मासूमों के भोजन पर शिक्षकों की है नजर

Published at :09 Jul 2016 7:39 AM (IST)
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मासूमों के भोजन पर शिक्षकों की है नजर

नागेंद्र श्रीवास्तव गोपालगंज : स्कूलों में कम उपस्थिति, तो कहीं घटिया भोजन का खेल चल रहा है. बच्चों के दोपहर के भोजन एमडीएम में बड़े पैमाने पर खेल हो रहा. इस खेल में स्कूल के हेडमास्टर से लेकर जिले के एमडीएम प्रभारी तक लिप्त हैं.स्कूल में एमडीएम बनाने के दौरान अधिकतर हेडमास्टर छात्रों की उपस्थित […]

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नागेंद्र श्रीवास्तव
गोपालगंज : स्कूलों में कम उपस्थिति, तो कहीं घटिया भोजन का खेल चल रहा है. बच्चों के दोपहर के भोजन एमडीएम में बड़े पैमाने पर खेल हो रहा. इस खेल में स्कूल के हेडमास्टर से लेकर जिले के एमडीएम प्रभारी तक लिप्त हैं.स्कूल में एमडीएम बनाने के दौरान अधिकतर हेडमास्टर छात्रों की उपस्थित को बढ़ा कर रजिस्टर तैयार करते हैं.
स्कूल में 450 छात्रों का नामांकन हैं, तो छात्रों की उपस्थित 440 दर्ज की जाती है, जबकि हकीकत में 200 सौ छात्र ही उपस्थित होते हैं. इतना ही नहीं मेनू के अनुरूप खाना भी नहीं बनाया जाता है. गुरुजी स्कूल पहुंचते ही खाना बनवाने में व्यस्त हो जाते हैं. गुरुजी को इतना भी वक्त नहीं मिलता कि कभी खुद क्लास लें. खाना बनवाने व बच्चों को खिलवाने तक की जवाबदेही गुरुजी की है.उसके बाद रिकाॅर्ड को दुरुस्त करने में पूरा दिन बीत जाता है.
गुरु जी के साथ भी मजबूरी
शिक्षकों का कहना है कि कम पैसे मेंमीनू के अनुरूप खाना बनाना मुश्किल है. महंगाई चरम पर है. महंगाई के हिसाब से फंड एमडीएम में नहीं मिल रहा. ऊपर से एमडीएम का चावल एक बोरा 50 किलो के नाम पर मिलता है. उसका वजन किया जाये तो महज 42 से 45 किलो चावल रहता है.
चावल वजन करके नहीं दिया जाता. 42 किलो चावल को 50 किलो बनाने में छात्रों की उपस्थित बढ़ानी मजबूरी होती है.शिक्षकों की मानें तो बीआरपी से लेकर एमडीएम प्रभारी , बीइओ, डीइओ तक विद्यालय की जांच करने पहुंचते हैं. जांच करनेवाले अधिकारी को खुश करने का प्रयास गुरुजी करते हैं.अधिकारी अगर खुश नहीं हुए, तो उल्टी रिपोर्ट कर दी जाती है. शिक्षकों को भयभीत कर मोटी रकम देने के बाद जिम्मा छूटता है. इस जांच में लगने वाले खर्च भी एमडीएम से ही गुरु जी निकालने का प्रयास करते हैं.
जांच में खुला फर्जी उपस्थिति का राज
मिड डे मील में फर्जी उपस्थिति का खेल चल रहा है. अधिकतर स्कूलों में ऐसा ही हो रहा है. छात्रों की अधिक उपस्थिति बना कर चावल और राशि में गड़बड़ी की जा रही है. एमडीएम में स्कूल में बीआरपी स्तर पर की गयी जांच में बैकुंठपुर प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय महारानी पकड़ीहार टोला, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय देवकुली दुसाध टोली, भोरे प्रखंड नवसृजित प्राथमिक विद्यालय मुराडीह, प्राथमिक विद्यालय खजुराहा मिश्र, प्राथमिक विद्यालय सकतौली, विजयीपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय नवकाटोला, उत्क्रमित मध्य विद्यालय भरपुरवा, प्राथमिक विद्यालय बंजरिया में गड़बड़ी पाते हुए हेडमास्टर से जवाब-तलब किया गया है.
स्थानीय समस्या से बंद है एमडीएम
हेडमास्टर की लापवाही-हथुआ के उत्क्रमित मध्य विद्यालय सबेया, फुलवरिया के मध्य विद्यालय बथुआ बाजार.
खाता संचालन के अभाव में-बरौली प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय ढोढ़ा टोला रूपनछाप, हथुआ के उमवि बोसिया.
सचिव के कारण-सदर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय मगुरहा, मांझा के प्राथमिक विद्यालय मुजौना.
प्रभार के विवाद में-मांझा के उमवि लगंटू हाता, प्राथमिक विद्यालय पिठौरी, बरौली प्रखंड के उमवि छोटा बढ़ेया, बैकुंठपुर का नवसृज प्रावि आशा खैरा बीनटोली, भोरे के नवसृजित प्रावि खजुरहा पांडेय टोला.
स्कूल की संख्या-1798
एमडीएम संचालित-1730
एमडीएम बंद-68
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