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थाईलैंड से 122 सैलानी पैदल पहुंचे वाणावर, मना रहे पिकनिक

Updated at : 21 Jan 2019 6:59 AM (IST)
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थाईलैंड से 122 सैलानी पैदल पहुंचे वाणावर, मना रहे पिकनिक

मखदुमपुर : जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक छटाओं परिपूर्ण प्रखंड क्षेत्र के वाणावर की वादियां विदेशी सैलानियों से गुलजार दिख रहा है. रविवार की दोपहर थाईलैंड से 122 की संख्या में विदेशी सैलानियों का आगमन वादियों में हुआ. भारत और नेपाल भ्रमण पर पद यात्रा पर निकले. थाईलैंड सैलानियों बनारस से होते हुए बोधगया पहुंचे और […]

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मखदुमपुर : जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक छटाओं परिपूर्ण प्रखंड क्षेत्र के वाणावर की वादियां विदेशी सैलानियों से गुलजार दिख रहा है. रविवार की दोपहर थाईलैंड से 122 की संख्या में विदेशी सैलानियों का आगमन वादियों में हुआ. भारत और नेपाल भ्रमण पर पद यात्रा पर निकले.
थाईलैंड सैलानियों बनारस से होते हुए बोधगया पहुंचे और बोधगया ठोंगेश्वरी से पैदल मार्च करते हुए वाणावर पहुंचे. वाणावर में रहने के संसाधन के अभाव के कारण विदेशी सैलानी पहाड़ी स्थित खुले जगह ओर यात्री शेड में तंबू डालकर विश्राम कर रहे थे. विदेशी सैलानी वादियों में खाना बनाकर खाया और पिकनिक मनाते नजर आये व वादियों में जमकर मौज मस्ती किया.
सैलानियों को भारत व नेपाल भ्रमण पर लाये टीम लीडर खेमरा पावट ने बताया कि थाईलैंड के बुद्धा प्लेस से ये सैलानी भारत भ्रमण पर निकले हैं.
जो 26 हजार किलोमीटर के पैदल यात्रा करते हुए वाणावर पहुंचे हैं. यहां सभी पर्यटक रात्रि विश्राम इन वादियों में तंबू गाड़कर करेंगे. उन्होंने संसाधन के अभाव को बताते हुए कहा कि इस इलाके में रात्रि विश्राम की अच्छी व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण उन्हें परेशानी उठाना पड़ रहा है.
ये सभी सैलानी सोमवार को यहां से राजगीर के लिए पैदल ही रवाना होंगे. पहले दिन पर्यटक पहाड़ स्थित गुफा का अवलोकन किया. कर्ण चोपड़ गुफा ,सुदामा गुफा, लोमश ऋषि गुफा को देखकर अचंभित रह गये. गुफा देख रहे सैलानी वरण जॉन ने बताया कि यह गुफाएं काफी आकर्षक है. इस तरह की गुफाएं भारत में कहीं नहीं है. सैलानियों को वाणावर के बारे में जानकारी दे रहे बिहार टूरिज्म के गाइड राकेश प्रसाद ने बताया कि थाईलैंड से पर्यटक हर साल इन वादियों में कई राज्यो से पदयात्रा करते हुए आते हैं. यहां रात में रुक कर विश्राम करते हैं.
गुफाओं में की साधना, अशोका विहार में पूजा
थाईलैंड से वाणावर पहुंचे सैलानियों ने गुफाओं में साधना किया. गुफा के अंदर मोमबत्ती जलाया और भगवान बुद्ध के श्लोकों का पाठ भी किया. वहीं पर्यटकों ने पाताल गंगा स्थित अशोका बोध विहार में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समीप घंटों मंत्र जाप करते रहे. महंथ भंते आर्य कृति ने बताया कि पर्यटकों ने भगवान बुद्ध की पूजा-अर्चना किया.
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