अखंड सौभाग्य के लिए की वट वृक्ष की पूजा

Updated at : 04 Jun 2019 2:23 AM (IST)
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अखंड सौभाग्य के लिए की वट वृक्ष की पूजा

जहानाबाद : अखंड सौभाग्यवती बने रहने के लिए महिलाओं ने श्रद्धा के साथ सोमवारी अमावस्या पर वट वृक्ष की पूजा की. पूजा-पाठ को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में उत्साह दिखा. सुबह से ही घरों में पूजा-पाठ की तैयारी चल रही थी. शहर के ठाकुरबाड़ी, कृष्णपुरी, स्टेशन एरिया, गांधी मैदान, मलहचक, शांति […]

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जहानाबाद : अखंड सौभाग्यवती बने रहने के लिए महिलाओं ने श्रद्धा के साथ सोमवारी अमावस्या पर वट वृक्ष की पूजा की. पूजा-पाठ को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में उत्साह दिखा. सुबह से ही घरों में पूजा-पाठ की तैयारी चल रही थी. शहर के ठाकुरबाड़ी, कृष्णपुरी, स्टेशन एरिया, गांधी मैदान, मलहचक, शांति नगर, निजामउद्दीपुर, कोर्ट एरिया समेत कई जगहों पर महिलाएं टोली बनाकर पूजा को लेकर घर से वट वृक्ष के नीचे पहुंची थी.

खासकर नई-नवेली दुल्हन में उमंग व उत्साह काफी दिख रहा था. सोमवार की सुबह से सोलहों शृंगार के साथ सज-धज कर पूजा-पाठ करने पहुंची थी. हाथ में थाल लिये पूजन सामग्री रोड़ी, अछत, चंदन, सूता, कसैली, फल-फूल से सुसज्जित महिलाओं की टोली की शोभा देखते ही बन रही थी. महिलाएं पुरोहितों से कथा सुन वट वृक्ष में कच्चा सूता से 108 बार फेरी दे पति की लंबी उम्र की कामना किया. कहा जाता है कि वट वृक्ष की उम्र काफी लंबी होती है. दीर्घायु होने के कारण वट वृक्ष को भगवान को साक्षी मान ब्रह्मा की पूजा करते हैं.
साथ ही सावित्री और सत्यवान नामक राजा की कथा सुनते हैं. कथा सुन महिलाओं पुरोहितों को दान स्वरूप रूपया-पैसा, फल एवं अन्न के साथ कपड़ा भी दिया एवं घर लौट पति को पंखा झल आशीर्वाद प्राप्त किया. इधर ग्रामीण क्षेत्र के रतनी, मखदुमपुर, काको, मोदनगंज, हुलासगंज, घोसी, अमैन सहित अन्य क्षेत्रों में भी वट सावित्री की पूजा करने को लेकर महिलाओं का तांता लगा रहा.
सावित्री-सत्यवान की है कथा
पंडित डॉ सत्येंद्र पांडेय के अनुसार इस पूजा में सावित्री व सत्यवान नामक राजा की कथा है, जिसमें सावित्री की शादी सत्यवान नामक राजा से हुई थी, लेकिन उनकी आयु कम रहने की वजह से एक वर्ष में ही उनकी मृत्यु हो गयी. उन्होंने बताया कि पति की मृत्यु के बाद सावित्री की हठधर्मिता की वजह से पति को जीवनदान मिला.
पति की मौत के बाद जब यमदूत उनके पति को यमलोक में ले जा रहे थे तो सावित्री भी यमदूत के पीछे-पीछे जाने लगी. यमदूत इस पर सावित्री से प्रश्न किया कि यमलोक में मृत आत्मा को ले जाने की जिम्मेदारी हमें रहती है, लेकिन आप पीछे-पीछे क्यों जा रहे हैं.
यमदूत के मना करने पर भी जब सावित्री ने साथ नहीं छोड़ा तो विवश होकर यमराज ने वर मांगने को कहा. इस पर सावित्री ने वरदान में अपने सास-ससुर की आंख की रोशनी, उनसे छीनी हुई राजपाट व सौ पुत्र की प्राप्ति होने का वर मांगा. यमराज ने सावित्री को वरदान दिया, फिर भी जब यमराज ने उनके पति को ले जाना शुरू किया तो सावित्री ने पुत्र प्राप्ति को लेकर यमराज द्वारा दिये वर के अनुसार पति को जिंदा कर लौटाना पड़ा.
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