कार के ये संकेत दिखते ही हो जाएं अलर्ट, जानें कब बदलें ब्रेक, टायर और बैटरी

Published by :Shivani Shah
Published at :03 May 2026 11:28 PM (IST)
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Car Warning Signs

गाड़ी चेक करता एक आदमी / एआई इमेज

कार के ब्रेक पैड, टायर और बैटरी खराब होने से पहले कई संकेत देते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है. जैसे ब्रेक कमजोर होना, टायर घिसना या बैटरी का धीमा स्टार्ट. समय पर इन संकेतों को पहचानकर पार्ट्स बदलने से दुर्घटना और महंगे रिपेयर से बचा जा सकता है, साथ ही गाड़ी की सेफ्टी भी बनी रहती है.

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कार अचानक रास्ते में बंद हो जाए या ब्रेक सही समय पर काम न करें, ऐसी स्थिति कोई भी नहीं चाहता. लेकिन सच यह है कि ज्यादातर दिक्कतें अचानक नहीं होतीं, वे पहले छोटे-छोटे संकेत देकर हमें चेतावनी देती हैं. फर्क सिर्फ इतना होता है कि हम उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. ब्रेक पैड की हल्की आवाज, टायर का असमान घिसना या गाड़ी स्टार्ट करते वक्त बैटरी का कमजोर महसूस होना, ये सब संकेत बताते हैं कि अब आपको अपनी गाड़ी पर ध्यान देने की जरूरत है. ऐसे में अगर समय रहते इन बातों को समझ लिया जाए, तो न सिर्फ बड़ी खराबी से बचा जा सकता है, बल्कि आपकी ड्राइव भी सुरक्षित और स्मूद बनी रहती है.

ब्रेक पैड के खराब होने के संकेत

ब्रेक पैड गाड़ी की सुरक्षा का सबसे जरूरी हिस्सा होता है. इसके खराब होने पर आपको कुछ इस तरह के संकेत मिलेंगे-

  • ब्रेक लगाने पर घिसने की आवाज.
  • ब्रेक लगाने में देर लगना या कम असर होना.
  • ब्रेक लगाते समय कंपन (Vibration) महसूस होना.
  • ब्रेक पैड की मोटाई 3mm से कम हो जाना.
  • डैशबोर्ड पर चेतावनी लाइट आना.

अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए, तो ब्रेक डिस्क भी खराब हो सकती है और गाड़ी की ब्रेकिंग कैपेसिटी घट जाती है.

टायर के खराब होने के संकेत

टायर सड़क पर गाड़ी की पकड़ बनाए रखते हैं. इनके खराब होने के संकेत हैं:

  • टायर की ट्रेड डेप्थ 1.6mm से कम होना.
  • टायर पर असमान घिसाव (uneven wear).
  • दरारें या उभार (bulges) दिखना.
  • बार-बार हवा कम होना.
  • चलते समय ज्यादा शोर या वाइब्रेशन.
  • घिसे हुए टायर खासकर बारिश में फिसलन का खतरा बढ़ाते हैं और ब्रेकिंग पर भी असर डालते हैं.

बैटरी के खराब होने के संकेत

बैटरी गाड़ी के सभी इलेक्ट्रिकल सिस्टम का आधार होती है. इसके खराब होने के संकेत:

  • गाड़ी स्टार्ट करते समय इंजन धीरे-धीरे घूमना.
  • हेडलाइट्स का कमजोर या डिम होना.
  • इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी.
  • बैटरी टर्मिनल पर जंग (corrosion).
  • डैशबोर्ड पर बैटरी वॉर्निंग.

आमतौर पर कार बैटरी की लाइफ 3 से 5 साल होती है. इसके बाद इसकी कैपेसिटी कम होने लगती है.

कब बदलें ये पार्ट्स?

  • ब्रेक पैड: 25,000 – 40,000 किमी
  • टायर: 40,000 – 60,000 किमी या 4–5 साल
  • बैटरी: 3–5 साल

क्यों जरूरी है समय पर ध्यान देना?

भारतीय परिस्थितियों—जैसे खराब सड़कें, ट्रैफिक और मौसम की वजह से ये पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं. अगर समय पर इन्हें बदला जाए, तो अचानक ब्रेकडाउन से बचा जा सकता है, महंगे रिपेयर का खर्च कम होता है और गाड़ी की सेफ्टी और परफॉर्मेंस बनी रहती है.

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Shivani Shah

लेखक के बारे में

By Shivani Shah

डिजिटल पत्रकारिता में 3 सालों का अनुभव है. प्रभात खबर में जूनियर टेक कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं. टेक्नोलॉजी कैटेगरी में ये स्मार्टफोन से लेकर टेक-टिप्स, गैजेट्स, एआई, सॉफ्टवेयर और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च-बेस्ड, इन-डेप्थ और यूजर-फोकस्ड कंटेंट लिखती हैं. इसके अलावा ये ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें भी लिखती हैं.

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