गौरेया के संरक्षण में जुटे नथुनी

बड़हरिया : भले ही प्रदेश सरकार ने गौरया को राज्य पक्षी घोषित कर अपना फर्ज पूरा कर लिया. लेकिन एक गुमनाम व्यक्ति अपने सीमित संसाधनों व दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर गौरेया को बचाने व संरक्षित करने में जुटा है. इसे न सरकार से किसी प्रकार की मदद की उम्मीद है व न समाज […]
बड़हरिया : भले ही प्रदेश सरकार ने गौरया को राज्य पक्षी घोषित कर अपना फर्ज पूरा कर लिया. लेकिन एक गुमनाम व्यक्ति अपने सीमित संसाधनों व दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर गौरेया को बचाने व संरक्षित करने में जुटा है. इसे न सरकार से किसी प्रकार की मदद की उम्मीद है व न समाज से पहचान की इच्छा. वह तो जो कुछ भी कर रहा है स्वत: सुखाय. वह अपनी संवेदना को महज अभिव्यक्ति दे रहा है. जी हां, प्रखंड के कैलखुर्द के नथुनी ठाकुर ने ज्ञानी मोड़ स्थित अपने हेयर कटिंग सैलून के बरामदे में करीब 60 घोसले बना रखे हैं, जहां सैकड़ों की संख्या में गौरेया ने अपना बसेरा बना रखा है. ये घोंसले उन्होंने दवा व कपड़ों के डिब्बों से बनाये हैं.
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