भभुआ सदर : नप गये मोहनिया के थानाध्यक्ष, कुदरा के एसआइ उदयभानु को मिली कमान
Updated at : 05 Dec 2019 9:39 AM (IST)
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एसपी ने किया निलंबित, कर्तव्य में लापरवाही का है आरोप उपद्रव के दौरान लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कई दुकानों व बाइकों को फूंक दिया था भभुआ सदर : मोहनिया गैंगरेप मामले में अंततः मोहनिया थानेदार पर शीर्ष अधिकारियों की गाज गिर ही गयी. विधि व्यवस्था में लापरवाही बरतने और अधिकारियों को ससमय जानकारी […]
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एसपी ने किया निलंबित, कर्तव्य में लापरवाही का है आरोप
उपद्रव के दौरान लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कई दुकानों व बाइकों को फूंक दिया था
भभुआ सदर : मोहनिया गैंगरेप मामले में अंततः मोहनिया थानेदार पर शीर्ष अधिकारियों की गाज गिर ही गयी. विधि व्यवस्था में लापरवाही बरतने और अधिकारियों को ससमय जानकारी नहीं देने सहित गैंगरेप के आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार नहीं करने के आरोप में प्रभारी एसपी सुजीत कुमार ने मोहनिया थानाध्यक्ष सुरेश कुमार को निलंबित कर दिया है. उनकी जगह पर मोहनिया थाने के प्रभारी थानेदार के रूप में एसपी ने कुदरा थाने में नियुक्त एसआइ उदय भानु सिंह को प्रतिनियुक्त किया है.
गौरतलब है कि 23 नवंबर की रात मोहनिया में एक किशोरी के साथ उसे अगवा कर जबरन किये गये गैंगरेप का वीडियो वायरल हुआ था. यह मामला 24 नवंबर को तूल पकड़ लिया था. मोहनिया में लोगों का आक्रोश भड़काने में अफवाह की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका थी. जिसके बाद मोहनिया में लोग आक्रोशित होकर सड़क पर उतर कर घटना के विरोध में प्रदर्शन करते हुए उग्र लोग गैंग रेप के आरोपियों के मुहल्ले में पहुंच गये थे. जहां दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया.
देखते देखते स्थिति बिगड़ गयी और आक्रोशित लोगों द्वारा जहां आधा दर्जन बाइकों को फूंक दिया गया था. वहीं, गुमटी एवं झोपड़ीनुमा दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया. इसके अगले दिन भी आक्रोशित लोगों ने तोड़फोड़ मचाते हुए पत्थरबाजी कर दी, जिसके बाद एक पक्ष द्वारा भीड़ पर गोलीबारी और पेट्रोल बम से हमला कर दिया गया था. इसमें तीन लोग घायल हो गये थे. हालांकि, प्रशासन द्वारा गैंगरेप मामले के सभी चारों आरोपितों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया था. लेकिन, लोग इतने पर भी नहीं माने थे और मोहनिया में तोड़फोड़ मचाते हुए एक दूसरे से उलझ पड़े थे.
इस मामले में अगर मोहनिया थाने की पुलिस पदाधिकारी ससमय कार्रवाई करते या अपने शीर्ष अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी देते. तो मामला इतना आगे नहीं बढ़ता. इस मामले में मोहनिया थानेदार वीडियो वायरल करने और अंदर ही अंदर इसको लेकर पनप रहे आक्रोश को समझने में कामयाब नहीं हो सके. इधर, गैंगरेप के वीडियो वायरल होने पर थानेदार द्वारा तत्काल कोई संज्ञान नहीं लिया गया और ना ही तुरंत इस घटना के आरोपियों को गिरफ्तार करने में ही कोई दिलचस्पी ली गयी. जिसके चलते मोहनिया में विधि व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया था.
फ्लैश बैक : डीएम सहित शीर्ष अधिकारियों के आने के बाद स्थिति पर पाया गया था काबू
मोहनिया में आगजनी एवं तोड़फोड़ की खबर एसपी के छुट्टी पर रहने के स्थिति में डीएम डॉ नवल किशोर चौधरी तत्काल मोहनिया पहुंचे थे और स्वयं कमान को संभाल लिया था. इस दौरान डीएम ने सड़कों पर माइक के जरिये लोगों से शांति व्यवस्था बनाये रखने एवं दोषी के ऊपर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दे लोगों को शांत कराया था. हालांकि, मामला के शांत होने के कुछ देर बाद ही एसपी दिलनवाज अहमद एवं डीआइजी राकेश राठी भी मोहनिया पहुंच गये थे. जिसके चलते मामला आगे नहीं बढ़ सका.
भभुआ सदर : संचार क्रांति के इस युग में भी आमजन की सुविधा के लिए थानों में लगाये गये टेलीफोन की घंटी अब नहीं बज रही है. लेकिन, पुलिस महानिदेशक के आदेश पर कैमूर एसपी सुजीत कुमार ने जिले के सभी थानों को अपने यहां थाने में लैंडलाइन फोन को 24 घंटे के अंदर दुरुस्त करवा लेने और इसका प्रतिवेदन जल्द भेजने का फरमान जारी किया है. आदेश का पालन नहीं किये जाने पर विभागीय व अनुशासनिक कार्रवाई करने की कार्यवाही की जायेगी.
दरअसल अभी भी कैमूर जिले के अधिकतर थाने लैंड लाइन फोन विहीन है. जहां है भी तो वहां बेसिक फोन को कार्य में नहीं लाया जा रहा है. जिसके चलते आमजन थानेदारों के दिये मोबाइल नंबर पर ही अबतक जानकारी देते आ रहे है. इसको देखते हुए कैमूर एसपी ने जिले के सभी थानों के थानेदारों को निर्देश जारी किया है कि सभी थाने में जहां लैंड लाइन लगा हुआ है उसे दुरुस्त करना सुनिश्चित करेंगे और जहां अबतक लैंड लाइन की सुविधा नहीं है वहां तत्काल दूरभाष अधिकारी से संपर्क कर लैंड लाइन फोन को क्रियाशील करेंगे.
उन्होंने पत्र के माध्यम से सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि लैंडलाइन फोन लगाने के दिये गये पूर्व के निर्देश का किसी भी थानाध्यक्ष ने अनुपालन नहीं किया है. इसलिए अगले 24 घंटे के अंदर लैंड लाइन फोन को क्रियाशील करते हुए इसकी सूचना देना सुनिश्चित करेंगे. अगर 24 घंटे के अंदर लैंड लाइन फोन किसी भी थाने में सक्रिय नहीं होता है. तो वैसे पुलिस अधिकारी पर विभागीय व अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी.
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