आरएसडीसी कॉलेज में अनियमितता को लेकर मंत्री ने कुलपति को लिखा पत्र, आज होगी जांच

Published at :24 Feb 2025 9:02 PM (IST)
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आरएसडीसी कॉलेज में अनियमितता को लेकर मंत्री ने कुलपति को लिखा पत्र, आज होगी जांच

महाराणा प्रताप कॉलेज के बाद अब जिले के एक और कॉलेज राजर्षि शारिवाहन डिग्री कॉलेज में गड़बड़ी और अनियमितता को लेकर घमासान शुरू हो गया है.

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भभुआ कार्यालय. महाराणा प्रताप कॉलेज के बाद अब जिले के एक और कॉलेज राजर्षि शारिवाहन डिग्री कॉलेज में गड़बड़ी और अनियमितता को लेकर घमासान शुरू हो गया है. राजर्षि शारिवाहन डिग्री कॉलेज में जनप्रतिनिधि सदस्य सह अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो जमा खां द्वारा सरकार की तरफ से कॉलेज को मिलने वाले अनुदान की राशि के वितरण में अनियमितता बरते जाने के साथ अवैध तरीके से शशि निकाय सचिव व अध्यक्ष बनाये जाने को लेकर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति को मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है. इस पर विश्वविद्यालय द्वारा जांच के लिए तीन सदस्य टीम का गठन किया गया है. जांच टीम में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के अंतर्गत अर्थशास्त्र के विभाग अध्यक्ष डॉ धीरेंद्र सिंह को संयोजक, कुलाधिपति द्वारा मनोनीत अधिषत सदस्य डॉ संतोष तिवारी व वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के हिंदी विभाग के स्नातकोत्तर डॉ मुकेश कुमार को टीम में शामिल किया गया. उक्त टीम आज यानी मंगलवार को जनप्रतिनिधि सदस्य अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खां के पत्र पर लगाये गये आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपेगी. जांच को लेकर राजर्षि शारिवाहन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य द्वारा विद्यालय के सभी शिक्षक व कर्मियों को 25 फरवरी को आवश्यक रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है. = शासी निकाय भंग करने के लिए मंत्री ने लिखा है पत्र राजर्षि शारिवाहन डिग्री कॉलेज के शासी निकाय में जनप्रतिनिधि सदस्य सह चैनपुर से विधायक व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खां ने विश्वविद्यालय के कुलपति को लिखे पत्र में कहा है कि राजर्षि शारिवाहन कॉलेज में जो शासी निकाय का गठन हुआ है, वह पूरी तरह से अवैध है. उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा राजर्षि डिग्री कॉलेज में मुझे तदर्थ समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, इस बीच 10 मई 2023 को शासी निकाय की बैठक बुलाकर मुझे अध्यक्ष पद से हटकर शिक्षक प्रतिनिधि को अध्यक्ष व असंवैधानिक रूप से चयनित शिक्षाविद सदस्य को सचिव बनाया गया. जबकि, उसे बैठक में जनप्रतिनिधि सदस्य के रूप में मेरा सरकारी सदस्य के रूप में अनुमंडल पदाधिकारी का व दानदाता सदस्य की उपस्थिति नहीं थी और ना ही उनसे सहमति लिया गया और उसे विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदन भी दे दिया गया, जो की नियम के विरुद्ध है. इसलिए शासी निकाय को भंग करते हुए उक्त कॉलेज मेरे क्षेत्र में आने के कारण जनप्रतिनिधि सदस्य की अध्यक्षता में तदर्थ समिति का गठन किया जाये. उक्त पत्र मंत्री ने 13 मार्च 2024 को विश्वविद्यालय को लिखा गया था. इस पर विश्वविद्यालय द्वारा तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है. = शासी निकाय भंग करने के लिए मंत्री ने दोबारा लिखा पत्र शासी निकाय द्वारा अवैध रूप से अध्यक्ष व सचिव बनाये जाने को लेकर 13 मार्च 2024 को पत्र लिखे जाने के बाद जब विश्वविद्यालय द्वारा शासी निकाय को भंग नहीं किया गया, तो मंत्री जमा खां द्वारा दोबारा 18 अक्तू 2024 को फिर विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखा गया. इसमें कहा गया कि मेरे द्वारा पहले राजर्षि शारिवाहन डिग्री कॉलेज में शशि निकाय भंग कर नयी तदर्थ समिति बनाने के लिए पत्र लिखा गया था, जिसमें कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गयी. इसके बावजूद बिना मेरी सहमति या उपस्थिति के शासी निकाय की बैठक 23 अगस्त 2024 को की गयी और उसमें कई निर्णय लिये गये, जो कि सरासर मनमाना पूर्ण व नियम के विरुद्ध कार्य हैं. ऐसे में उक्त निर्णय को सामान्य किया जाये और मेरे द्वारा दिये गये पत्र के अनुसार शासी निकाय को भंग कर तदर्थ समिति बनायी जाये. = दो भागों में बंटे कॉलेज के कर्मी व शिक्षक राजर्षि शारिवाहन कॉलेज भगवानपुर में महाराणा प्रताप कॉलेज मोहनिया की तरह अंदरूनी राजनीति चरम पर है. कॉलेज के शिक्षक व कर्मी दो भाग में बंटे हुए कॉलेज के एक वर्ग का नाम नहीं छापने के शर्त पर कहना है कि कॉलेज में आज काम बेहतर हो रहा है. कॉलेज की खाते में पैसा भी है. पहले की तरह कॉलेज में गलत नहीं हो रहा है. कुछ लोग अपने निजी लाभ के लिए जानबूझकर कॉलेज के सुचारू रूप से संचालन में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं. माननीय मंत्री व जनप्रतिनिधि सदस्य को गलत जानकारी देकर कॉलेज की व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं, दूसरे गुट का कहना है कि कुछ लोग अवैध तरीके से सचिव व अध्यक्ष के पद पर काबिज हो गये हैं, उनके द्वारा कॉलेज के कुछ शिक्षकों के साथ भेदभाव व अनुदान की राशि वितरण में गड़बड़ी की जा रही है, जो कि सरासर गलत है. कुल मिलाकर कॉलेज में अंदरुनी गुटबाजी चरम पर है. ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा मंत्री के पत्र पर जो जांच टीम में गठित किया गया है, उस पर सब की निगाहें टिकी है.

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