंबर 10 का नल-जल चलाने वाले अखिलेश्वर बिंद का कहना है कि हर दिन समय पर मशीन चलाते हैं व देखभाल भी करते हैं, लेकिन भुगतान के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है. समय पर पैसा नहीं मिलने से काफी तकलीफ उठानी पड़ रही है. ## क्या कहते हैं संवेदक इस संबंध में संबंधित संवेदक ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया पांच वर्ष का कार्यकाल बीत गया, लेकिन दो वर्ष का भुगतान रुका हुआ है. इधर कार्य में लगे लोग भुगतान की दुहाई दे रहे हैं, भुगतान कैसे किया जाये, कुछ समझ में ही आ रहा है. क्या कहते हैं अधिकारी इस संबंध में पूछे जाने पर विभाग के सहायक अभियंता नीरज शर्मा द्वारा बताया गया लगभग दो-ढाई साल से भुगतान नहीं हुआ है. भुगतान के लिए संबंधित फाइल भेजी गयी है.

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