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लेटे धान की कटाई बना संकट, न हार्वेस्टर मिल रहा न मजदूर

Updated at : 13 Dec 2025 3:53 PM (IST)
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लेटे धान की कटाई बना संकट, न हार्वेस्टर मिल रहा न मजदूर

सरकारी खरीद ठप होने से किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर

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सरकारी खरीद ठप होने से किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर कर्मनाशा. दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र के किसान इस समय दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं. एक ओर जिन किसानों का धान तैयार हो चुका है, उनका धान क्रय केंद्रों पर सरकारी दर पर नहीं लिया जा रहा है. इसके कारण किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने को विवश हैं. वहीं, दूसरी ओर कई किसानों की धान की फसल खेतों में लेट गयी है, जिससे कटाई एक बड़ी समस्या बन गयी है. लेटे हुए धान की कटाई चैन लगे हार्वेस्टर से ही संभव है या फिर हाथ से मजदूरों द्वारा कटाई करानी पड़ती है. लेकिन किसानों को न तो चैन वाला हार्वेस्टर मिल पा रहा है और न ही मजदूर उपलब्ध हो रहे हैं. ऐसे में खेतों में खड़ी फसल किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. शनिवार को मौसम का रुख भी बेरुखा हो गया, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गयी है. किसानों द्वारा फसल पर लगायी गयी पूंजी अभी खेतों में ही फंसी हुई है. जो धान तैयार है, उसे क्रय केंद्रों पर नहीं लेने के कारण किसान बाजार में व्यापारियों के हाथों बेचने को मजबूर हैं. किसानों का कहना है कि धान बेचकर ही वे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, बेटियों की शादी-विवाह और घरेलू खर्च पूरे करते हैं. लेकिन वर्तमान हालात में उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है. बाजारों में धान का भाव मात्र 1800 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जबकि सरकारी दर से करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है. इसके साथ ही गेहूं की बुआई के लिए किसानों को तत्काल पैसे की जरूरत है. खाद, बीज और खेतों की जुताई में अच्छी-खासी लागत आती है. मजबूरी में किसान कम दाम पर धान बेच रहे हैं. मौसम के बिगड़ते मिजाज को देखते हुए किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और वे खुद को दोहरी मार के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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