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सदर अस्पताल में आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं है अल्ट्रासाउंड की सुविधा

Updated at : 05 Sep 2024 11:04 PM (IST)
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सदर अस्पताल में आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं है अल्ट्रासाउंड की सुविधा

सदर अस्पताल में केवल गर्भवती महिलाओं के लिए ही अल्ट्रासाउंड कराने की सुविधा उपलब्ध है. आम मरीजों का अल्ट्रासाउंड यहां नहीं होता है, जिसके कारण यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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जहानाबाद.

सदर अस्पताल में केवल गर्भवती महिलाओं के लिए ही अल्ट्रासाउंड कराने की सुविधा उपलब्ध है. आम मरीजों का अल्ट्रासाउंड यहां नहीं होता है, जिसके कारण यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन भी है और उसे ऑपरेट करने वाले ऑपरेटर भी हैं किंतु यह सुविधा केवल गर्भवती महिलाओं को ही उपलब्ध कराई जाती है. आम मरीजों को यह सुविधा नहीं मिलती है. यहां तक की गर्भवती महिलाओं को छोड़कर अन्य महिलाओं को भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. जबकि महिलाओं में बच्चेदानी में सिस्ट और इन्फेक्शन की समस्या आम है. 30 वर्ष के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है. इसका पता अल्ट्रासाउंड से ही लगाया जा सकता है बच्चेदानी की सिस्ट और यूट्रस में इन्फेक्शन बहुत ही खतरनाक बीमारी है. अगर समय पर इसकी पहचान ना हो और इलाज नहीं कराया जाए तो यह बच्चेदानी के कैंसर में तब्दील हो जाता है जिससे महिला की जान भी जा सकती है. इसके बावजूद महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है.

अस्पताल में आते हैं कई तरह के गंभीर मरीज :

सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वालों में बहुत सारे ऐसे मरीज होते हैं जो गंभीर रोग से ग्रसित होते हैं और उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की सख्त आवश्यकता होती है. इनमें किडनी और गाल ब्लैडर में स्टोन वाले मरीज, गैस्टिक, फैटी लीवर और पेट की समस्या से जूझ रहे मरीज अपेंडिसाइटिस और किडनी रोग से ग्रसित मरीज शामिल है. इन सभी रोगों की पहचान अल्ट्रासाउंड के बाद ही की जा सकती है.

गरीब मरीज नहीं करा पाते बाजार से अल्ट्रासाउंड :

सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को छोड़कर अन्य मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सक ऐसे रोगियों को जिन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की सख्त आवश्यकता है, बाजार से अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं. प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड कराने पर एक हजार रुपये से अधिक का खर्च आता है. ऐसे में साधन संपन्न मरीज तो बाजार से महंगे अल्ट्रासाउंड करा कर अपना इलाज करा लेते हैं, लेकिन गरीब मरीज चाह कर भी बाजार से अल्ट्रासाउंड नहीं करा पाते हैं. वे यूं ही दवा खा-खा कर अपनी बीमारी बढ़ाने को विवश होते हैं.

अस्पताल में है एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन :

सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की एक ही मशीन है. इसे ऑपरेट करने के लिए टेक्नीशियन की भी भारी कमी है. अस्पताल प्रबंधन द्वारा किस प्रकार एक टेक्नीशियन का जुगाड़ कर किसी प्रकार उसे चलाया जा रहा है.

सोनोलॉजिस्ट का पद खाली :

सदर अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट चिकित्सक का पद खाली है. इस पद पर एक चिकित्सक की बहाली भी हुई थी, किंतु उन्होंने बहाली के बाद सदर अस्पताल में ज्वाइन ही नहीं किया, जिसके बाद से आज तक कोई दूसरे सोनोलॉजिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सक अस्पताल में नहीं आये हैं, जिसके कारण अल्ट्रासाउंड की मशीन को ऑपरेट करने में तो भारी परेशानी होती ही है. अल्ट्रासाउंड होने के बाद उस पर विशेषज्ञ चिकित्सक की राय भी नहीं मिल पाती है. आम एमबीबीएस महिला चिकित्सक ही अल्ट्रासाउंड देखकर उस पर अपनी राय बनाते हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

सदर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक नहीं है. महिला चिकित्सक से अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है. उन्हें केवल गायनेकोलॉजी लोअर एब्डोमन के अल्ट्रासाउंड का ही प्रशिक्षण मिला है जिसके कारण सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल पाती है. रेडियोलॉजिस्ट के आने के बाद सभी लोगों के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध होगी.

डॉ प्रमोद कुमार, प्रभारी अधीक्षक, जहानाबाद

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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