बेचते हैं लाखों के धान

Published at :20 Jun 2016 2:32 AM (IST)
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बेचते हैं लाखों के धान

तीन रुपये किलो चावल व दो रुपये किलो गेहूं खरीदनेवाले एक गरीब परिवार जिसका जीवन सरकारी सस्ते अनाज पर टिका है, वे एक तरफ सरकारी अनाज का दावा करते हैं, तो दूसरी तरफ लाखों रुपये का धान बेचते हैं. प्रभात खबर को उपलब्ध कराये गये साक्ष्य में इसका सनसनीखेज खुलासा हुआ है. गोपालगंज : यह […]

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तीन रुपये किलो चावल व दो रुपये किलो गेहूं खरीदनेवाले
एक गरीब परिवार जिसका जीवन सरकारी सस्ते अनाज पर टिका है, वे एक तरफ सरकारी अनाज का दावा करते हैं, तो दूसरी तरफ लाखों रुपये का धान बेचते हैं. प्रभात खबर को उपलब्ध कराये गये साक्ष्य में इसका सनसनीखेज खुलासा हुआ है.
गोपालगंज : यह दो केस महज बानगी भर है, जो प्रशासनिक दावे की पोल खोल रहे हैं. व्यक्ति एक है, जो सरकारी दुकान से दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल खरीद कर अपना जीवन यापन करता है.
वही व्यक्ति लाखों का धान बेचता है. दोनों में कौन सही है. धान खरीद अभियान में टारगेट पूरा करने के लिए खाद्यान्न माफियाओं ने इस बार भी यह खेल किया है. इसका खुलासा आरटीआइ के जरिये हुआ है. धान खरीद में व्यापक पैमाने पर धांधली की गयी है. अगर उच्चस्तरीय जांच हो तो करोड़ों का घोटाला सामने आयेगा. यहां खाद्यान्न माफियाओं ने कागज में ही धान खरीद कर लक्ष्य को पूरा किया है. पैक्स के द्वारा जैसे-तैसे लोगों का नाम भर कर उनके नाम पर धान खरीदारी दिखा दी गयी. उनके नाम का चेक भी भंजा लिया गया. वास्तविक्ता यह है कि यूपी से पुराना चावल मंगा कर सिर्फ बोरा बदल कर आपूर्ति कर दी गयी. इस खेल में पैक्स राइस मिल, एसएफसी तथा ट्रांसपोटरों की मिलीभगत मानी जा रही है.
…तो गरीबों को इसलिए मिल रहा सड़ा चावल : यह तसवीर कुचायकोट के एसएफसी के गोदाम की है, जो चावल से भरा हुआ है. चावल का बोरा नया है. लेकिन, चावल पांच साल पुराना है.
इस चावल को शायद पशु भी न खा पाये. खाद्यान्न माफियाओं के चंगुल में फंसा सिस्टम गरीबों को सड़ा हुआ चावल खाने पर विवश कर रहा है. यह चावल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गरीबों को दिया जाना है, जो प्रमाणित करता है कि इस बार खाद्यान्न माफियाओं ने किसानों के नाम पर कागज में धान खरीदा है और यूपी से पुराना चावल मंगा कर गोदाम में भर दिया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
अगर एक ही व्यक्ति सस्ती दर पर अनाज उठाता है और दूसरी तरफ लाखों का धान बेचता है तो या तो वह गरीबी रेखा के नीचे का लाभ गलत ढंग से ले रहा है या उसके नाम पर फर्जी तरीके से धान की खरीदारी की गयी है. नियम संगत जांच कर इस मामले में कार्रवाई की जायेगी.
चंद्रशेखर सिंह, सहायक निबंधक, सारण
गरीब बन गयी जमींदार
केस 1 :- कटेया के मोहनपुर गांव निवासी शेषनाथ गोंड की पत्नी रीना देवी जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है, उनसे पैक्स ने 52 क्विंटल धान की खरीदारी कर ली. उनके खाता संख्या 15830 में 73320 रुपये का भुगतान भी किया गया. रीना देवी को सरकार द्वारा बीपीएल के लाभ देने की बात कही जा रही है.
शिक्षक भी गरीबी रेखा के नीचे
केस 2 :- योगेंद्र भगत जो मोहनपुर में शिक्षक के पद पर भी कार्यरत हैं. उनका परिवार गरीबी रेखा से नीचे है. उन्होंने 95 क्विंटल धान बेचा है. इसका भुगतान उनके खाता संख्या 1134001100109 में 1.33 लाख रुपये का लिया गया है. अगर ये गरीब हैं तो इनके पास इतना धान कहां से आया, यह जांच का विषय है.
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