भूत-प्रेत का चक्कर नहीं, बीमारी है मिरगी

Published at :18 Nov 2016 3:57 AM (IST)
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भूत-प्रेत का चक्कर नहीं, बीमारी है मिरगी

विश्व मिरगी दिवस आज गोपालगंज : तेजी से बदलते इस दौर में भी ऐसे लोग बड़ी तादाद में हैं जो मिरगी को भूत-प्रेत का चक्कर मानते हैं. इसे पागलपन समझने वालों की संख्या भी कम नहीं है. विशेषज्ञों का साफ कहना है कि मिरगी मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र संबंधी एक विकार है. भूत-प्रेत या पागलपन […]

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विश्व मिरगी दिवस आज

गोपालगंज : तेजी से बदलते इस दौर में भी ऐसे लोग बड़ी तादाद में हैं जो मिरगी को भूत-प्रेत का चक्कर मानते हैं. इसे पागलपन समझने वालों की संख्या भी कम नहीं है. विशेषज्ञों का साफ कहना है कि मिरगी मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र संबंधी एक विकार है. भूत-प्रेत या पागलपन से जोड़ कर देखने से इसका असर मरीज के दिमाग पर भी पड़ता है और वह उदास व परेशान रहता है. बीमारी के बारे में बताने से कतराता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके अधिकतर इलाज से ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं. यहां इसके मरीजों की अधिक तादाद होने की वजह मेनेन्जाइटिस, इंसेफ्लाइटिस, न्यूरोसिस्टोसरकोरिस जैसी बीमारियां भी हैं.
ठीक हो सकती है बीमारी
डाॅ एके तिवारी के अनुसार सत्तर से 80 फीसदी लोगों में बीमारी दवाओं के जरिये पूरी तरह ठीक हो सकती है. दवाओं से ठीक न होने पर ज्यादातर का इलाज आॅपरेशन से हो सकता है. बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, पर इसकी वजह अलग-अलग हैं. दौरे कई तरह के होते हैं जिसमें मरीजों को अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. बड़ी मिरगी के दौरे में लगभग पूरा शरीर प्रभावित होता है. हाथ-पैर में निरंतर झटके आने, मुंह से झाग, आंखों की एकटकी, तेज सांस तथा अचानक मल या मूत्र हो जाना शामिल है. सीमित मिरगी में शरीर के कुछ हिस्से जैसे चेहरे, हाथ-पैर में अनियमित संकुचन या झनझनाहट महसूस होता है, पर मरीज होश में रहता है. सामान्यत: मिरगी के दौरे कुछ सेकेंड से लेकर दो से तीन मिनट में खत्म हो जाते हैं और मरीज होश में आ जाता है, जबकि एक खास प्रकार में मिरगी के दौरे पांच मिनट से अधिक होते हैं या दो दौरे के बीच मरीज होश में नहीं रहता. यह मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति होती है.
मानसिक रोगों की वजह
कई मरीजों में मिरगी मानसिक रोगों की वजह भी बन सकती है. डॉ आर सुनील के अनुसार मिरगी के करीब तीन फीसदी मरीज विभिन्न तरह के मानसिक रोगों के शिकार होते हैं.
अधिक दिनों तक मिरगी का इलाज नहीं कराने से लोग पागलपन के शिकार हो सकते हैं. कुछ उदासी, उलझन के साथ हिस्टीरिया के शिकार हो जाते हैं. मिरगी के प्रति समाज में धारणा भी मरीजों की मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है और अवसाद से भी पीड़ित हो जाते हैं. ऐसे में जरूरी है इसके मरीज से अन्य रोगियों की तरह सहानुभूति रखी जाये और उसे हीन भावना से न देखा जाये.
मिरगी के मुख्य कारण
– बच्चों में जन्म के समय आॅक्सीजन की कमी
– जन्मजात विकृति
– मस्तिष्क में ट्यूमर
– पुराना पक्षाघात के घाव, दिमाग में चोट
– खून में कुछ रासायनिक तत्वों का असंतुलन
– रक्त में शुगर की कमी या अधिकता
– दिमाग के संक्रमण जैसे इंसेफ्लाइटिस, टीबी व न्यूरोसिस्टोसरकोसिस आदि
– वंशानुगत
दौरे के समय ऐसा करें
– मरीज को तुरंत एक करवट लिटा कर कपड़े ढीले कर दें
– जीभ को कटने से बचाने के लिए दांतों के बीच रूमाल रख दें
– नजदीकी अस्पताल ले जाकर जल्द इलाज शुरू कराएं
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