गंडक नदी में लापता हुए चारों किशोरों का नहीं मिला सुराग, परिजनों की टूट रही आस
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Aug 2024 10:08 PM
बैकुंठपुर थाने के मटियारी गांव में सोमवार की सुबह श्राद्ध कर्म के दशकर्म के बाद स्नान के लिए गंडक (नारायणी) नदी के तट पर गये एक ही परिवार के चार किशोरों के डूबकर लापता होने के बाद माहौल गमगीन हो गया है.
बैकुंठपुर. बैकुंठपुर थाने के मटियारी गांव में सोमवार की सुबह श्राद्ध कर्म के दशकर्म के बाद स्नान के लिए गंडक (नारायणी) नदी के तट पर गये एक ही परिवार के चार किशोरों के डूबकर लापता होने के बाद माहौल गमगीन हो गया है. लापता किशोरों के परिजनों में चीख-पुकार मच गयी है. सुबह आठ बजे हुए हादसे के बाद स्थानीय गोताखोरों की मदद से लापता किशोरों की तलाश गंडक नदी की उफनती धारा के बीच की जा रही थी. इस बीच एनडीआरएफ की टीम भी मुजफ्फरपुर से पहुंच गयी. एनडीआरएफ की दो बोट गंडक नदी में ताबड़तोड़ सर्च अभियान देर शाम तक चलाती रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका. जादाेपुर मटियारी गांव के एक ही परिवार के शिक्षक नवलेश कुमार के 16 वर्षीय पुत्र निखिल कुमार, सतन राय के 16 वर्षीय पुत्र सुजीत कुमार, सुजीत का छोटा भाई 14 वर्षीय सुमित कुमार व भगवान राय का 14 वर्षीय पुत्र संजीव कुमार अपनी दादी फुलमति देवी के दसकर्म मुंडन में शामिल होने के बाद स्नान करने के लिए गंडक नदी में गये थे. परिजनों के मुताबिक 16 वर्षीय निखिल कुमार संतुलन खोने के कारण गहरे पानी में डूबने लगा. निखिल को बचाने के दौरान के लिए सुजीत कुमार, सुमित कुमार व संजीव कुमार आगे बढ़े और तीनों किशोर निखिल को बचाने में नाकामयाब रहे. गंडक नदी की तेज धार में एक साथ चारों किशोर बह गये. हृदय विदारक इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद थी कि चारों किशोरों को सकुशल बरामद कर लिया जायेगा, लेकिन शाम तक किसी के बरामद होने की सूचना नहीं है. लापता किशोरों का सुराग नहीं मिलने से परिजनों की उम्मीद टूटती नजर आ रही है. अचानक हुई घटना से पूरा गांव गमगीन हो गया है. लापता किशोरों के परिजनों की विलाप से लोगों के कलेजा दो टूक हो रहा है. पॉलिटेक्निक का छात्र था निखिल : बैकुंठपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय महम्मदपुर में कार्यरत शिक्षक नवलेश कुमार का 16 वर्षीय पुत्र निखिल कुमार इन दिनों पॉलिटेक्निक का छात्र था. उसके मेधावी होने से परिवार में बड़ी उम्मीद थी. मगर नियति को यह कबूल नहीं होना बेटे के साथ घटित इस घटना से हृदय विदीर्ण शिक्षक नवलेश कुमार दहाड़ मारकर रो रहे थे. बड़ा बेटा ही अभी तक के जीवन की मेरी कमाई था. अब वह नहीं रहा तो मैं जी कर क्या करूंगा. मैं भी उसी के साथ अपना जान दे दूंगा. गांव के लोग व रिश्तेदार इस घटना से आहत खुद आंसू बहा रहे थे एवं निखिल के पिता नवलेश कुमार को संभालने में जुटे थे.
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