बीमारियों की वजह बन रहे खुले नाले
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Nov 2017 7:28 AM
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मच्छरों के प्रकोप से परेशान हैं वार्डों के लोग गंदगी और बदबू से जीना हो रहा मुहाल जहानाबाद : पहले नगरपालिका और फिर नगर पर्षद के गठन हुए 55 साल हो गये, लेकिन शहर के मुहल्लों में रहने वाले लोग एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं और वह समस्या है अलगना और देवरिया नाले […]
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मच्छरों के प्रकोप से परेशान हैं वार्डों के लोग
गंदगी और बदबू से जीना हो रहा मुहाल
जहानाबाद : पहले नगरपालिका और फिर नगर पर्षद के गठन हुए 55 साल हो गये, लेकिन शहर के मुहल्लों में रहने वाले लोग एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं और वह समस्या है अलगना और देवरिया नाले का खुला रहना. एक तो इनकी समुचित उड़ाही नहीं और दूसरा नालों के खुले रहने से उसमें गिरकर जान जाने का भय. साथ ही खुले नाले से गंदगी और बदबू फैलने के कारण मुहल्लावासियों का जीना मुश्किल हो रहा है. पूरे शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ा हुआ है. तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं. बैक्टिरियल और वायरल बीमारियों से ग्रसित होकर लोग सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. शहर की इतनी बड़ी समस्या रहने के बावजूद इसके समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहा है.
शहर की सफाई व्यवस्था मुक्कमल रखने के लिए वर्ष 1911 में अधिसूचित क्षेत्र समिति का गठन हुआ था. कालांतर में 1962 में नगरपालिका बना और फिर 2007 में उसे नगर पर्षद का दर्जा दिया गया. नगरपालिका गठन से अब तक 55 वर्षों के बाद भी शहरवासियों के सामने गंदगी और इससे जनित बीमारियों की समस्या का समाधान निकालने का कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ.
50 फीसदी वार्डों से गुजरा है अलगना और देवरिया नाला:नगर पर्षद क्षेत्र में वार्डों की संख्या 33 है. इसमें से 14 वार्डों के कई मुहल्लों का गंदा पानी अलगना नाला से गुजरकर दरधा नदी में गिरता है, जबकि वार्ड नंबर 29 और 30 के कुछ भाग की गंदगी देवरिया नाले से होते हुए जमुने नदी में गिरती है. उक्त दोनों नालों की हालत खराब है. कई जगहों पर नाला जर्जर हालत में है. आधे से अधिक भाग का पक्कीकरण भी नहीं कराया गया है.
गंभीर बात यह है कि मलहचक मोड़ से पूरब नदी तक अलगना नाला पूरी तरह खुला हुआ है. मोड़ से पश्चिम भी कई स्थानों पर नाले की ढलाई नहीं की गयी है. उड़ाही नहीं होने से नाला कीचड़ से जाम है, जो बीमारी फैलने का कारण है. देवरिया नाला का अस्तित्व लगभग मिटता जा रहा है. यह नाला पूरी तरह ओपेन है, जिसमें गिरकर किसी भी व्यक्ति की जान जाने की आशंका बनी रहती है.
अस्पतालों में रोज औसतन पहुंच रहे 500 मरीज :खुले नाले और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है. मलेरिया, कै-दस्त, जांडिस, टायफायड एवं अन्य वायरल बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं.
सदर अस्पताल और निजी क्लिनिकों में वायरल बीमारियों से ग्रसित करीब 500 लोग रोज इलाज कराने पहुंच रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक सदर अस्पताल में ही प्रतिदिन 600 से अधिक मरीज निबंधित होते हैं, जिसमें 400 मरीजों की संख्या ऐसी होती है, जो बैक्टेरियल और वायरल बीमारियों से ग्रसित होते हैं. इसके अलावा प्राइवेट डॉक्टरों के क्लिनिक में भी मरीजों की भीड़ लगी रहती है.
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