तंबाकू नियंत्रण अभियान को लेकर नहीं की जा रही कार्रवाई, सिर्फ बने हैं नियम

Published at :06 Jul 2018 5:40 AM (IST)
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तंबाकू नियंत्रण अभियान को लेकर नहीं की जा रही कार्रवाई, सिर्फ बने हैं नियम

2012 से ही राज्य सरकार ने कोटपा अधिनियम को कड़ाई से लागू करने का दिया है आदेश शहर में चौक-चौराहों पर हर रोज बढ़ रही हैं गुटखा-खैनी की दुकानें भभुआ नगर : धूम्रपान स्वास्थ्य के हानिकारक है, यह हम आप सभी लोग जानते हैं. सार्वजनिक स्थल पर भी धूम्रपान नहीं करने का बोर्ड लगा रहता […]

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2012 से ही राज्य सरकार ने कोटपा अधिनियम को कड़ाई से लागू करने का दिया है आदेश
शहर में चौक-चौराहों पर हर रोज बढ़ रही हैं गुटखा-खैनी की दुकानें
भभुआ नगर : धूम्रपान स्वास्थ्य के हानिकारक है, यह हम आप सभी लोग जानते हैं. सार्वजनिक स्थल पर भी धूम्रपान नहीं करने का बोर्ड लगा रहता है
वह यह जुमला है जो हर कहीं सार्वजनिक स्थल पर लिखा मिल जायेगा अथवा अधिकारियों व डॉक्टरों की जुबान से सुनने को मिलेगा. लेकिन, हकीकत इसके बिल्कुल विपरित है. रोक के बावजूद लोग शहर के सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने से बाज नहीं आ रहे हैं. सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम कोटपा की धारा 4 के तहत सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने की मनाही है.
ऐसा करते हुए पकड़े जानेवाले पर भारतीय तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 2003 की धारा 4 के तहत 200 रुपये जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन, इस अधिनियम का जिले में कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा है. विभिन्न चौक चौराहों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लोग सिगरेट के धुएं के साथ कोटपा अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं. पुलिस प्रशासन के सुस्त पड़ने से यह अभियान पूरी तरह ठप पड़ चुका है. इसके चलते शहर में अब भी सुप्रीम कोर्ट के कोटपा अधिनियम 2004 के आदेश और बिहार सरकार द्वारा दो अप्रैल 2012 से दिये गये निर्देश की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं.
शहर नहीं हो सका स्मोक फ्री
वैसे तो वर्ष 2012 में ही राज्य सरकार ने शहरों में कोटपा अधिनियम लागू करने का आदेश जिले के शीर्ष अधिकारियों को दिया था. मगर, अब तक इस दिशा में कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट पीने से लोगों के सेहत पर खराब असर पड़ता है. यह सभी जानते हैं, पर न तो पुलिस कार्रवाई करती है और ना ही लोग खास कर युवा ही खुलेआम सिगरेट का धुआं उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं.
नियम है सख्त, पर नहीं होती कार्रवाई
कोटपा अधिनियम 2004 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला व प्रखंडस्तरीय छापेमारी दस्ते का भी गठन किया गया. कोटपा 2013 की धारा 6 A के तहत सभी तंबाकू उत्पाद बेचनेवाले दुकानों पर 18 वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति को तंबाकू उत्पादों की बिक्री करना दंडनीय अपराध है.
इसके अलावे तंबाकू जानलेवा है, इसका फ्लैक्स भी लगवाना अनिवार्य है. बावजूद इसके न तो दुकानों पर फ्लैक्स दिखते हैं और न ही सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करनेवालों पर कोई कार्रवाई की जा रही है.
कागजों व बैठकों तक ही कमेटी सीमित
कोटपा को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग बिहार सरकार की अधिसूचना संख्या 336(12) दो अप्रैल 2012 के आलोक में डीएम की अध्यक्षता में जिला तंबाकू नियंत्रण समन्वय समिति डीटीसीसीसी का गठन भी किया गया.
इस कमेटी में एसपी व डीडीसी को उपाध्यक्ष, सिविल सर्जन को सदस्य सचिव, जिला नोडल पदाधिकारी तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कैमूर को सदस्य सह समन्वयक बनाया गया. इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारियों व एनजीओ को भी इस कमेटी का सदस्य बनाया गया. लेकिन, इसके बावजूद यह अधिनियम जिले में सिर्फ कागजों और बैठकों तक ही सीमित है.
हालांकि, इस अधिनियम के लागू होने के बाद जिले में कमेटी तो बना दी गयी और कुछ दिनों तक तंबाकू उत्पाद बेचनेवालों पर कार्रवाई भी की गयी. लेकिन, स्थिति एक बार फिर पहले जैसी हो गयी और शहर में धड़ल्ले से इसकी बिक्री अब भी जारी है.
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