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गोरिया के उफान से डूबी सैकड़ों एकड़ धान की फसल

Updated at : 19 Sep 2024 8:52 PM (IST)
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गोरिया के उफान से डूबी सैकड़ों एकड़ धान की फसल

दो दिनों से पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र में जमकर हुई बरसात के बाद गोरिया नदी के उफान से नुआंव प्रखंड के तीन गांव दुमदुमा, चंदेश व एवती के सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गयी है

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रामगढ़. दो दिनों से पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र में जमकर हुई बरसात के बाद गोरिया नदी के उफान से नुआंव प्रखंड के तीन गांव दुमदुमा, चंदेश व एवती के सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गयी है. जबकि, नुआंव के चार पंचायतों को रामगढ़ मुख्यालय से जोड़ने वाले सिसौडा-कोचस पथ के चंदेश छलके पर तीन फुट ऊपर तक नदी की तेज जलधारा चलने से दोपहिया व चार पहिया वाहनों का आवागमन प्रभावित है. पानी से डूबी धान की फसल को लेकर किसान चिंतित है. किसानों की यह चिंता कोई नयी नहीं है. हर वर्ष हल्की सी बरसात के बाद गोरिया के उफान से धान की फसलों का डूबना तय होता है. नदी की तेज जलधारा प्रवाहित होने व चंदेश छलके के ऊपर से पानी बहने के कारण नुआंव प्रखंड की चार पंचायत दुमदुमा, मुखराव, चंदेश व कोटा पंचायत के हजारों ग्रामीणों का संपर्क रामगढ़ से कट जाता है. किसानों के हर वर्ष धान की फसल को बचाने के लिए ना तो जनप्रतिनिधि संवेदनशील हैं, ना ही प्रशासनिक महकमे के हाकिम. ऐसे में प्रतिवर्ष बरसात के बाद नदी के उफान में धान की फसल का डूब जाती है. बेबस किसान नदी के तटीय खेतों में धान की फसल को जलमग्न होते देख इसे नियति का कहर समझ घर में बैठने को विवश हैं. वहीं, किसानों के खेतों में बर्बाद फसल के नुकसान का आकलन करें, तो यह प्रति वर्ष लाखों में होगा, चार पंचायत के लोगों का आवागमन हो जाता है बंद रामगढ़ व नुआंव प्रखंड के लोगों को जोड़ने वाली गोरिया नदी के उफान से मुख्य सड़क पर घुटने से लेकर कमर तक पानी का तेज बहाव चलने लगता है, जिससे नुआव प्रखंड की चार पंचायत चंदेश, दुमदुमा, मुखराव व कोटा पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों का रामगढ़ मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है. रामगढ़ पहुंचने के लिए ग्रामीणों को 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर करहगर नहर पथ के रास्ते एवती गांव होते नुआंव मुख्य पथ के रास्ते रामगढ़ जाना होता है. वहीं, वर्षों से इस पीड़ा को झेलने वाले ग्रामीण किसान अब तक आस लगाये बैठे कि कब छलके पर पुल का निर्माण हो और प्रतिवर्ष बाढ़ के पानी से डूबने वाली फसलों के नुकसान से बचा जा सके. इस पर शासन प्रशासन को भी ध्यान देने की आवश्यकता है. # क्या कहते हैं लोग –नदी के उफान से निजात दिलाने को लेकर किसानों व ग्रामीणों से हुई बात में लोगो ने अपने अलग-अलग विचार रखे. चंदेश पंचायत के मुखिया जय प्रकाश राय ने कहा प्रशासन द्वारा अगर गोरिया नदी की सफाई व उसकी खुदाई करा दी जाये, तो नदी के उफान से बचा जा सकता है. –दुमदुमा के किसान बबलू राय ने कहा नदी में उफान आने पर पानी को निकलने में सबसे ज्यादा बाधक सड़क है, चंदेश छलके के समीप अगर 500 मीटर लंबे पुल का निर्माण कर दिया जाये, तो नदी का पानी नीचे से प्रवाहित हो जायेगा, जिससे किसानों की फसल बच जायेगी –चंदेश के किसान टिंकू राय ने कहा सरकार पंचायत स्तर पर बाहा की सफाई, सिंचाई विभाग नहरों की सफाई के साथ समय समय पर खुदाई कर किसानों के खेतों को अधिक पानी देने का काम करती है, तो फिर नदियों की सफाई व खुदाई से जिला प्रशासन के लोगों को परहेज क्यों ? आज नदी की सफाई के साथ उसकी गहराई बढ़ा दी जाये, तो बरसात के बाद भी नदी में उफान नहीं आयेगी –एवती पंचायत के मुखिया सह किसान रणजीत सिंह ने बताया हर वर्ष पंचायत के 200 से 300 एकड़ धान की फसल पानी में डूब जाती है. हर वर्ष नदी के उफान से दर्जनों किसानों के कई एकड़ फसल बर्बाद होते है, नदी की गहराई व उसकी परिधि बढ़ा दी जाये, तो नदी के उफान से निजात मिल जायेगी.

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