विकास की रफ्तार थमी, एक साल से नहीं हुई पंचायत समिति की बैठक

प्रत्येक दो माह के अंतराल पर पंचायत समिति की बैठक कराने का है प्रावधान
फोटो 8 प्रखंड कार्यालय मोहनिया # प्रत्येक दो माह के अंतराल पर पंचायत समिति की बैठक कराने का है प्रावधान राशि के अभाव में पांच साल में सिर्फ छह बार हुई पंचायत समिति की बैठक नियमावली के अनुसार 30 बैठकें होनी थीं, लेकिन बजट की कमी से सदन की कार्यवाही पड़ी ठप # प्रभात खास # मोहनिया सदर. पंचायतों के विकास के लिए आवंटित की जाने वाली राशि के अभाव में पंचायतों का विकास कार्य प्रभावित है, जिसका नतीजा है कि पंचायत समिति के लगभग साढ़े पांच वर्ष के कार्यकाल में अब तक सिर्फ छह बार ही पंचायत समिति की बैठक बुलायी गयी है. राशि की कमी सदन की बैठक में भी बाधक बनी है. प्रमुख व पंचायत समिति के सदस्यों में भी बैठक बुलाने की उत्सुकता नहीं रह गयी है, क्योंकि राशि का आवंटन ही नहीं हो रहा है, तो बैठक बुलाकर और योजनाएं लेकर वे करेंगे ही क्या? स्थिति यह है कि राशि के अभाव में पूर्व में पंचायत समिति द्वारा चयनित योजनाओं का भी कार्य नहीं कराया जा रहा है. 24 अक्तूबर 2021 को पंचायत चुनाव संपन्न हुआ था. 26 अक्तूबर को मतगणना, जिसके बाद 31 दिसंबर 2021 को सभी निर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी गयी. प्रमुख व उपप्रमुख का चुनाव होने के बाद 10 फरवरी 2022 को पंचायत समिति की पहली बैठक, 20 जुलाई 2022 को दूसरी, 04 नवंबर 2022 को तीसरी, 20 अप्रैल 2023 को चौथी, पहली फरवरी 2024 को पांचवीं और 21 मार्च 2025 को पंचायत समिति की छठवीं बैठक बुलायी गयी थी. उसके बाद आज तक पंचायत समिति की बैठक आयोजित नहीं की जा सकी है. यदि हम पंचायत समिति की नियमावली का अवलोकन करें तो उसमें स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक दो माह के अंतराल पर पंचायत समिति की बैठक करायी जाये. जबकि, विशेष परिस्थितियों में कभी भी विशेष बैठक बुलाये जाने का प्रावधान है. इस बैठक का सीधा लाभ ग्रामीण जनता को मिलता है, क्योंकि इन्ही बैठकों में महत्वपूर्ण एजेंडों पर सदन में सबके सामने चर्चा की जाती है और उनमें से जो जनहित के लिए अधिक आवश्यक हो उसको योजना में प्राथमिकता के साथ क्रम वार चयनित किया जाता है, लेकिन यहां तो पंचायत चुनाव 2021 को संपन्न होने व निर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों को शपथ ग्रहण लिए लगभग पांच वर्ष से अधिक का समय हो गया, लेकिन अब तक सिर्फ पंचायत समिति की छह बैठक ही करायी गयी है. जबकि, उक्त अवधि के बीच लगभग 30 बार पंचायत समिति की बैठक होनी चाहिए थी. # 2018 से 2020 का दौर आने लगा याद आज पंचायत समिति सदस्यों को पंचायत चुनाव 2016 में निर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों का वर्ष 2018-2020 के बीच दो खेमे में विभाजित हो जाना और इसी तरह एक खेमा प्रमुख व बीडीओ के साथ था, तो पंचायत समिति सदस्यों का दूसरा खेमा उप प्रमुख के साथ खड़ा था. उसका परिणाम यह हुआ कि एक पक्ष ने दूसरे पक्ष की योजनाओं में की गयी गड़बड़ियों की पोल इस कदर खोल कर रख दी कि डीएम को भी जांच टीम गठित कर मामलों की जांच करानी पड़ी थी, जिसमें दोषियों के विरुद्ध एफआइआर तक दर्ज करायी गयी. उस समय भी पंचायत समिति की बैठक समय पर नहीं करवाने व पंचायत समिति सदस्यों के बीच योजनाओं का समान वितरण नहीं करने से बगावत का बिगुल फूंका गया था. यही स्थित आज भी है, जहां पंचायत समिति की बैठक समय पर नहीं करवाने व पंचायत समिति सदस्यों में किसी को औसत से बहुत अधिक व किसी को औसत से बहुत कम योजनाओं का दिया जाना तकरार का मूल कारण बना हुआ है. इससे लोगों को वर्ष 2018 से 2020 के बीच पंचायत समिति के कार्यकाल की याद आने लगी है. पंचायत चुनाव 2021 में निर्वाचित होने के बाद प्रमुख व उपप्रमुख ने लगभग दो वर्ष तक बेहतर सामंजस्य स्थापित कर व्यवस्था को संचालित किया, उससे ऐसा लग रहा था कि एक मिसाल कायम होगी, लेकिन बीच में खटास इस कदर बढ़ी की सब कुछ बिखरता चला गया. # बोले प्रमुख प्रतिनिधि इस संबंध में पूछे जाने पर प्रमुख पुनीता देवी के प्रतिनिधि सह पति राजेश प्रसाद गुप्ता ने कहा कि राशि के अभाव में पंचायत समिति की बैठक नहीं हो रही है. राशि नहीं है तो बैठक बुलाकर व योजना लेकर हम लोग करेंगे क्या? राशि के अभाव में पंचायतों का विकास कार्य प्रभावित है.
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