अधिक गर्मी की वजह से सब्जी के फसल पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
Updated at : 25 Apr 2024 10:09 PM (IST)
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जिले में तेज पछुआ हवा का असर आदमी, पशु-पक्षी से लेकर पेड़ पौधे तक पड़ रहा है.
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जहानाबाद.
जिले में तेज पछुआ हवा का असर आदमी, पशु-पक्षी से लेकर पेड़ पौधे तक पड़ रहा है. आसमान से बरसते आग से खेतीबाड़ी पर गहरा असर पड़ रहा है. खासकर तेज पछूआ हवा के कारण गरमा सब्जी फसल पर विशेष असर देखने को मिल रहा है. गर्म तेज पछुआ हवा एवं लू के थपेड़े से किसान परेशान है. गरमा सब्जी नेनुआ, कद्दू, भिंडी, भांटा, करेला, बोदी, बैगन जैसे फसल को बचाने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है. परेशानी का आलम यह है कि चिलचिलाती धूप के वजह से हर तीसरे चौथे दिन लतर विरवाई को सूखने से बचने के लिए किसानों को सिंचाई करना पड़ रहा है. किसान वीरेंद्र महतो बताते हैं कि भांटा को छोड़ सभी सब्जी की फसल के बेहतर विकास एवं उत्पादन के लिए पूर्व हवा अनुकूल होता है. पूर्वा हवा में मौसम शुष्क रहने से सब्जी के पौधे के साथ-साथ फल-फूल भी अधिक लगते हैं. जिससे किसानों को बेहतर फायदा होता है, वही मौसम में कड़वाहट कम रहने से सिंचाई भी ज्यादा दिनों पर करना पड़ता है. किसान सुरेश शर्मा बताते हैं कि समय से पहले पड़ रहे अधिक गर्मी के कारण खेतों में पीछे लगे गरमा सब्जी का फसल अधिक गर्मी से ज्यादा प्रभावित हो रहा है. तपिश के वजह से नेनुआ, कद्दू, करेला जैसे पौधे दोपहर में चिलचिलाती धूप से मुरझा जाते हैं. सुबह में तो पौधे में ताजगी दिखती है, लेकिन जब तक धूप का असर रहता है तब तक पौधे का रंगत उड़ा रहता है. किसान नीतीश कुमार बताते हैं कि रबी फसल गेहूं के दउनी की के लिए पछुआ हवा ठीक है लेकिन सब्जी की फसल के लिए विपरीत है, ऐसे में सब्जी के फसल के उत्पादन पर भी गहरा असर देखने को मिल रहा है. सब्जी के उत्पादन कम होने से बाजार में कीमत में उछाल आया है, ऐसे में मौसम की पड़ रहे मार से आम लोगों को अधिक कीमत चुकता कर बाजार से सब्जी खरीदनी पड़ रही है. किसान सौरभ कुमार बताते हैं दिन के 10 बजे के बाद से ही लोगों को तेज पछुआ हवा परेशान करने लगती है, ऐसे में कृषि कार्य करना मुश्किल प्रतीत होता है. तेज धूप में रहने पर बदन झुलसने लगता है. कड़ाके की धूप में कार्य करना मुमकिन नहीं दिखता लेकिन किसानी पेशे से जुड़े लोगों को अधिक गर्मी हो या जाडा, किसी मौसम में आराम नहीं मिलता. मजबूरन सुबह- शाम धूप की तपिश कम होने पर लोग अपना काम निकाल रहे हैं. संजीव कुमार बताते हैं कि मौसम के बनते बिगड़ते हालात से किसानों को जूझना नियति बन गयी है. इस वर्ष बे मौसम बारिश व आंधी पानी ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है. वैशाख माह में ही लोगों को जेठ के दोपहरी का एहसास हो रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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