नुआंव अस्पताल, विद्यालय व पावर सब स्टेशन जाने वाली सड़क झील में तब्दील

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नुआंव अस्पताल, विद्यालय व पावर सब स्टेशन जाने वाली सड़क झील में तब्दील

समस्या़ सड़क व नाला निर्माण के साथ पानी निकासी की नहीं हुई व्यवस्था

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नुआंव प्रतिनिधि. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नुआव जाने वाली मुख्य सड़क पिछले कई माह से चमचमाती सड़क व नाला निर्माण के बाद भी जल निकासी के लिए स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है. इस कारण सड़कें झील में तब्दील हो गयी हैं. इससे उक्त पथ से गुजरने वाले मरीजों, परिजनों, विद्यालय जाने वाले बच्चों व मां शतचंडी धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. उक्त ज्वलंत समस्या से समाधान दिलाने को लेकर न, तो जनप्रतिनिधि संवेदनशील है, न ही पदाधिकारी. दरअसल गर्रा गांव की मुख्य सड़क के दक्षिणी छोर पर पिछले कई वर्षों से दोनों किनारे नाले का निर्माण नहीं होने से जलजमाव की स्थित उत्पन्न थी. स्कूलों बच्चों को आवागमन में काफी परेशानी ग्रामीणों की गंभीर समस्या को देखते हुए पांच वर्षों पहले पूर्व सांसद अश्वनी कुमार चौबे ने सड़क की ढलाई करायी. साथ तीन वर्ष पूर्व पंचायत की मुखिया पुष्पा देवी सड़क के दोनों तरफ नाले का निर्माण कराया. किंतु नाले से निकलने वाले पानी का मुख्य सड़क मोहनिया बक्सर पथ के तरफ आगे का निकास नहीं होने के कारण गांव के घराें से निकला गंदा पानी मुख्य सड़क पर पसरा हुआ है. धरातल पर नजर डालें तो बीते नवरात्र के दिनों में पूजा-अर्चना करने मां सतचंडी धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी गंदे पानी के बीच से होकर मां के धाम जाना पड़ा. वहीं, गांव के सैकड़ों बच्चे आज भी सरकारी विद्यालय पढ़ने जाने के दौरान गंदे पानी के बीच से होकर गुजरने को विवश हैं. प्रखंड की 10 पंचायतों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले मरीज व उनके परिजनों को भी जलजमाव के बीच से होकर अस्पताल जाना होता है, जबकि विद्युत से संबंधित किसी शिकायत करने जाने वाले लोगों को भी इसी रास्ते से होकर गर्रा पावर सब स्टेशन का सफर तय करना पड़ता है. जलजमाव से निजात पाने को लेकर अगर तीन मुहानी से नुआंव बक्सर एनएच 319 ए की मुख्य सड़क के किनारे बनने वाले नाले से इसे जोड़ा जाये या लिंक सड़क के किनारे सोखता आदि का निर्माण कराया जाये, तो जल जमाव समस्या से निजात मिल सकती है. जानकारों की माने, तो काफी वर्षों पूर्व मोहनिया-बक्सर पथ की मुख्य सड़क गांव के बीच से होकर गुजरती थी, तब सड़क काफी चौड़ी हुई करती थी, किंतु बीतते वक्त के साथ मुख्य सड़क गांव के बाहर बाइपास बनी व आज उक्त सड़क के किनारे नाला निर्माण के लिए सरकारी भूमि नहीं होने का रोना रोया जा रहा है. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि अंचल के सीओ द्वारा उक्त समस्या पर पहल कर अगर सरकारी भूमि की मापी करायी जाये, तो इसका समाधान निकल सकता है. # क्या कहते है मुखिया प्रतिनिधि मुखिया प्रतिनिधि द्वारिका प्रसाद ने कहा गांव में नाले का निर्माण कराया गया है. जल निकासी के लिए तीनमुहानी के बाद सड़क के दोनों तरफ नाला निर्माण के लिए रैयतों द्वारा निजी भूमि होने की बात बतायी जा रही है. सीओ द्वारा अगर मापी करा सरकारी भूमि को चिह्नित कर दिया जाये, तो नाला निर्माण या सोखता बनाकर समस्या का समाधान किया जा सकता है. # क्या कहते हैं सीओ सीओ दिलीप कुमार ने कहा अस्पताल के आसपास ज्यादातर रैयती भूमि है. अगर उसके बीच सरकारी भूमि है, तो उसे चिह्नित कर सोखता या सड़क किनारे की भूमि की मापी कराकर नाले का निर्माण कराया जायेगा. इस विषय पर पंचायत की मुखिया हमसे बात करें. उक्त संबंध में सीओ दिलीप कुमार ने कहा अस्पताल के आसपास ज्यादातर रैयती भूमि है. अगर उसके बीच सरकारी भूमि है, तो उसे चिह्नित कर सोखता या सड़क किनारे की भूमि की मापी कराकर नाले का निर्माण कराया जायेगा. इस विषय पर पंचायत की मुखिया हमसे बात करें.

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