शिक्षा विभाग की अजब व्यवस्था : स्कूल पहुंचे संगीत के साज व सिलाई मशीनें, पर सिखाने वाले नदारद

Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 12 Feb 2026 4:33 PM

विज्ञापन

शिक्षा विभाग का अजब कारनामा एक बार फिर सामने आया है. राज्य मुख्यालय में बैठे अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए जिले के सभी मिडिल स्कूलों में सिलाई मशीनों की सप्लाइ करा दी

विज्ञापन

महिला सशक्तीकरण व आत्मनिर्भरता के नाम पर करोड़ों के संसाधन धूल फांकने को मजबूर बिना प्रशिक्षक स्कूलों में वाद्य यंत्रों व मशीनों की सप्लाई, केवल कागजी खानापूर्ति में जुटा विभाग भभुआ नगर. शिक्षा विभाग का अजब कारनामा एक बार फिर सामने आया है. राज्य मुख्यालय में बैठे अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए जिले के सभी मिडिल स्कूलों में सिलाई मशीनों की सप्लाइ करा दी, लेकिन प्रशिक्षण देने के लिए शिक्षकों की तैनाती करना जरूरी नहीं समझा. महिला सशक्तीकरण व छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर यह कदम जरूर उठाया गया, पर जमीनी सच्चाई यह है कि अधिकांश विद्यालयों में ये मशीनें धूल फांक रही हैं. न कोई प्रशिक्षक, न कोई समय-सारणी व न कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम, सिर्फ दिखावे की व्यवस्था. सवाल उठता है कि जब सिखाने वाला ही नहीं है तो यह संसाधन किस काम के? यानी कागजों में छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जबकि धरातल पर केवल कागजी खानापूर्ति व सन्नाटा है. केवल सिलाई मशीन की ही बात नहीं है, स्थिति और भी विडंबनापूर्ण है क्योंकि प्रारंभिक व मध्य विद्यालयों में ढोलक, तबला, हारमोनियम, बांसुरी सहित संगीत के कई वाद्ययंत्र भेज दिये गये हैं, लेकिन संगीत शिक्षक की तैनाती आज तक नहीं की गयी है. कई शिक्षकों ने दबे जुबान स्वीकार किया कि विद्यालय में संगीत का एक भी प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है. ऐसे में इन वाद्ययंत्रों का उपयोग कैसे होगा? बच्चों को कौन सिखायेगा? विभाग ने सामान तो भेज दिया, लेकिन उसे चलाने की कोई व्यवस्था नहीं है. रखरखाव का बोझ, उपयोग शून्य विद्यालयों को इन मशीनों व वाद्ययंत्रों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंप दी गयी है. पहले से संसाधनों की कमी से जूझ रहे विद्यालय अब इन बेकार पड़े सामानों की सुरक्षा व देखभाल में उलझे हैं. कई जगह यह सामग्री विद्यालय के किसी कोने में बंद पड़ी है. आशंका जतायी जा रही है कि रखे-रखे ये उपकरण खराब हो जायेंगे या फिर वर्षों बाद गायब मिलेंगे. अतीत के अनुभव बताते हैं कि बिना निगरानी व उपयोग के ऐसी सामग्री धीरे-धीरे ‘कागजी उपलब्धि’ बनकर रह जाती है. वहीं, कई शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सरकार की मंशा यदि सच में छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाना व विद्यालयों में सांस्कृतिक माहौल तैयार करना है, तो सबसे पहले योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति आवश्यक है. केवल सामान भेज देने से न तो कौशल विकसित होगा व न ही गुणवत्ता शिक्षा का लक्ष्य पूरा होगा. शिक्षा विभाग को यह समझना होगा कि विकास की तस्वीरें भेजने से हकीकत नहीं बदलती. जरूरत है ठोस योजना, प्रशिक्षित मानव संसाधन व नियमित मॉनिटरिंग की. वरना यह पहल भी अन्य योजनाओं की तरह फाइलों व प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमट कर रह जायेगी और छात्राएं केवल इंतजार करती रह जायेंगी. सिलाई मशीन व वाद्ययंत्र विद्यालयों को उपलब्ध : डीपीओ सिलाई मशीन व संगीत सामग्री को लेकर उठे सवालों पर डीपीओ समग्र शिक्षा अभियान विकास कुमार डीएन ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा भेजी गयी सभी सिलाई मशीनें संबंधित विद्यालयों को उपलब्ध करा दी गयी हैं. उन्होंने बताया कि संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभाग से प्राप्त वाद्ययंत्र भी स्कूलों तक पहुंचा दिये गये हैं. आगे म्यूजिक डेस्क की स्थापना की योजना है, जिसके तहत प्राथमिक विद्यालयों में भी वाद्ययंत्र भेजे जा रहे हैं, ताकि बच्चों में संगीत प्रतिभा को प्रोत्साहन मिल सके.

विज्ञापन
VIKASH KUMAR

लेखक के बारे में

By VIKASH KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन