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Gopalganj News : मनीष तिवारी अमर रहे से गूंजता रहा भोरे, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

Updated at : 18 Dec 2024 10:14 PM (IST)
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Gopalganj News  : मनीष तिवारी अमर रहे से गूंजता रहा भोरे, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

Gopalganj News : रजौरी में दुश्मनों की गोली से शहीद हुए मनीष कुमार तिवारी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचने के साथ ही हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ नारेबाजी कर उनको श्रद्धांजलि देने लगी.

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भोरे. राजौरी में दुश्मनों की गोली से शहीद हुए मनीष कुमार तिवारी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचने के साथ ही हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ नारेबाजी कर उनको श्रद्धांजलि देने लगी. भोरे की फिजाओं को शहीद मनीष तिवारी अमर रहे की गूंज गूंजने लगी. हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी. मनीष तिवारी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव भोरे थाना क्षेत्र के तिवारी चफवा में किया गया. वहां उनकी वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए भारी संख्या में लोग शामिल हुए.

अंतिम विदाई के समय सभी की आंखें हुईं नम

देर रात को अंतिम यात्रा का दृश्य बहुत ही भावुक एवं शोकपूर्ण रहा. अंतिम यात्रा की शुरुआत उस समय हुई, जब मनीष का पार्थिव शरीर सैन्यकर्मियों के साथ उनके पैतृक गांव पहुंचा. इसे देखते ही जहां परिजनों की हृदयविदारक चीत्कार ने पूरा माहौल गमगीन कर दिया. हर कोई अपने नम आंखों से मनीष के साहस और सर्वोच्च बलिदान की सराहना करता रहा. सबसे कारुणिक और भावनात्मक पल वह रहा, जब शहीद मनीष की पत्नी श्रेया अपने बच्चों के साथ पार्थिव शरीर से लिपट कर रोने लगी. इस पल ने मौजूदा परिदृश्य में गम और गुस्से का ऐसा मातमी सन्नाटा पसराया कि सब स्तब्ध हो गये. करीब 8:30 बजे मनीष का पार्थिव शरीर पैतृक आवास से गांव के सीमांत पर स्थित शवदाह स्थल के लिए प्रस्थान किया. इसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल रहे. अंतिम यात्रा में सेना के जवान पार्थिव शरीर को ताबुत में लिए आगे चल रहे थे. वैसे तो मनीष तिवारी के बलिदान गांव और इलाके के लोगों के लिए गुमान का विषय था, लेकिन इस घटना ने गांव वालों को गहरा दुख पहुंचा था. नतीजा यह हुआ कि उनके प्रति सम्मान और प्यार में किसी ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. शहीद की यादें और उनका बलिदान हमेशा उनके गांव और इलाके वालों के दिलों में अमर रहेगा. उनके परिवार और स्थानीय लोगों के लिए यह कठिन समय जरूर था, लेकिन मनीष की शौर्य गाथा हमेशा नौजवानों को प्रेरणा देती रहेगी. मनीष के अंतिम संस्कार का एक भावुक पल वह भी था जब चिता पर उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देने के लिए उनके दोनों बच्चों वैभव और शौर्य को चिता के सम्मुख लाया गया. अंतिम यात्रा में सेना के जवान, अधिकारी स्थानीय अन्य लोग शामिल हुए.

———————————-सुबह से प्रशासन के अधिकारी रहे मुस्तैदमनीष कुमार तिवारी के पार्थिव शरीर के आने की सूचना पर इंतजाम को संभालने के लिए प्रशासन के अधिकारी भी मुस्तैद रहे. अंतिम संस्कार के समय हथुआ के एसडीओ अभिषेक कुमार चंदन, एसडीपीओ आनंद कुमार गुप्ता, भोरे के बीडीओ दिनेश कुमार सिंह, सीओ अनुभव राय, प्रभारी थानेदार मनीष कुमार, विजयीपुर के बीडीओ सीओ व थानेदार मौजूद रहे.

प्रशासन ने रात में ही कराया अंतिम संस्कारप्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार की तैयारियां रात में ही करा लेने का निर्णय किया गया था. देर रात तक 10 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया. इलाके के लोग पूरे दिन बगैर खाये- पीये जवान के सम्मान में उनके पैतृक गांव में डटे रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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