झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से मौत मामले में तीन सदस्यीय टीम ने की क्लिनिक की जांच
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 May 2024 8:49 PM
झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से अधेड़ व्यक्ति की हुई मौत के मामले में शुक्रवार को सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मीना कुमारी के आदेश के आलोक में स्वास्थ्य विभाग की गठित तीन सदस्यीय टीम ने भगवानपुर बाजार में पहुंचकर संबंधित क्लीनिक की जांच की.
भगवानपुर. झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से अधेड़ व्यक्ति की हुई मौत के मामले में शुक्रवार को सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मीना कुमारी के आदेश के आलोक में स्वास्थ्य विभाग की गठित तीन सदस्यीय टीम ने भगवानपुर बाजार में पहुंचकर संबंधित क्लीनिक की जांच की. जांच टीम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ राजेंद्र चौधरी, एसीएमओ सह जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी सह जिला महामारी पदाधिकारी डॉ सत्य स्वरूप शामिल थे. साथ ही उनके सहयोग में थानेदार उदय कुमार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार, स्वास्थ्य प्रबंधक तारकेश्वर उपाध्याय के साथ-साथ प्रखंड स्तर के कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी जांच के दौरान उपस्थित थे. शुक्रवार की दोपहर करीब एक बजे आरोप के घेरे में फंसी अराध्या क्लीनिक में पहुंची टीम ने प्रिसक्रिप्शन पैड, वहां बिछाये गये बेड, दवाखाना समेत उससे संबंधित ड्रग लाइसेंस के साथ-साथ अन्य कई बिंदुओं पर जांच की. गौरतलब है कि गुरुवार की सुबह भगवानपुर गांव निवासी शिव मूरत मल्लाह के 55 वर्षीय पुत्र लल्लन मल्लाह की अराध्या क्लीनिक में इलाज के क्रम में मौत हो गयी थी. तब क्लीनिक के संचालक डॉ एचएस प्रसाद (हरिशंकर प्रसाद) के ऊपर परिजनों तथा उसके सैकड़ों समर्थकों ने अनावश्यक दवाओं को देकर जान से मार डालने का आरोप लगाया था. इस दौरान क्लीनिक के संचालक व उसके परिजनों तथा मृतक के परिजनों व समर्थकों के बीच काफी देर तक मारपीट करने, धक्का-मुक्की व क्लीनिक को पेट्रोल डालकर जला डालने की कोशिश करने जैसी वारदात को देखा गया. इस बीच अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शिव शंकर कुमार के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस प्रशासन व जनप्रतिनिधि घटनास्थल पर पहुंचे और किसी तरह से घंटों तक मशक्कत करने के बाद जहां एक तरफ उग्र भीड़ को शांत कराया. वहीं, झोलाछाप डॉक्टर हरिशंकर प्रसाद को आक्रोशित लोगों के चंगुल से बचाकर सुरक्षात्मक पूर्वक थाने में पहुंचाने के साथ-साथ डेड बॉडी को अंत्य परीक्षण हेतु जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल पहुंचाया गया. बताया जाता है कि जब जांच टीम आरोप के घेरे में आये क्लीनिक पर पहुंची थी, तब क्लीनिक के मुख्य दरवाजे के शीर्ष भाग में दीवार पर चिपकाये गये भगवानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पूर्व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ कुमार गंगानंद के बोर्ड को हटा दिया गया था. – क्या कहती हैं जांच टीम इधर, जांच टीम के सदस्य डॉ राज नारायण प्रसाद व डॉ राजेंद्र चौधरी ने बताया कि क्लीनिक में ड्रग मेडिकल भी है, जिसका लाइसेंस 2015 से 2020 तक था. ऐसे में अब 2024 चल रहा है. इस लिहाज से ड्रग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है. जांच टीम ने बताया कि संबंधित सभी बिंदुओं को मोबाइल के कमरे में कैद किया गया है, जांच रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सिविल सर्जन को सौंपी जायेगी. इसके आलोक में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी अग्रेत्तर कार्यवाही करेंगी.
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