Gopalganj News : मां सिंहासनी की मनोहारी छवि देख निहाल हुए भक्त, लगते रहे जयकारे

Updated at : 30 Mar 2025 10:42 PM (IST)
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Gopalganj News  : मां सिंहासनी की मनोहारी छवि देख निहाल हुए भक्त, लगते रहे जयकारे

Gopalganj News : चैत्र नवरात्र के पहले दिन रविवार को बिहार के प्रमुख शक्तिपीठ थावे में मंगला आरती शृंगार के बाद मां सिंहासनी का दरबार आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया. भक्त मां की मनोहरी छवि को अपलक निहार अभिभूत हो उठे.

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थावे. चैत्र नवरात्र के पहले दिन रविवार को बिहार के प्रमुख शक्तिपीठ थावे में मंगला आरती शृंगार के बाद मां सिंहासनी का दरबार आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया. भक्त मां की मनोहरी छवि को अपलक निहार अभिभूत हो उठे. वे दर्शन कर निहाल हो गये. माला-फूल, नारियल-चुनरी और प्रसाद लिये सिंहासनी मंदिर में पहुंचने के बाद श्रद्धाभाव से भक्तों ने शीश झुकाया. यूपी,

नेपाल से भी पहुंचे थे श्रद्धालु

जयकारों से पूरा मंदिर गूंज रहा था. भक्तों की कतार सुबह मंगला आरती के समय से ही लग गयी थी. 10 बजे रात तक मां का द्वार भक्तों के लिए खुला रहा. नेपाल, यूपी, बिहार के विभिन्न हिस्सों से आये भक्तों ने दर्शन किये. धूप भी भक्तों की आस्था को नहीं डिगा पायी. कतार में लगे भक्तों का कदम गर्भगृह की ओर बढ़ता जा रहा था. ट्रेनों के पहुंचते ही भक्तों की भीड़ बढ़ी. भक्तों की टोलियां पहुंचती रहीं. थावे पहुंचे भक्तों ने सर्वप्रथम गलियों में सजी प्रसाद की दुकानों से माला फूल प्रसाद लेकर जय माता दी के जयकारा के साथ सिंहासनी मां के दर्शन-पूजन किये. मां के शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन किया. उनको नारियल, चुनरी चढ़ा कर अपनी कामना रखी. यूपी के गोरखपुर से जज ने भी परिवार के साथ मां के दर्शन के लिए कतार में लगकर पूजा की. वहीं मां के दरबार में दर्शन के लिए कतार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था. मंदिर के मुख्य पुजारी पं संजय पांडेय ने बताया कि मां के दर्शन मात्र से ही रोग, शोक, कष्ट का नाश होता है. सुख, समृद्धि, शांति, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.

थावे में शुरू हुआ अनुष्ठान, पाठ व साधना

मां सिंहासनी के दरबार में शतचंडी, सप्तशती व विभिन्न अनुष्ठानों की शुरूआत संकल्प के साथ शुरू हो गया. सैकड़ों की संख्या में आचार्य, पुजारियों के द्वारा वेद मंत्रोच्चारण से पूरा माहौल बदला हुआ है. दूर-दूर से आये साधकों ने भी अपना अनुष्ठान शुरू कर दिया है. तंत्र साधना से लेकर वैदिक साधना तक की जा रही है. एडीजे मानवेंद्र मिश्र मां के दरबार में विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं. हजारों भक्तों की पूजा- अनुष्ठान से पूरा माहौल बदला हुआ है.

