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एकता का प्रतीक बना गुगुलडीह का काली पूजा महोत्सव

Updated at : 21 Oct 2025 9:42 PM (IST)
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एकता का प्रतीक बना गुगुलडीह का काली पूजा महोत्सव

प्रखंड स्थित गुगुलडीह गांव में भक्ति, परंपरा और एकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

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बरहट. प्रखंड स्थित गुगुलडीह गांव में भक्ति, परंपरा और एकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है. यहां करीब 300 वर्षों से चली आ रही जमींदारी परंपरा के तहत मां काली की पूजा वैदिक विधि-विधान से संपन्न की जाती है. गांव के पूर्वजों द्वारा आरंभ की गई यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है. विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चारण के बीच मां काली की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है. यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक एकता और सद्भाव का प्रतीक बन चुकी है. गांव के सरपंच नरेश साह ने बताया कि इस आयोजन में हर वर्ग और समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करते हैं. पूजा के उपरांत सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. समाजसेवी कारू मांझी ने कहा कि यह आयोजन गांव की पहचान और गौरव का प्रतीक है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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