सौ वर्षाें से निभायी जा रही रामानुष्ठान यज्ञ की परंपरा

Updated at : 03 Apr 2026 9:30 PM (IST)
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सौ वर्षाें से निभायी जा रही रामानुष्ठान यज्ञ की परंपरा

धर्म, अध्यात्म और भगवान श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा की अनोखी मिसाल कुंधुर पंचायत के गेनाडीह गांव में देखने को मिल रही है.

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कुमार सौरभ,

गिद्धौर

धर्म, अध्यात्म और भगवान श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा की अनोखी मिसाल कुंधुर पंचायत के गेनाडीह गांव में देखने को मिल रही है. यहां स्थापित राम दरबार में पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से रामनवमी के अवसर पर 18 दिवसीय रामानुष्ठान यज्ञ का आयोजन किया जाता है, जो आज भी पूरी श्रद्धा, शुद्धता और नियम निष्ठा के साथ जारी है. नागी-नकटी नदी के तलछटी क्षेत्र में बसे इस गांव में रामनवमी की रात्रि से पंचकलश स्थापना के साथ अनुष्ठान की शुरुआत होती है. गंगा जल से भरे कलश को स्थापित कर यज्ञकुंड में हवन, ध्वजारोहण और रामधुन के साथ ग्रामीण भगवान राम की भक्ति में लीन हो जाते हैं. यह अनुष्ठान पूरे 18 दिनों तक चलता है, जिसमें गांव के सभी लोग तन-मन-धन से सहयोग करते हैं.अनुष्ठान के 16वें दिन 24 घंटे का रामधुन सह अष्टयाम, 17वें दिन राम विवाह और 18वें दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है. इस दौरान गांव के बच्चे राम, लक्ष्मण और सीता के चरित्र का मंचन कर आदर्श जीवन जीने का संदेश देते हैं. पूजा के अंतिम दिन कलश का विसर्जन ढोल-नगाड़ों के साथ नागी-नकटी नदी की कटहरा धारा में किया जाता है.

महामारी के बाद शुरू हुई परंपरा

ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले गांव में फैली एक भीषण महामारी के दौरान लोगों ने राम दरबार में प्रार्थना की थी. इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी. तभी से गांव के बुजुर्गों ने हर वर्ष इस अनुष्ठान को आयोजित करने का संकल्प लिया, जो आज भी निरंतर जारी है.

झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर

शुरुआत में यह पूजा एक झोपड़ीनुमा मंदिर में होती थी, लेकिन समय के साथ ग्रामीणों के सहयोग से यहां भव्य राम दरबार मंदिर का निर्माण हुआ. वर्तमान में विद्वान पंडितों के निर्देशन में विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. वर्ष 2017 से यह आयोजन और भी व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है.

नियम-निष्ठा का सख्ती से होता है पालन

पूजा के दौरान पूरे गांव में मांस, मछली, लहसुन और प्याज का सेवन पूर्णतः वर्जित रहता है. यहां तक कि जो ग्रामीण बाहर रहते हैं, वे भी इस नियम का पालन करते हैं. यह अनुशासन और आस्था गेनाडीह गांव को एक अलग पहचान देता है. पूजा समिति के अध्यक्ष शिवेंदु कुमार, सचिव सत्रुघ्न कुमार सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है. गेनाडीह का यह राम दरबार आज जिले भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां हर वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

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