प्रशासन के अधिकारियों ने भीड़ को संभाला

थावे में मां सिंहासनी के दर्शन के लिए रात के दो बजे से ही भक्तों की कतार लगी रही. मंदिर का पट खुला तो प्रशासन के अधिकारियों ने भीड़ को संभाला. सुरक्षित दंडाधिकारी के रूप में बीडीओ अजय प्रकाश राय और थानाध्यक्ष हरेराम कुमार, थावे सिंहासनी मंदिर प्रवेश द्वार पर, सीओ कुमारी रूपम शर्मा, पूर्णमणी प्रजापति श्रम परिवर्तन पदाधिकारी थावे, आलोक रंजन, एसआइ मनोज कुमार सिंह और आरती कुमारी, मंदिर निकास द्वार पर बीपीआरओ पुष्पकर पुष्पेश, कुसुम कुमारी गुप्ता और रणधीर कुमार सिन्हा तकनीकी सहायक मनरेगा थावे, एसआइ जितेन्द्र कुमार, एएसआइ नीरज कुमार पांडेय, एसआइ शशि सपना, मंदिर परिसर में बीसीओ पुष्प राज कुमार और सीडीपीओ रेखा कुमारी, एसआइ शैलेंद्र कुमार पप्पूव पंकज कुमार, मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं के लाइन लगाने में बीडब्लूओ चंचल कुमार, एसआइ प्रशांत कुमार व मुकेश कुमार सिंह ,रहषु मंदिर पर एमओ बद्रीविशाल और एसआइ रंजन कुमार और कृष्ण कुमार मंदिर में जाने वाले लोहा बैरियर पर सहायक तकनीकी प्रबंधक आत्मा विपिन कुमार राम,और एसआइ मुन्ना कुमार,और माला कुमारी, मंदिर गोलंबर पर कृषि समन्वयक रतिकांत श्रीवास्तव, एसआइ रणजीत कुमार और चंद्रप्रकाश तिवारी कमान संभाले हुए रहे.

भक्त रहषु के दर्शन कर मेले का उठाया लुत्फ

गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, पूर्वी चंपारण, प चंपारण, सीवान, छपरा से आये पर्यटकों ने मां के दर्शन करने के बाद भक्त रहषु के भी दर्शन किये. हजारों की तादाद में भक्तों ने जंगल में घूमकर आनंद उठाया. इसके साथ ही सरोवर का भी लुत्फ उठाया. खासकर महिलाओं ने मेले में घूमकर जमकर खरीदारी की.

दोनों प्रहर की आरती के वक्त बंद होगा कपाट

नवरात्र के दौरान मां सिंहासनी मंदिर का कपाट आठ दिनों के लिए सुबह चार से रात 10 बजे तक खुला रहता है. माता के दोनों प्रहर की आरती के बाबत मात्र एक-एक घंटे के लिए कपाट बंद किया जाता है. आरती के पश्चात पुनः मंदिर का कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया जाता है.

आज चढ़ाएं अड़हुल या कमल का फूल

थावे मंदिर के प्रशासनिक पुजारी पं हरेंद्र पांडेय ने बताया कि दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. ब्रह्मचारिणी का अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी. मां का ब्रह्मचारिणी रूप बेहद शांत, सौम्य और मोहक है. मान्यता है कि मां के इस रूप को पूजने से व्यक्ति को सदाचार जैसे गुणों की प्राप्ति होती है. माता ब्रह्मचारिणी को अनुशासन और दया की देवी भी कहा जाता है. अड़हुल और कमल का फूल बेहद पसंद है और इसलिए इनकी पूजा के दौरान इन्हीं फूलों को देवी मां के चरणों में अर्पित करें. चीनी, शहद, दही, घी और गाय के दूध से बने पंचामृत चढ़ाये. जीवन में स्थिरता आयेगी.

देवी ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र

घरों व मंदिरों कलश स्थापना के साथ नवरात्र शुरू

गोपालगंज.

शक्ति की आराधना के पर्व चैत्र नवरात्र की रंगत पहले ही दिन घरों मंदिरों में छा गयी. शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के मंदिर रच-रच कर सजाये गये और सुबह से ही घरों और मंदिरों में वैदिक मंत्र गूंजने लगे. या देवी सर्वभूतेषु… से माहौल भक्तिमय हो गया. शक्ति के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा शुरू हो गयी. मंदिरों समेत देवी दुर्गा के मंदिरों में आस्थावानों की कतार लगी और श्रद्धा की फुहार बरसने लगी. बाजार में भी पूजन सामग्री की खरीद के साथ ही फूल-माला, फल-मिष्ठान की भी जमकर खरीदारी की गयी. कलश स्थापना और ध्वजारोपण के साथ ही मां की आराधना शुरू हो गयी. मंदिरों को तोरणद्वार और विद्युत झालरों से दुल्हन की तरह सजाया गया. शहर से लेकर गांव तक शक्ति की आराधना में लोग तल्लीन हो चुके हैं. कलश स्थापना के साथ ही घरों से लेकर मंदिरों तक सप्तशती के मंत्र गुंजायमान हो रहे हैं.

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