Gopalganj News : कोर्ट ने पटना के निजी अस्पताल से 20 तक तलब किया सीसीटीवी फुटेज और पर्चे का प्रमाण पत्र

Gopalganj News : छात्र अटल पांडेय हत्याकांड में एडीजे-10 मानवेंद्र मिश्र के कोर्ट में एक आरोपित की ओर से सेंट्रल अस्पताल पटना द्वारा 14 मार्च को निर्गत पर्चा दाखिल किया गया, जिसे प्रथम दृष्टया कूटरचित मानते हुए ट्रायल को प्रभावित करने की बात मानी गयी है.
गोपालगंज. छात्र अटल पांडेय हत्याकांड में एडीजे-10 मानवेंद्र मिश्र के कोर्ट में एक आरोपित की ओर से सेंट्रल अस्पताल पटना द्वारा 14 मार्च को निर्गत पर्चा दाखिल किया गया, जिसे प्रथम दृष्टया कूटरचित मानते हुए ट्रायल को प्रभावित करने की बात मानी गयी है.
पर्चे को देख कोर्ट ने लिया संज्ञान
गलत मेडिकल पर्चे को देखते हुए कोर्ट एक्शन में आ गया. कोर्ट ने सेंट्रल अस्पताल पटना के प्रबंधक को आदेश दिया कि अभियुक्त श्रीराम भगत ने उनके अस्पताल में 14 मार्च को अपना इलाज करवाया था या नहीं. यदि हां, तो उस संबंध में अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करें तथा कोर्ट को 20 मार्च तक उपलब्ध कराएं. यदि उनके अस्पताल द्वारा यह मेडिकल पर्चा निर्गत नहीं किया गया है, तो इस संबंध में एक प्रमाण पत्र कोर्ट को संबोधित करते हुए प्रेषित करें ताकि कोर्ट में विधि-सम्मत कार्यवाही हो सके. अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने दावा किया कि 14 मार्च को दाखिल इलाज का पर्चा मिथ्या है. उस दिन होली थी तथा अभियुक्त उनके गांव में होली खेल रहा था. उस दिन वह कभी पटना नहीं गया था. अभियुक्त के मोबाइल लोकेशन से भी यह स्पष्ट हो जायेगा. उनके पास अन्य ठोस साक्ष्य हैं, जो यह साबित करेंगे कि अभियुक्त ने 14 मार्च को कहीं कोई इलाज नहीं करवाया है.
क्यों उठा पर्चा की सत्यता पर सवाल
कोर्ट में पेश किये गये इलाज के पर्चा पर किसी चिकित्सक का नाम अंकित नहीं था. अस्पताल का कोई रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज नहीं था. किस विभाग में दिखाया गया है यह भी अंकित नहीं था. मेडिकल पुर्जा पर दो रंग (ब्लू प्रथम पृष्ठ एवं काला पीछे वाले पृष्ठ पर) की कलम का प्रयोग किया गया था. बीमारी के नाम पर केवल “बैक पेन ” अंकित था, जिससे पर्चा पर सवाल उठे हैं.
हाइकोर्ट के आदेश को भी किया जा रहा प्रभावित
अभियुक्तों का बयान दं.प्र.सं. की धारा 313 के तहत दर्ज करने के लिए निर्धारित है. पिछली तिथि को दोनों अभियुक्तों को उपस्थित रहने का निर्देश कोर्ट ने दिया था. वाद लगभग पांच वर्ष पुराना है तथा उच्च न्यायालय पटना द्वारा शीघ्र विचारण करने का दिशा-निर्देश प्राप्त है. कोर्ट ने आशंका जतायी कि दोनों अभियुक्त जान-बूझकर मामले को लंबित करना चाहते हैं. दोनों अभियुक्तों को न्यायहित में एक अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया जाता है कि वे आगामी तिथि को सदेह उपस्थित रहें, अन्यथा बंधपत्र रद्द कर दिया जायेगा. अगली सुनवाई 20 मार्च को निर्धारित की गयी है.
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