एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं करने का आरोप, ब्लैकलिस्टिंग का अल्टीमेटम
Updated at : 24 Apr 2019 8:27 AM (IST)
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भभुआ कार्यालय : स्वास्थ्य विभाग में अजीबोगरीब खेल चल रहा है. एक तरफ आउटसोर्सिंग के तहत भोजन, साफ-सफाई, सुरक्षा गार्ड व जेनेरेटर चलानेवाली एजेंसियों को एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्हें काली सूची में डालने का अल्टीमेटम दिया गया है. साथ ही सभी अस्पतालों के उपाधीक्षक एवं पीएचसी प्रभारी को […]
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भभुआ कार्यालय : स्वास्थ्य विभाग में अजीबोगरीब खेल चल रहा है. एक तरफ आउटसोर्सिंग के तहत भोजन, साफ-सफाई, सुरक्षा गार्ड व जेनेरेटर चलानेवाली एजेंसियों को एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्हें काली सूची में डालने का अल्टीमेटम दिया गया है.
साथ ही सभी अस्पतालों के उपाधीक्षक एवं पीएचसी प्रभारी को आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं करने को लेकर उनको भुगतान होनेवाली राशि में कटौती करने का भी निर्देश दिया गया है.
दूसरी तरफ आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा पुराने दर पर जेनेरेटर संचालन सहित अन्य कामों को करने को लेकर हाथ खड़े कर दिये गये हैं. लगभग 20 दिन पहले डीएम के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें डीएम द्वारा पहली बार आउटसोर्सिंग एजेंसी के मालिक भी उपस्थित हुए थे.
डीएम ने उस बैठक में आउटसोर्सिंग एजेंसी एनजीओ चलानेवालों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि भोजन, साफ सफाई, सुरक्षा गार्ड, जेनेरेटर को लेकर जो एग्रीमेंट हुए हैं. उसके अनुसार आउटसोर्सिंग एजेंसी काम करें अन्यथा उनके ऊपर कार्रवाई की जायेगी.
लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के सिविल सर्जन एवं डीपीएम ने यह पाया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां उस मीटिंग के बाद भी एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं कर रही है. इसके बाद सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार तिवारी एवं डीपीएम धनंजय शर्मा ने 20 अप्रैल को सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को पत्र जारी किया. इसमें स्पष्ट तौर पर कहा है कि साफ-सफाई की स्थिति काफी दयनीय है.
एकरारनामे के मुताबिक तीन बार साफ सफाई नहीं की जा रही है. उसी तरह गुणवत्ता व मेनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है, जबकि जेनेरेटर का परिचालन भी ससमय नहीं किया जा रहा.
कपड़ा धुलाई वाशिंग मशीन की जगह हाथ से हो रहा है. सुरक्षा गार्ड के मामले में कहा गया है कि सुरक्षा प्रहरी का नाम, संख्या व प्रत्येक पाली में कार्यरत कर्मियों की सूची भी उपलब्ध नहीं करायी गयी है. यहीं नहीं एनजीओ द्वारा नियुक्त कर्मियों का इपीएफ और ना ही श्रम विभाग के निर्देशों का पालन हो रहा है.
ऐसे में उक्त सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को एग्रीमेंट के मुताबिक काम नहीं करने को लेकर काली सूची में डालने का अल्टीमेटम दिया गया है. साथ ही उक्त पत्र में सभी पीएचसी प्रभारी एवं अधीक्षक को निर्देशित है कि एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं करनेवाले एजेंसी के राशि में कटौती कर भुगतान करें.
इधर, पूरे मामले में रोचक बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग आउटसोर्सिंग एजेंसियों को एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं करने पर काली सूची में डालने एवं भुगतान के राशि में कटौती करने का आदेश जारी कर रही है, तो दूसरी तरफ आउट सोर्सिंग एजेंसियां चार से पांच साल पुराने दरों पर काम करने में हाथ खड़ा करते नजर आ रही हैं.
सदर अस्पताल में जेनेरेटर चलानेवाली एजेंसी ने पुराने दर के अनुसार काम करने पर बड़े पैमाने पर नुकसान की बात कहते हुए जेनेरेटर के संचालन से हाथ खड़ा करते हुए विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करने का आग्रह किया है.
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