जागरूक रहकर करें आकाशीय बिजली से बचाव, सावधानी से बच सकती है जान

Edited by VIKASH KUMAR
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KAIMUR NEWS.पिछले दो चार वर्षों से बारिश के समय या मॉनसून में बिजली कड़कना या गिरना आम बात हो चुकी है. इससे बचने के लिए स्वयं की सावधानी बहुत जरुरी है.

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मौसम के खराब रहने से अक्सर गिर रही जिले में आकाशीय बिजली, लोग आ रहे चपेट में

प्रतिनिधि भभुआ सदर

पिछले दो चार वर्षों से बारिश के समय या मॉनसून में बिजली कड़कना या गिरना आम बात हो चुकी है. इससे बचने के लिए स्वयं की सावधानी बहुत जरुरी है. यद्यपि, आपदा विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष प्रचार-प्रसार कराया जाता है. फिर भी बारिश के दौरान लोगों द्वारा पेड़ के नीचे छिपने, बिजली और मोबाइल के टॉवर के नजदीक होने व पानी के करीब होने के कारण वे आकाशीय बिजली के चपेट में आ जाते हैं. शुक्रवार को ही आकाशीय बिजली के चपेट में आने से चैनपुर के भदौरा गांव में एक 45 वर्षीय महिला की मौत हो गयी. इसके पूर्व अधौरा में एक वृद्ध व्यक्ति की भी आकाशीय बिजली से मौत हो चुकी है. जिलाधिकारी सुनील कुमार ने भी आकाशीय बिजली से बचाव को लेकर अपील करते हुए कहा है कि लोग बारिश के समय व आसमान में आकाशीय बिजली कड़कने के समय घरों के अंदर ही रहे. उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वे घर से बाहर नहीं निकलने या ज्यादा जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें. बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतनी जरूरी है. फिलहाल लोगों को चाहिए कि जब भी बादल गरजना शुरू हों, सुरक्षित स्थानों से बाहर न निकलें और अगर कहीं फंस भी जाये, तो लोगों को चाहिए कि बड़े पेड़ों की बजाय मकानों के नीचे खड़े हो जायें, क्योंकि बिजली अधिकतर ऊंचे स्थानों या लंबे-ऊंचे पेड़ों पर ही गिरती है.

वज्रपात से बचने के जरूरी है यह उपाय

– बिजली गिरने के दौरान मजबूत छत वाला पक्का मकान सबसे सुरक्षित है- घरों में तड़ित चालक लगवायें

– बिजली से चलने वाले उपकरण बंद कर दें- यदि किसी वाहन पर सवार हैं, तो तुरंत सुरक्षित जगह चले जाएं- टेलीफोन, बिजली के पोल के अलावा टेलीफोन और टीवी टावर से दूर रहें- किसी इकलौते पेड़ के नीचे नहीं जाएं- यदि जंगल में हैं, तो कम ऊंचाई और घने पेड़ों के नीचे जाएं- गीले खेतों में हल चलाने या रोपनी करने वाले किसान और मजदूर सूखे स्थानों पर जाएं- नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें- बादल गर्जन के दौरान मोबाइल और छतरी का प्रयोग न करें- घरों के दरवाजे व खिड़कियों पर पर्दे का इस्तेमाल करें

= वज्रपात से यहां रहता है सबसे अधिक खतरा

– वृक्ष बिजली को आकर्षित करते हैं, अत: बिजली चमकते समय वृक्ष के नीचे न खड़े हों- ऊंची इमारतों वाले क्षेत्र में आश्रय न लें समूह में खड़े होने के बजाय अलग- अलग हो जाएं- किसी मकान में आश्रय लेने से बेहतर है, सफर के दौरान अपने वाहन में ही रहें- मजबूत छत वाले वाहन में रहें, खुली छत वाले वाहन की सवारी न करें- बाहर रहने पर धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें- बाइक, बिजली या टेलीफोन के खंभे, तार की बाड़ और मशीन आदि से दूर रहें- तालाब और जलाशयों से दूर रहें यदि आप पानी के भीतर हैं या किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जायें

वज्रपात से मौत या घायल होने पर आपदा प्रबंधन से है मुआवजे का प्रावधान

भभुआ सदर.

बिहार सरकार के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग से वज्रपात के दौरान मौत होने या घायल होने पर मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वज्रपात से किसी व्यक्ति की मौत पर उनके आश्रित को चार लाख का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है. जबकि घायल होने पर प्रति व्यक्ति 4300 से अधिकतम दो लाख रुपये तक देने का प्रावधान है. कच्चा या पक्का घर के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर प्रति मकान 95,100 रुपये, झोपड़ियों की क्षति पर प्रति झोपड़ी 2100 रुपये, दुधारू गाय, भैंस की मौत पर प्रति पशु 30000 रुपये, बैल, भैंसा जैसे पशु की मौत पर प्रति पशु 25000 रुपये और भेड़ व बकरी सहित अन्य की मौत पर प्रति पशु 3000 रुपये देने का नियम निर्धारित किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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