वृद्ध संत की अंतिम इच्छा, उनकी जमीन पर बने हाइस्कूल

Published at :21 Jun 2016 7:22 AM (IST)
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वृद्ध संत की अंतिम इच्छा, उनकी जमीन पर बने हाइस्कूल

मांझा (गोपालगंज) : उम्र 94 वर्ष. शरीर लाचार. अब व्हीलचेयर सहारा है. शरीर को छोड़ कर कब सांस उड़ जाये, कहना मुश्किल है. जीवन की अंतिम ख्वाहिश है कि उनकी जमीन में उत्क्रमित हाइस्कूल का भवन बन जाये. इलाके के बच्चे मैट्रिक तक की पढ़ाई यहां से करें. उन्हें पांच किमी दूर मांझा के माधवालाल […]

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मांझा (गोपालगंज) : उम्र 94 वर्ष. शरीर लाचार. अब व्हीलचेयर सहारा है. शरीर को छोड़ कर कब सांस उड़ जाये, कहना मुश्किल है. जीवन की अंतिम ख्वाहिश है कि उनकी जमीन में उत्क्रमित हाइस्कूल का भवन बन जाये. इलाके के बच्चे मैट्रिक तक की पढ़ाई यहां से करें. उन्हें पांच किमी दूर मांझा के माधवालाल हाइस्कूल पर आश्रित न होना पड़े. जमीन दान देने के लिए यह संत सीओ से लेकर शिक्षा विभाग के डीइओ, डीएम तक के जनता दरबार में आवेदन देकर थक चुके. इनकी जमीन रजिस्ट्री के लिए शुल्क माफ नहीं होने के कारण सरकार को यह जमीन नहीं रजिस्ट्री कर पा रहे हैं. यह मामला है मांझा प्रखंड के संतपुर का. 2014 में संतपुर मध्य विद्यालय को उत्क्रमित हाइस्कूल बनाने का फैसला शिक्षा विभाग ने किया. जमीन नहीं मिलने के कारण उत्क्रमित उच्च विद्यालय का भवन नहीं बना.
इसकी जानकारी जब इस गांव के संत सुदामा दास को हुई, तो उन्होंने अपनी एक एकड़ जमीन सरकार को दान करने के लिए निर्णय लिया. जमीन की कीमत 1.3 करोड़ रुपये है. जमीन के निबंधन में 8.24 लाख रुपये खर्च होने हैं. इतने रुपये ये संत कहां से लाये. जमीन का निबंधन शुल्क माफ हो जाये. संत सुदामा दास ने भवन निर्माण के लिए राज्यपाल के नाम सेे जमीन रजिस्ट्री करने की संकल्प लिया. उन्होंने 25 जून, 2015 को मांझा के सीओ, डीइओ, अवर निबंधन, डीएम के जनता दरबार में पहुंच कर रजिस्ट्री शुल्क माफ करने के लिए अपील की.
पहले जमीन दान देकर बना चुके हैं मध्य विद्यालय
संत सुदामा दास अपनी जमीन देकर यहां मध्य विद्यालय बना चुके हैं. सात अक्तूबर, 1985 में दो कट्ठा तथा 21 जनवरी, 1986 में दो कट्ठा जमीन विद्यालय बनाने के लिए दान में दी गयी, वहीं उनके गुरुजी महंत चरण दास ने भी आठ फरवरी, 1960 में दो कट्ठा जमीन दान की थी, जिस पर पहले प्राथमिक तथा बाद में मध्य विद्यालय के रूप में उत्क्रमित कर दिया गया था.अवर निबंधन पदाधिकारी अमित कुमार सिन्हा की मानें, तो निबंधन शुल्क माफ करने के लिए जमीन के दानकर्ता को अवर निबंधन को आवेदन देना है.
अवर निबंधन की तरफ से सरकार को अनुशंसा कर शुल्क माफ करने का आग्रह किया जाता है, जो कैबिनेट की बैठक में पारित होता है. कैबिनेट के आदेश आते ही निबंधन शुल्क माफ कर रजिस्ट्री की जाती है. गोपालगंज के अपर समाहर्ता हेमंतनाथ देव ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है.
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