अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे

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परेशानी. सदर अस्पताल में नहीं है सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था चिकित्सक अक्सर बन रहे बाहरी लोगों के कोपभाजन का शिकार कभी साफ-सफाई तो कभी दवा की कमी के नाम पर होता है हंगामा जहानाबाद,नगर : 24 फरवरी 2016 को सदर अस्पताल उपाधीक्षक द्वारा पत्र लिख कर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सुरक्षा गार्ड […]

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परेशानी. सदर अस्पताल में नहीं है सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था

चिकित्सक अक्सर बन रहे बाहरी लोगों के कोपभाजन का शिकार
कभी साफ-सफाई तो कभी दवा की कमी के नाम पर होता है हंगामा
जहानाबाद,नगर : 24 फरवरी 2016 को सदर अस्पताल उपाधीक्षक द्वारा पत्र लिख कर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध आरक्षी अधीक्षक से किया गया था. पत्र में यह उल्लेख किया गया था कि अकसर आपातकालीन सेवा में बाहरी व्यक्तियों द्वारा हंगामा किया जाता है, जिससे अस्पताल प्रशासन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस पत्र के आलोक में पुलिस प्रशासन द्वारा अस्पताल परिसर में पुलिस पिकेट स्थापित करने को लेकर जांच-पड़ताल भी करायी गयी थी.
तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अशफाक अंसारी तथा अनुमंडल पदाधिकारी डाॅ नवल किशोर चौधरी द्वारा अस्पताल परिसर की जांच-पड़ताल कर पुलिस पिकेट की स्थापना को लेकर जगह भी चिन्हित किया गया था. लेकिन अबतक पिकेट की स्थापना नहीं होने से चिकित्सक अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. साथ ही उन्हें अकसर बाहरी लोगों के कोपभाजन का शिकार भी बनना पड़ रहा है.
कई बार अस्पताल में हो चुका है तोड़-फोड़: अस्पताल में पुलिस जवानों की तैनाती नहीं रहने के कारण कई बार तोड़-फोड़ की घटना हो चुकी है. और हर बार चिकित्सक को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है.
जब भी किसी मरीज की मौत होती है या किसी घटना में घायल मरीज अस्पताल में इलाज कराने को पहुंचता है तो उसके आड़ में बाहरी लोग हंगामा करने लगते हैं तथा तोड़-फोड़ के साथ ही चिकित्सकों को अपना शिकार बनाते हैं. ऐसे में कई बार चिकित्सकों द्वारा पेनड्राप स्ट्राइक भी किया गया लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हैं.
पुलिस पिकेट स्थापित करने को लेकर जांच-पड़ताल
कभी साफ-सफाई तो कभी दवा की कमी के नाम पर झेल रहे जलालत
सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सकों को कई बार बाहरी लोगों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा है. कभी इमरजेंसी में साफ-सफाई का अभाव तो कभी दवाओं की किल्लत के कारण भी उन्हें मरीज तथा उनके परिजनों की खरी-खोटी सुननी पड़ती है. दो दिन पूर्व ही अपने ड्यूटी पर तैनात एक चिकित्सक को सिर्फ इसलिए लोगों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा क्योंकि इमरजेंसी में लगे बेड पर खून के धब्बे लगे थे. मरीज के परिजनों का कहना था कि जब आप ड्यूटी पर हैं तो यह आपकी जिम्मेवारी है कि मुकम्मल तरीके से साफ-सफाई करायें. इस बात को लेकर चिकित्सक के साथ मारपीट तक की नौबत भी आ गया था. हालांकि बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ. वहीं कई बार मरीज तथा उनके परिजन दवा नहीं मिलने पर चिकित्सक से उलझ बैठते हैं.
उनका कहना होता है कि अस्पताल में दवा ही नहीं है तो इलाज कैसे होगा. आप अगर दवा लिख रहे हैं तो जिम्मेवारी आपकी है कि दवा उपलब्ध करायें.
चिकित्सक के साथ होगा घटना तभी खुलेगी प्रशासन की नींद
सदर अस्पताल में जब किसी चिकित्सक के साथ बड़ी घटना होगी तभी प्रशासन की नींद खुलेगी तथा पुलिस पिकेट की स्थापना होगा. अभी तो चिकित्सक को सिर्फ जलालत ही झेलना पड़ रही है. अस्पताल में हर तरह के मरीज आते हैं उनके परिजन इतने उतावले होते हैं कि वे बिना जाने समझे चिकित्सक के साथ उलझ बैठते हैं. ऐसे में जरूरी है कि अस्पताल में पुलिस पिकेट स्थापित हो ताकि चिकित्सकों को सुरक्षा मिल सके.
डाॅ रणविजय प्रसाद, प्रभारी अस्पताल उपाधीक्षक
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