गेहूं बुआई का सीजन शुरू होते ही बाजार से डीएपी गायब
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :19 Nov 2024 9:18 PM (IST)
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कैमूर न्यूज : खेत जोतकर गेहूं की बुआई के लिए डीएपी खाद खोज रहे किसान
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कैमूर न्यूज : खेत जोतकर गेहूं की बुआई के लिए डीएपी खाद खोज रहे किसान
भभुआ. गे
हूं बुआई का सीजन आरंभ होते ही बाजार से डीएपी खाद गायब होने लगी है. इसे लेकर किसानों की खेती पर गहरा संकट मंडराने लगा है. खेत जोतकर गेहूं की बुआई के लिए डीएपी खाद का मुंह ताक रहे हैं. गौरतलब है कि गेहूं की बुआई का पीक सीजन 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक माना जाता है. इस पीक सीजन में किसान धान काटने के बाद खेत को जोतकर गेहूं बोते हैं और गेहूं के बोने के समय ही किसानों को डीएपी खाद की जरूरत पड़ जाती है. लेकिन, वर्तमान में बाजार में किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रही है. किसी दुकान पर अगर डीएपी खाद उपलब्ध भी है, तो उस दुकानदार द्वारा किसानों से मनमाना दाम वसूला जा रहा है. इसे लेकर किसान जिले के कस्बाई बाजारों से लेकर मुख्य बाजारों तक चक्कर काट रहे हैं. यही नहीं, डीएपी को लेकर हालत इतनी खराब है कि कई जगहों पर नकली या घटिया किस्म की डीएपी खाद भी बेची जा रही है. इस संबंध में ठकुरहट गांव के किसान कामता शर्मा, निबी गांव के किसान बजरंगी पासवान, निसिझा के किसान अभय सिंह आदि ने बताया कि बाजार में डीएपी कहीं नहीं मिल रहा है. कुछ दुकानदार डीएपी खाद बेच भी रहे हैं, तो वह डीएपी खाद काम नहीं कर रही है. इन किसानों ने बताया कि चना, मसूर, तीसी आदि फसलों में देने के लिए उन लोगों ने बाजार से जो डीएपी खाद खरीदी थी, उसे डालने के बाद वह डीएपी फसल में अच्छा काम नहीं कर रहा है. बाजार में नकली डीएपी भी 200 रुपये से लेकर 300 रुपये अधिक दाम पर बेचा जा रहा है. साथ ही डीएपी खाद के नाम पर प्रति बोरा 1600 रुपये से लेकर 1700 रुपये दुकानदार मांग रहे हैं, जबकि सरकारी दर 1350 रुपये प्रति बैग है.कृषि विभाग ने सरकार से लगायी गुहार
जिले में डीएपी का संकट गहराने के बाद कृषि विभाग द्वारा डीएपी आपूर्ति कराने को लेकर सरकार को लिखा गया है. इस संबंध में जब जिला कृषि पदाधिकारी रेवती रमण से बात की गयी, तो उनका कहना था कि इस समय जिले में डीएपी खाद की मात्रा कम उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में मात्र 763 एमटी डीएपी खाद उपलब्ध है, जबकि नवंबर माह में 3506 एमटी डीएपी खाद की गेहूं की बुआई में आवश्यकता है. जल्द ही जिले को डीएपी आपूर्ति का रैक उपलब्ध कराने को लेकर सरकार को लिखा गया है. उम्मीद है कि अगले सप्ताह इफको डीएपी खाद का रैक जिले को मिल जायेगा. उन्होंने बताया कि खाद की कालाबाजारी को लेकर भी अनुमंडल स्तर पर टीम गठित है. खाद दुकानों पर छापामारी कर जांच की जा रही है. कुल 45 उर्वरक प्रतिष्ठानों से खाद के नमूने भी जांच को लेकर लिये गये हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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