12 घंटे की पढ़ाई व सेल्फ स्टडी पर फोकस, टॉपर पुष्पांजलि फॉलो करती थी ऐसा रूटीन

Updated at : 29 Mar 2026 9:04 PM (IST)
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12 घंटे की पढ़ाई व सेल्फ स्टडी पर फोकस, टॉपर पुष्पांजलि फॉलो करती थी ऐसा रूटीन

लंबा इंतजार के बाद एक बार फिर से टॉपर्स की फैक्ट्री कहे जाने वाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय ने अपना जलवा दिखाया है.

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– वैज्ञानिक बनकर नये खोज करने की है इच्छा, सुपर 50 में करेंगी पढ़ाई जमुई. लंबा इंतजार के बाद एक बार फिर से टॉपर्स की फैक्ट्री कहे जाने वाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय ने अपना जलवा दिखाया है. यहां की छात्रा पुष्पांजलि कुमारी ने पूरे बिहार में पहला स्थान हासिल किया है, पुष्पांजलि को 492 अंक मिले. पुष्पांजलि मूल रूप से बांका जिले के रजौन प्रखंड क्षेत्र के गोपालपुर गांव की रहने वाली है. पुष्पांजलि ने बताया कि उन्होंने मैट्रिक परीक्षा के लिए अपनी तैयारी केवल खुद के दम पर की थी, इसमें विद्यालय के शिक्षकों का भी योगदान रहा है. पुष्पांजलि ने बताया कि प्रतिदिन 24 घंटे में से मैं 12 घंटे पढ़ाई किया करती थी, जिसमें स्कूल का समय भी शामिल था. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सफल होने के लिए 18 या 20 घंटे पढ़ाई करने की जरूरत पड़ती है. अगर सही तरीके से पढ़ाई की जाये तो 12 से 14 घंटे की पढ़ाई भी काफी होती है. उन्होंने बताया कि वह इन्हीं 12 घंटे में तैयारी किया करती थी, और इसमें वह सेल्फ स्टडी पर फोकस करती थी. पुष्पांजलि बताती है कि उनका एडमिशन सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हुआ था, जहां उन्हें स्कूल के कैंपस में रहना पड़ता था. स्कूल के शिक्षक जो पढ़ाते थे उसी के सहारे उन्होंने अपनी पूरी तैयारी की है. वहां ना तो किसी कोचिंग की सुविधा थी, और ना ही किसी ट्यूशन की. स्कूल से आने के बाद खुद ही वह अपने सिलेबस का रिवीजन किया करती थी. उन्होंने बताया कि स्कूल में मोबाइल फोन ले जाने पर पाबंदी है, ऐसे में ना तो इंटरनेट और ना ही सोशल मीडिया की जरूरत उन्हें अपनी तैयारी के दौरान पड़ी. बताते चलें कि पुष्पांजलि के पिता लालमोहन शर्मा पेशे से एक शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां एक गृहिणी है. पुष्पांजलि ने बताया कि वह आगे चलकर एक वैज्ञानिक बनना चाहती है, और नई खोज करना चाहती हैं. रिवीजन करना सबसे बेहतर उपाय पुष्पांजलि ने बताया कि कई छात्र जो परीक्षा की तैयारी करते हैं, वह यह गलती करते हैं कि अच्छे से अपने सिलेबस का रिवीजन नहीं करते हैं. वह प्रश्नों को याद करने में यकीन रखते हैं. उन्होंने बताया कि मैं जिन भी प्रश्न को याद करती थी, उसे लिखकर उसका रिवीजन करती थी. लगातार लिखने से वह प्रश्न इतने अच्छे तरीके से याद हो गये की परीक्षा के दौरान या उससे पहले भी जब मुझे उन प्रश्नों का हल करना होता था तो वह मैं बिना देखे आसानी से कर दिया करती थी. उसने बताया कि छात्र अपने सिलेबस की तैयारी तो करते हैं, लेकिन वह यह सोचते हैं कि परीक्षा से 3 महीने पहले या चार महीने पहले वह अपनी तैयारी में तेजी लाएंगे तथा वह अपने पाठ्य का रिवीजन करेंगे, पर मैंने ऐसा नहीं किया था. मैंने अपने मैट्रिक के परीक्षा की तैयारी तब से शुरू कर दी थी जब मैं नवमी कक्षा में थी. मैं उसी वक्त से कुछ-कुछ विषयों की तैयारी किया करती थी. फिर जब मैं दसवीं कक्षा में गयी तब से मैं लगातार अपनी तैयारी कर रही हूं, और पूरे साल मैंने इसकी तैयारी की है. पुष्पांजलि ने यह भी बताया कि उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा आइआइटी, जेईई और नीट की परीक्षा के तैयारी के लिए चलाई जाने वाले सुपर 50 कंपटीशन एग्जाम की परीक्षा भी दी थी, जिसमें उसे पूरे बिहार में चौथा स्थान मिला है. वह सुपर 50 में एडमिशन करायेगी और इंटरमीडिएट में फिजिक्स, केमिस्ट्री तथा मैथ विषय लेकर आगे की पढ़ाई पूरी करेंगी. पुष्पांजलि ने बताया कि वह अपने माता-पिता के चार बच्चों में सबसे छोटी है, परिवार में उसके अलावा और दो बहने तथा एक भाई है. पुष्पांजलि की सफलता के बाद पूरे परिवार में खुशियों का माहौल है.

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PANKAJ KUMAR SINGH

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