गरही थाने में बना चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर, भरोसे का माहौल देने की पहल

आमतौर पर थाना का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर और घबराहट का भाव आ जाता है, लेकिन पुलिस इस सोच को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
जमुई. आमतौर पर थाना का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर और घबराहट का भाव आ जाता है, लेकिन पुलिस इस सोच को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. जिले के गरही थाना परिसर में विशेष रूप से चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर तैयार किया गया है, ताकि किसी भी कारण से थाने आने वाले खासकर बच्चों को भय या असहजता का सामना न करना पड़े और उन्हें एक सुरक्षित तथा सहज वातावरण मिल सके. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई बार किसी घटना, विवाद या पारिवारिक मामले में बच्चों को भी थाना आना पड़ता है. ऐसे समय में पारंपरिक पुलिस माहौल बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए इस विशेष कॉर्नर को विकसित किया गया है, जहां बच्चे खुद को सुरक्षित और सहज महसूस कर सकें.
रखा गया है बच्चों की जरूरत का ध्यान
चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर को बच्चों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कमरे की दीवारों पर रंग-बिरंगी चित्रकारी की गयी है, जिससे माहौल खुशनुमा दिखे. बच्चों के खेलने के लिए खिलौने रखे गये हैं और बैठने के लिए आरामदायक व्यवस्था की गयी है. यहां ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जिससे बच्चा यह महसूस करे कि वह किसी सुरक्षित स्थान पर मौजूद है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में पूछताछ या बातचीत के दौरान भी संवेदनशीलता बरतना जरूरी होता है. इसलिए ऐसे स्थान पर उनसे बातचीत करने से वे खुलकर अपनी बात रख पाते हैं और मानसिक दबाव भी कम महसूस करते हैं.बच्चों को लेकर साफ हैं नियम
पुलिस विभाग के अनुसार, कानून और नियम भी बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा करते हैं. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और बाल संरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देशों के तहत बच्चों के साथ पुलिस को बेहद सावधानी और संवेदनशीलता से पेश आने की सलाह दी जाती है. बच्चों को डराने, धमकाने या कठोर पूछताछ करने की मनाही होती है. आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग के माध्यम से उनकी बात सुनी जाती है. इसी सोच को मजबूत करने के लिए चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है. पुलिस का मानना है कि यह पहल जनपुलिसिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है. जब बच्चे और उनके परिवार पुलिस को एक सहयोगी संस्था के रूप में देखेंगे तो समाज और पुलिस के बीच विश्वास और मजबूत होगा. स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की है. उनका कहना है कि इससे बच्चों के मन में पुलिस के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी और लोग बिना किसी डर के अपनी समस्याएं लेकर थाना पहुंच सकेंगे. जमुई पुलिस की यह पहल समाज में संवेदनशील और भरोसेमंद पुलिसिंग की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बन रही है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




