अरवल में श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गजेंद्र मोक्ष और वामन अवतार प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु

Author Anjani kumar|Edited by Nikhil Anurag
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कोयल भूपत में श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कथा पीठ से प्रवचन करते स्वामी रामायण आचार्य वेदांती जी महाराज

कलेर प्रखंड के कोयल भूपत गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. कथावाचक स्वामी श्रीरामायणाचार्य वेदांती जी महाराज ने प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया. यह आयोजन जीवन को सही मार्ग दिखाने वाला साबित हो रहा है.

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Arwal News: कलेर प्रखंड के कोयल भूपत गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. कथा के दौरान कथावाचक स्वामी श्रीरामायणाचार्य वेदांती जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का सरल और प्रेरणादायक वर्णन किया. कथा सुनने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.

गजेंद्र मोक्ष प्रसंग से दिया आस्था का संदेश

कथावाचक ने गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए बताया कि जब गजराज मगरमच्छ के चंगुल में फंसकर असहाय हो गया, तब उसने भगवान विष्णु का स्मरण किया. भक्त की सच्ची पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर गजेंद्र की रक्षा की और दोनों को मोक्ष प्रदान किया. उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में सच्ची श्रद्धा और ईश्वर पर अटूट विश्वास ही मनुष्य का सबसे बड़ा सहारा होता है.

वामन अवतार की कथा का किया वर्णन

कथा के दौरान भगवान विष्णु के वामन अवतार और दानवीर राजा बलि के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया. कथावाचक ने बताया कि राजा बलि के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया. तीन पग भूमि मांगकर भगवान ने अपने विराट स्वरूप से संपूर्ण सृष्टि को नाप लिया. तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया. उनके समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनने का वरदान दिया.

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्तिमय हुआ माहौल

भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीला का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल भक्ति के रंग में रंग गया. आधी रात को शंखनाद, भजन-कीर्तन और "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा. श्रद्धालुओं ने झूमकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया. माखन-मिश्री का भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया.

कथा से मिलता है जीवन को सही मार्ग

श्रद्धालुओं ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक शिक्षा है. कथा से लोगों में भक्ति, ज्ञान, दया, करुणा और नैतिक मूल्यों का विकास होता है तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक सोच का संदेश मिलता है.

आयोजकों ने श्रद्धालुओं से की शामिल होने की अपील

आयोजक मंडली के शिव विनोद शर्मा, अविनाश कुमार और पूर्व मुखिया अजय कुमार ने बताया कि कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, जो लोगों की गहरी आस्था और धार्मिक विश्वास का प्रमाण है. उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की.

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